BRICS ने साइबर ठगों पर कसा शिकंजा, अब सीमा पार चल रहे Scam Compounds के खिलाफ होगी साझा कार्रवाई।
BRICS देशों का साइबर ठगी के खिलाफ बड़ा ऐलान, Scam Compounds पर संयुक्त कार्रवाई की तैयारी…..
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit 2026 में दुनिया के तेजी से बढ़ते डिजिटल अपराध को लेकर सदस्य देशों ने गंभीर चिंता जताई है। BRICS नेताओं ने ऑनलाइन ठगी, क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड और ‘Scam Compounds’ चलाने वाले संगठित अपराधी नेटवर्क के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने पर जोर दिया है।
12-13 सितंबर को हुए सम्मेलन के बाद जारी New Delhi Declaration में पहली बार डिजिटल ठगी के उन नेटवर्कों को गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में रेखांकित किया गया, जो अलग-अलग देशों में बैठकर दूसरे देशों के नागरिकों को निशाना बनाते हैं। घोषणा में कहा गया कि ऐसे नेटवर्क डिजिटल तकनीक, भुगतान प्रणालियों और कमजोर परिस्थितियों में मौजूद लोगों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के लिए कर रहे हैं।
‘Scam Compound’ आखिर क्या है?
Scam Compound ऐसे संगठित ठगी केंद्र होते हैं जहां बड़ी संख्या में लोगों को एक जगह रखकर उनसे जबरन या संगठित तरीके से ऑनलाइन अपराध करवाया जाता है। यहां से फर्जी निवेश योजना, क्रिप्टोकरेंसी ठगी, रोमांस स्कैम, डिजिटल गिरफ्तारी जैसी धोखाधड़ी और अन्य ऑनलाइन फ्रॉड चलाए जा सकते हैं।
इन नेटवर्कों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि अपराधी और पीड़ित अक्सर अलग-अलग देशों में होते हैं। इसलिए किसी एक देश की पुलिस के लिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
BRICS घोषणा में इसी सीमा-पार अपराध को रोकने के लिए देशों के बीच बेहतर सूचना साझा करने और जांच एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पैसा वापस लाने पर भी जोर
BRICS देशों ने केवल अपराधियों को पकड़ने की बात नहीं कही है। घोषणा में अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और पीड़ितों तक रकम वापस पहुंचाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने की बात भी शामिल है।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर ठगी में अपराधी पैसा सीधे अपने खाते में नहीं रखते। रकम को अक्सर म्यूल अकाउंट, अलग-अलग बैंक खातों, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, क्रिप्टो एसेट और दूसरे देशों के वित्तीय चैनलों के जरिए घुमाया जाता है।
ऐसे मामलों में अपराधी को पकड़ लेना पर्याप्त नहीं होता। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना पड़ता है कि पैसा कहां गया और उसे कानूनी प्रक्रिया के जरिए कैसे वापस लाया जाए।
BRICS ने Financial Intelligence Units, Law Enforcement Agencies, Customs, Tax Authorities और Financial Supervisors के बीच सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता जताई है।
Cross-Border Payment भी निगरानी के दायरे में
डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी बदल रहे हैं। BRICS घोषणा में Cross-Border Payment Systems में धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह है कि भविष्य में केवल बैंकिंग सिस्टम ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान के रास्तों पर भी जोखिम की पहचान और निगरानी को ज्यादा महत्व दिया जा सकता है।
BRICS देशों ने Data Analytics, Information Sharing और Risk-Based Approach जैसे तरीकों के इस्तेमाल की जरूरत पर भी जोर दिया है।
AI और Deepfake से बढ़ रहा खतरा
साइबर ठगी अब केवल फर्जी फोन कॉल या नकली वेबसाइट तक सीमित नहीं है। Artificial Intelligence, Deepfake, Malicious Software और गलत डिजिटल पहचान जैसे उपकरणों ने अपराधियों की क्षमता बढ़ा दी है।
BRICS घोषणा में डिजिटल क्षेत्र में Cybercrime, Malware, Data Security, Misinformation, Disinformation और Deepfakes से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।
यह बदलाव आम लोगों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में किसी व्यक्ति की आवाज, वीडियो या पहचान की नकल करके ठगी करना और आसान हो सकता है।
यानी सिर्फ यह देखकर भरोसा करना कि सामने वाले का वीडियो या आवाज असली जैसी लग रही है, पर्याप्त नहीं होगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में डिजिटल भुगतान और इंटरनेट सेवाओं का विस्तार बहुत तेज है। इसका फायदा आम नागरिकों, कारोबार और अर्थव्यवस्था को मिला है, लेकिन इसी के साथ Cyber Fraud का जोखिम भी बढ़ा है।
भारत पहले से ही बैंक, पेमेंट सिस्टम, साइबर पुलिस और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के स्तर पर साइबर अपराध से निपटने की व्यवस्था मजबूत कर रहा है। BRICS स्तर पर सहयोग मिलने से उन मामलों में मदद मिल सकती है जहां ठगी का नेटवर्क भारत के बाहर बैठा हो या पैसा कई देशों के रास्ते घूम रहा हो।
BRICS घोषणा में सुरक्षित और भरोसेमंद ICT Environment तथा साइबर अपराध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात भी कही गई है। सदस्य देशों ने UN Convention against Cybercrime को आगे बढ़ाने की दिशा में भी समर्थन व्यक्त किया है।
असली चुनौती अब अमल की है
BRICS का यह फैसला महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसकी असली परीक्षा Implementation में होगी।
क्योंकि साइबर अपराधियों का नेटवर्क किसी एक देश की सीमा में नहीं रहता। एक देश में कॉल सेंटर, दूसरे देश में बैंक खाते, तीसरे देश में सर्वर और चौथे देश में क्रिप्टो वॉलेट हो सकता है।
ऐसे में केवल घोषणाओं से साइबर अपराध नहीं रुकेगा। देशों को तेज Information Sharing, Joint Investigation, Asset Tracing, Extradition और Evidence Sharing की व्यावहारिक व्यवस्था बनानी होगी।
BRICS ने पहले ही भ्रष्टाचार और भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सहयोग तथा Asset Recovery को मजबूत करने के लिए कई तंत्रों की दिशा में काम करने की बात कही है। साइबर ठगी के मामलों में इन्हीं व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाना अहम हो सकता है।
आम आदमी के लिए इसका मतलब
BRICS का फैसला सीधे तौर पर हर व्यक्ति के मोबाइल पर ठगी को खत्म नहीं करेगा। लेकिन यदि देशों के बीच जांच और वित्तीय जानकारी साझा करने की व्यवस्था मजबूत होती है, तो विदेश से चलने वाले साइबर फ्रॉड नेटवर्क, फर्जी भुगतान चैनल और अपराध की रकम छिपाने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई आसान हो सकती है।
सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि साइबर ठगी को केवल स्थानीय अपराध मानने के बजाय उसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के नजरिए से देखने की कोशिश तेज होगी।
और यही आज के डिजिटल दौर की सबसे बड़ी जरूरत है—क्योंकि अपराधी सीमा पार कर सकते हैं, लेकिन पीड़ित का पैसा और भरोसा उसी के देश में खत्म होता है।
