सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर फर्जी नियुक्ति पत्र थमाया, पांच युवाओं से लाखों की ठगी का खुलासा!!!!
PCMC में नौकरी दिलाने का झांसा, 5 युवाओं से ₹1.14 लाख की ठगी; फर्जी नियुक्ति पत्र देकर आरोपी गिरफ्तार…..
पुणे: सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाकर फर्जी नियुक्ति पत्र देने का एक मामला पिंपरी-चिंचवड़ में सामने आया है। पुलिस ने 26 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation (PCMC) के जलापूर्ति विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पांच नौकरी चाहने वालों से कुल ₹1.14 लाख लिए और बदले में उन्हें नियुक्ति पत्र थमा दिए।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रतीक राजेश ध्येंजे (26) के रूप में हुई है। वह भोसरी के चक्रपाणी वसाहत इलाके में रहता है और मूल रूप से सोलापुर जिले के अकलूज का रहने वाला बताया गया है। मामले में भोसरी पुलिस स्टेशन में 13 सितंबर को केस दर्ज किया गया।
कैसे सामने आया मामला?
पुलिस को आरोपी के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने कथित पीड़ितों में से एक से जानकारी की पुष्टि की और मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी को ट्रेस कर हिरासत में लिया।
आरोप है कि ध्येंजे ने युवाओं को यह भरोसा दिलाया कि वह उन्हें PCMC के Water Supply Department में नौकरी लगवा सकता है। सरकारी संस्थान का नाम सुनकर पीड़ितों को भरोसा हुआ और उन्होंने नौकरी पाने की उम्मीद में पैसे दे दिए।
इसके बाद उन्हें ऐसे Appointment Letters दिए गए, जो देखने में सरकारी दस्तावेज जैसे लगते थे, लेकिन वास्तव में फर्जी बताए गए।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है।
आरोपी पर पहले भी लगा था धोखाधड़ी का आरोप
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पुलिस के अनुसार आरोपी पहले भी एक कथित धोखाधड़ी मामले में बुक हो चुका है। पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के DCP (Crime) रोहिदास पवार के अनुसार, आरोपी पर पहले Maharashtra Housing and Area Development Authority (MHADA) से जुड़े एक मामले में लोगों को सस्ते घर दिलाने का भरोसा देकर पैसे लेने का आरोप लगा था।
पुलिस के मुताबिक उस मामले में कई लोगों से कथित तौर पर ₹22.41 लाख लिए गए थे और भोसरी पुलिस स्टेशन में BNS की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
नौकरी के नाम पर ठगी का बड़ा पैटर्न
यह घटना सिर्फ पांच लोगों से ₹1.14 लाख की ठगी तक सीमित मामला नहीं समझी जानी चाहिए। पिछले कुछ महीनों में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में फर्जी सरकारी नौकरी और नकली नियुक्ति पत्र से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं।
फरवरी 2026 में भी PCMC की नौकरी के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए जाने की शिकायत सामने आई थी। उस मामले में फर्जी मुहर और वेतन संबंधी विवरण का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी। एक अन्य मामले में फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए PMC/PCMC में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम मांगने का आरोप भी रिपोर्ट हुआ था।
इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले सिर्फ फोन या ऑनलाइन लिंक का इस्तेमाल नहीं करते। कई बार वे सरकारी कार्यालयों के नाम, पद, विभाग, मुहर और नियुक्ति पत्र जैसी चीजों का इस्तेमाल करके पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
फर्जी नियुक्ति पत्र को असली समझने की गलती न करें
नौकरी पाने की जल्दबाजी में उम्मीदवार अक्सर नियुक्ति पत्र देखकर संतुष्ट हो जाते हैं। लेकिन किसी भी सरकारी नौकरी के मामले में केवल कागज या ईमेल को देखकर भरोसा करना जोखिम भरा है।
उम्मीदवार को यह देखना चाहिए कि:
- भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना कहां जारी हुई है।
- आवेदन प्रक्रिया किस आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से हुई।
- नियुक्ति पत्र में दिया गया पद और विभाग वास्तव में मौजूद है या नहीं।
- भर्ती प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को सीधे पैसे देने की मांग तो नहीं की गई।
- दस्तावेज पर मौजूद नंबर, कार्यालय का पता और अधिकारी की जानकारी स्वतंत्र रूप से सत्यापित की गई है या नहीं।
- संबंधित नगर निगम या सरकारी विभाग से सीधे पुष्टि की गई है या नहीं।
सबसे महत्वपूर्ण बात: सरकारी नौकरी के नाम पर किसी एजेंट या बिचौलिए को पैसे देने से पहले आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी है।
बेरोजगारी की चिंता को ठग बना रहे हैं हथियार
इस तरह की ठगी का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, बल्कि नौकरी की जरूरत और सरकारी नौकरी का भरोसा है।
जब कोई व्यक्ति सरकारी संस्थान में नौकरी दिलाने का दावा करता है, तो उम्मीदवार अक्सर यह मान लेता है कि उसके पास विभाग के अंदर संपर्क है। इसके बाद ठग छोटी रकम से शुरुआत कर सकता है और नियुक्ति पत्र, चयन सूची या विभागीय कागज दिखाकर भरोसा मजबूत कर सकता है।
PCMC जैसे स्थानीय निकाय का नाम इस्तेमाल करना भी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। आम उम्मीदवार के लिए किसी दस्तावेज पर सरकारी विभाग का नाम और मुहर देखकर उसकी वास्तविकता जांचना आसान नहीं होता।
इस मामले में कथित रकम ₹1.14 लाख है, लेकिन असली चिंता इससे बड़ी है। यदि फर्जी सरकारी भर्ती का नेटवर्क समय रहते नहीं पकड़ा गया तो बेरोजगार युवाओं से अलग-अलग चरणों में बड़ी रकम वसूली जा सकती है।
इसलिए नौकरी का ऑफर मिलने से ज्यादा जरूरी है उसकी स्वतंत्र पुष्टि करना।
पुलिस जांच में अब क्या अहम होगा?
जांच के दौरान पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी ने कथित तौर पर कितने लोगों से संपर्क किया, कितने फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए गए, पैसे किस माध्यम से लिए गए और क्या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
इसके अलावा पहले दर्ज MHADA मामले और मौजूदा PCMC नौकरी धोखाधड़ी के बीच किसी समान नेटवर्क या तरीके का संबंध है या नहीं, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी पर लगे आरोपों की जांच चल रही है और अदालत में दोष साबित होना बाकी है। इसलिए उसे दोषी ठहराने के बजाय आरोपी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आम लोगों के लिए सीधी सीख
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कोई व्यक्ति अगर पैसे मांगता है, तो सबसे पहले नौकरी की आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया जांचें।
किसी भी नियुक्ति पत्र को असली मानने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और कार्यालय से सत्यापन करें। फर्जी दस्तावेज असली दिख सकते हैं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि मुश्किल नहीं होती।
नौकरी की जरूरत का फायदा उठाकर किया गया एक छोटा-सा भुगतान भी आपको बड़ी आर्थिक ठगी में फंसा सकता है।
