3 से 5% हर महीने मुनाफे का लालच, फर्जी प्रॉफिट स्टेटमेंट और फिर निवेशकों के करोड़ों रुपये गायब।
3-5% मुनाफे का झांसा, आलीशान फ्लैट और फर्जी प्रॉफिट स्टेटमेंट… ऐसे खुला शेयर ट्रेडिंग का बड़ा खेल…..
मुंबई: शेयर बाजार में पैसा लगाकर हर महीने मोटा और लगभग तय मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर निवेशकों को फंसाने का एक चौंकाने वाला मामला मुंबई में सामने आया है। मुंबई पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने 56 वर्षीय रोहन भूषण शेठ के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने खुद को सफल शेयर ट्रेडर बताकर निवेशकों का भरोसा जीता और उन्हें हर महीने करीब 3 से 5 फीसदी रिटर्न मिलने का दावा किया।
मामले की जांच में महाराष्ट्र और गुजरात के 42 निवेशकों की पहचान हुई है। इन लोगों ने करीब 5 करोड़ रुपये निवेश किए थे, जबकि पुलिस के अनुसार कथित तौर पर नुकसान की रकम करीब 30.26 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। जांच में एक NRI महिला निवेशक का नाम भी सामने आया है।
भरोसा जीतने के लिए बनाया गया पूरा माहौल
पुलिस के मुताबिक, शेठ ने निवेशकों के सामने खुद को शेयर बाजार का जानकार और सफल कारोबारी दिखाया। वह मुंबई के Sion और Matunga स्थित अपने आलीशान फ्लैटों में निवेशकों से मिलता था। वहां शेयर बाजार में निवेश की रणनीति समझाई जाती और कथित तौर पर ऐसे Excel statements दिखाए जाते थे, जिनमें निवेश पर लगातार मुनाफा दिखाई देता था।
यही आंकड़े निवेशकों के भरोसे का सबसे बड़ा आधार बने। बाद में जांच एजेंसी को शक हुआ कि इन रिकॉर्ड में दिखाया गया मुनाफा वास्तविक ट्रेडिंग का नतीजा नहीं था, बल्कि कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार किए गए आंकड़े थे।
यहां धोखाधड़ी का तरीका बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआत में निवेशक को कुछ रकम वापस मिल जाए तो उसे लगता है कि पैसा वास्तव में शेयर बाजार में लगाया जा रहा है। इसी भरोसे के बाद वह ज्यादा रकम लगाने के लिए तैयार हो सकता है। इस मामले में भी EOW का आरोप है कि शुरुआती दौर में निवेशकों को कथित मुनाफे या रिटर्न के रूप में भुगतान किया गया।
एक परिवार से ही 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की शिकायत
मामले की शुरुआत संजय हीरालाल शाह, 60 वर्षीय सेवानिवृत्त मुंबई निवासी की शिकायत से हुई। उन्होंने अप्रैल में मुंबई पुलिस आयुक्त के पास शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनके और उनके परिवार से कुल 10.81 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगी गई।
पुलिस के अनुसार, शेठ का संपर्क शाह के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे से वर्ष 2020 में हुआ था। उस समय वह शेयर ट्रेडिंग से जुड़े कारोबार के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन तैयार करवा रहा था, जिसे बाद में Investok नाम दिया गया।
कोविड महामारी के दौरान शेठ ने शाह से फोन और WhatsApp के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग को लेकर बातचीत शुरू की। आरोप है कि शुरुआत में करीब 1 फीसदी मासिक रिटर्न का भरोसा दिया गया। बड़ी रकम लगाने पर कथित रिटर्न बढ़ाकर 3 से 5 फीसदी प्रति माह तक बताया गया।
शिकायत के मुताबिक, शाह ने करीब 97.50 लाख रुपये निवेश किए। इसके लिए उन्होंने परिचितों से लगभग 1 करोड़ रुपये उधार भी लिए थे। उन्हें करीब 50.61 लाख रुपये कथित लाभ या रिटर्न के तौर पर मिले, लेकिन लगभग 1.02 करोड़ रुपये की रकम कथित तौर पर बाकी रह गई।
इसी परिवार से उनकी पत्नी द्वारा करीब 1.13 करोड़ रुपये और बेटे द्वारा लगभग 7.02 करोड़ रुपये लगाए जाने का भी आरोप है।
जब पैसे वापस मांगने लगे निवेशक, तो बदल गया रवैया
EOW के अनुसार, निवेशकों को जब अपनी रकम निकालने की जरूरत पड़ी तो भुगतान में देरी शुरू हुई। कुछ मामलों में कथित तौर पर भुगतान टालने के लिए अलग-अलग कारण बताए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि कुछ निवेशकों को कथित रिटर्न दिया जाता रहा ताकि उनका भरोसा बना रहे।
जांच में EOW ने दावा किया कि निवेशकों को कुल मिलाकर लगभग 3.8 करोड़ रुपये ब्याज या कथित मुनाफे के रूप में वापस किए गए। लेकिन निवेश की पूरी रकम और बताए गए मुनाफे के बीच बड़ा अंतर बना रहा।
यहीं से मामला सामान्य निवेश नुकसान से निकलकर कथित Investment Fraud की दिशा में गया।
आलीशान जिंदगी भी जांच के घेरे में
पुलिस के अनुसार, आरोपी का जीवन स्तर भी जांच का हिस्सा बना। EOW ने दावा किया कि उसके पास मुंबई में तीन फ्लैट और गुजरात में भी एक संपत्ति थी। इनमें Sion Circle के पास Beaumonte और Matunga का Bellissimo शामिल हैं। दोनों अपार्टमेंट की अनुमानित कीमत करीब 5-5 करोड़ रुपये बताई गई है।
जांच एजेंसी ने कथित तौर पर चार वाहन भी जब्त किए, जिनमें BMW, Mercedes और Mahindra Thar शामिल हैं। इसके अलावा करीब 14 महंगी imported watches भी जांच में सामने आईं, जिनमें Rolex, Hublot और IWC जैसी घड़ियां शामिल हैं। EOW का आरोप है कि इन संपत्तियों और महंगी वस्तुओं की खरीद का संबंध कथित ठगी की रकम से हो सकता है।
तीन पहचान और विग का इस्तेमाल?
मामले में एक और असामान्य पहलू सामने आया है। EOW के अनुसार, शेठ ने कथित तौर पर दो अन्य पहचान का भी इस्तेमाल किया और निवेशकों से मिलने के दौरान विग पहनता था। जांच एजेंसी का कहना है कि वह गिरफ्तारी से पहले मुंबई छोड़कर दो बड़े सूटकेस के साथ चला गया था।
EOW ने उसे 3 जुलाई 2026 को गुजरात के Valsad से गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए निवेशकों, लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई।
असली सवाल: शेयर बाजार में पैसा गया भी था या नहीं?
इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि जिन लोगों को बताया गया कि उनका पैसा शेयर बाजार में लगाया जा रहा है, क्या वास्तव में उसी तरह निवेश किया गया था?
EOW के आरोपों के मुताबिक, निवेशकों को वास्तविक ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे की जगह फर्जी profit statements दिखाए गए। अगर जांच में यह आरोप अदालत में साबित होता है, तो यह केवल खराब शेयर निवेश या बाजार में नुकसान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि निवेशकों को जानबूझकर गलत जानकारी देकर पैसा हासिल करने का गंभीर मामला बन सकता है।
इससे एक बड़ा सबक भी निकलता है—शेयर बाजार में तय या लगभग तय मासिक रिटर्न का दावा अपने आप में बड़ा red flag हो सकता है। बाजार में रिटर्न की गारंटी नहीं होती। खासकर जब कोई व्यक्ति निजी तौर पर पैसा लेकर 3, 4 या 5 फीसदी हर महीने देने का वादा करे, तो निवेशक को यह पता लगाना चाहिए कि पैसा किस नियामक ढांचे और किस अधिकृत संस्था के माध्यम से लगाया जा रहा है।
पहले कुछ महीनों का रिटर्न सबसे बड़ा जाल हो सकता है
इस मामले की कथित कार्यप्रणाली को समझें तो एक संभावित पैटर्न दिखाई देता है—पहले भरोसा बनाना, फिर निवेश बढ़वाना और उसके बाद भुगतान रोक देना।
जुलाई में प्रकाशित रिपोर्ट में भी EOW के हवाले से बताया गया था कि आरोपी पर Investok के माध्यम से निवेश योजना चलाने और निवेशकों को 2 से 5 फीसदी मासिक रिटर्न का भरोसा देने का आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती महीनों में रिटर्न देने के बाद भुगतान रुक गया और निवेशकों ने पुलिस से संपर्क किया।
इससे स्पष्ट होता है कि मामला केवल किसी एक निवेशक की शिकायत तक सीमित नहीं था। आगे की जांच में अलग-अलग निवेशकों के बयान और वित्तीय लेनदेन सामने आने के साथ कथित धोखाधड़ी का दायरा बड़ा हुआ।
आम निवेशक क्या सावधानी बरतें?
इस मामले से पांच महत्वपूर्ण चेतावनियां निकलती हैं:
1. Guaranteed Return से सावधान रहें: शेयर बाजार में हर महीने तय मुनाफे का वादा जोखिम का संकेत हो सकता है।
2. Excel या WhatsApp statement को सबूत न मानें: वास्तविक निवेश और ट्रेडिंग की पुष्टि स्वतंत्र स्रोत से करें।
3. पैसा निजी खाते में भेजने से बचें: निवेश का पैसा कहां जा रहा है, इसकी पूरी जानकारी रखें।
4. केवल दिखावे से प्रभावित न हों: महंगी कार, फ्लैट, घड़ी या शानदार ऑफिस किसी व्यक्ति के वैध निवेश कारोबार का प्रमाण नहीं हैं।
5. निवेश की स्वतंत्र पुष्टि करें: किसी एजेंट या व्यक्ति के बताए आंकड़ों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय संबंधित SEBI-regulated intermediary और आधिकारिक account statements की जांच करें।
निष्कर्ष
मुंबई का यह मामला दिखाता है कि आधुनिक निवेश ठगी हमेशा फोन कॉल या फर्जी वेबसाइट के जरिए ही नहीं होती। कभी-कभी महंगा फ्लैट, शेयर बाजार की भाषा, कथित profit statement और कुछ शुरुआती भुगतान मिलकर इतना भरोसा पैदा कर देते हैं कि निवेशक बड़ी रकम जोखिम में डाल देता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि EOW द्वारा लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपपत्र और पुलिस जांच किसी आरोपी के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होते। अदालत में आरोप साबित होना बाकी है।
लेकिन निवेशकों के लिए संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—जहां बाजार जोखिम के बावजूद हर महीने 3-5 फीसदी तय कमाई का भरोसा दिया जा रहा हो, वहां मुनाफे से पहले सवाल पूछना जरूरी है।
