डेटिंग ऐप पर दोस्ती हुई, विदेशी डॉक्टर बना ठग और युवक के ₹1.46 लाख गायब हुए!!!
Grindr पर मिला अमेरिका का डॉक्टर, फिर शुरू हुआ ठगी का खेल; 23 साल के युवक से ₹1.46 लाख की ठगी
नई दिल्ली: डेटिंग ऐप पर किसी अनजान व्यक्ति से दोस्ती करना अब सिर्फ निजी सुरक्षा का मामला नहीं रह गया है। साइबर अपराधी अब भावनात्मक भरोसा, नकली पहचान और फर्जी सरकारी अधिकारियों का इस्तेमाल करके लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं। दिल्ली में सामने आया एक ऐसा ही मामला बताता है कि कैसे कुछ ही दिनों में एक युवक की पूरी बचत खत्म हो गई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बरेली के पास रहने वाला 23 वर्षीय युवक एक डेटिंग ऐप Grindr के जरिए कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया, जिसने खुद को अमेरिका का डॉक्टर बताया। कुछ ही दिनों में बातचीत दोस्ती और भरोसे में बदल गई। इसके बाद आरोपी ने भारत आने की कहानी सुनाकर युवक से अलग-अलग बहानों से ₹1.46 लाख ट्रांसफर करा लिए।
पुलिस की जांच में कथित तौर पर इस मामले के तार कई राज्यों तक पहुंचे और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें एक नाइजीरियाई महिला भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों ने दूसरे लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है।
कहानी की शुरुआत ‘Dr Harry Robot’ से हुई
पुलिस के अनुसार, युवक की बातचीत 25 मार्च को ‘Dr Harry Robot’ नाम के प्रोफाइल से शुरू हुई। आरोपी ने खुद को अमेरिका में रहने वाला डॉक्टर बताया।
बातचीत को डेटिंग ऐप से हटाकर WhatsApp पर ले जाया गया। युवक के मुताबिक, सामने वाला व्यक्ति लगातार बातचीत करता था, उसकी तारीफ करता था और भारत आने की बात करता था। इससे धीरे-धीरे युवक को उस पर भरोसा होने लगा।
इसके बाद कथित डॉक्टर ने बताया कि वह भारत आ रहा है और पहले मुंबई पहुंचेगा, फिर दिल्ली आएगा।
यहीं से रोमांस/डेटिंग फ्रॉड का असली आर्थिक जाल शुरू हुआ।
पहले ₹25 हजार, फिर बढ़ती गई रकम
कथित डॉक्टर ने दावा किया कि मुंबई पहुंचने के बाद उसके पास भारतीय मुद्रा नहीं है और दिल्ली आने के लिए टिकट खरीदने के लिए उसे ₹25,000 चाहिए।
युवक ने पैसे भेज दिए।
इसके बाद आरोपी ने विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने के लिए कथित तौर पर ‘Money Declaration Certificate’ की जरूरत बताई और इसके लिए करीब ₹75,000 मांगे।
इसके बाद एक और कहानी सामने आई।
आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि कस्टम अधिकारियों ने उसका सामान रोक लिया है और उसे छोड़ने के लिए करीब ₹1 लाख की मांग की जा रही है। बाद में उसने कहा कि वह अधिकारियों से बात करके रकम ₹50,000 करा चुका है।
युवक ने यह रकम भी भेज दी।
इस तरह अलग-अलग UPI IDs और बैंक खातों के जरिए कुल ₹1.46 लाख ट्रांसफर किए गए। पुलिस के अनुसार, इनमें से कुछ खाते कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों के बताए गए थे।
सबसे बड़ा झूठ—सोना और डॉलर वाला पार्सल
जब युवक से पैसे लिए जा चुके थे, तब कथित डॉक्टर ने कहानी को और बड़ा कर दिया।
उसने कहा कि उसके पास अमेरिकी डॉलर और सोने वाला एक पार्सल है, जिसे वह भारत लाया है और युवक के लिए उपहार है।
इसके बाद गिरफ्तारी और क्लीयरेंस फीस की एक और कहानी सुनाई गई और कथित तौर पर ₹1 लाख और मांगे गए।
लेकिन इस बार युवक को शक हो गया।
उसने WhatsApp पर भेजी गई एयरपोर्ट की तस्वीर को दोबारा देखा और इंटरनेट पर उसकी जांच की।
तब उसे पता चला कि तस्वीर मुंबई एयरपोर्ट की नहीं बल्कि दिल्ली एयरपोर्ट की थी।
जब उसने कथित डॉक्टर से इस बारे में सवाल किया तो तस्वीर तुरंत डिलीट कर दी गई।
युवक समझ गया कि उसके साथ धोखा हुआ है।
इसके बाद उसने दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट में शिकायत की और FIR दर्ज की गई।
पुलिस ने ऐसे पकड़ा पूरा नेटवर्क
जांच में पुलिस ने कथित तौर पर बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया।
पैसों का ट्रेल पहले दिल्ली के दक्षिणी हिस्से तक पहुंचा। वहां से पुलिस की जांच तेलंगाना तक गई।
पुलिस के मुताबिक, दीपक कुमार (22) को दिल्ली के मैदान गढ़ी से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद तेलंगाना से कोंडा सागर (33) और अजमीरा विनोद कुमार (30) को पकड़ा गया।
पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने mule bank accounts यानी ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को आगे भेजने के लिए किया गया।
ऐसे खातों में आमतौर पर ठगी का पैसा पहले आता है और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर या नकद निकासी के जरिए उसका रास्ता छिपाने की कोशिश की जाती है।
नाइजीरियाई महिला तक पहुंची जांच
डिजिटल डिवाइस की जांच के दौरान पुलिस को Simeon Miracle Chinonso, 22 वर्षीय नाइजीरियाई महिला का कथित लिंक मिला।
पुलिस के अनुसार, वह 2023 में छात्र वीजा पर भारत आई थी और विशाखापत्तनम में पढ़ाई कर रही थी।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसे कथित तौर पर भारत में लोगों को ऑनलाइन ठगने की तकनीक सिखाई गई थी। पुलिस के मुताबिक, इसमें अलग-अलग पहचान, आवाज, बातचीत और भावनात्मक प्रभाव का इस्तेमाल करना शामिल था।
पुलिस का दावा है कि Chinonso ने कई डेटिंग ऐप्स पर नकली पहचान बनाईं और इसी क्रम में ‘Dr Harry Robot’ नाम का प्रोफाइल इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, वह कथित तौर पर WhatsApp पर खुद को कभी डॉक्टर तो कभी इमिग्रेशन या कस्टम अधिकारी बताकर पीड़ितों पर दबाव बनाती थी।
मामले में आगे की जांच जारी है।
यह सिर्फ डेटिंग स्कैम नहीं, ‘Social Engineering’ का मामला है
इस केस को समझने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ठग ने सिर्फ नकली प्रोफाइल नहीं बनाया।
उसने एक के बाद एक भरोसा → लालच/उम्मीद → संकट → डर → भुगतान का पैटर्न इस्तेमाल किया।
पहले दोस्ती की गई।
फिर अमेरिका में डॉक्टर होने का दावा किया गया।
फिर भारत आने की कहानी बनाई गई।
इसके बाद अचानक एयरपोर्ट, कस्टम, विदेशी मुद्रा, पार्सल और पुलिस जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके आपात स्थिति पैदा की गई।
पीड़ित को यह महसूस कराया गया कि अगर उसने तुरंत पैसा नहीं दिया तो सामने वाला व्यक्ति बड़ी परेशानी में फंस जाएगा।
यही Social Engineering है—तकनीक से ज्यादा इंसान की भावनाओं और भरोसे को निशाना बनाना।
‘Nigerian Prince Scam’ का नया डिजिटल रूप?
दिल्ली पुलिस ने इस मामले की तुलना पुराने ‘Nigerian Prince Scam’ से की है।
पुराने ऑनलाइन फ्रॉड में लोगों को ईमेल भेजकर बताया जाता था कि कोई विदेशी राजकुमार, अधिकारी या कारोबारी बड़ी रकम दूसरे देश में ट्रांसफर करना चाहता है और इसके बदले पीड़ित को पैसा मिलेगा।
आज वही सोच नए प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रही है।
अब ईमेल की जगह Dating Apps, WhatsApp और Social Media हैं।
नकली राजकुमार की जगह Foreign Doctor या Romantic Partner है।
और बैंक ट्रांसफर के बहाने बदलकर Airport Clearance, Customs Fee, Currency Conversion, Parcel Release जैसे बहाने बन गए हैं।
यानी तकनीक बदल गई है, लेकिन ठगी का मूल तरीका वही है—पहले भरोसा बनाओ, फिर संकट पैदा करो और आखिर में पैसा मांगो।
यह पहली ऐसी घटना नहीं है
दूसरे मामलों से भी पता चलता है कि fake foreign doctor + dating app + airport/customs fee वाला तरीका दोहराया जा रहा है।
जून 2026 में बेंगलुरु में एक 26 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति के हाथों करीब ₹30 लाख गंवाए, जिसने खुद को अमेरिकी डॉक्टर बताया था। उस मामले में भी आरोपी ने भारत आने और एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों द्वारा रोके जाने की कहानी सुनाई थी।
मार्च 2025 में भी बेंगलुरु में Grindr के जरिए एक कथित फर्जी डॉक्टर की कहानी के चलते एक युवक से करीब ₹1.7 लाख की ठगी की रिपोर्ट सामने आई थी।
इससे संकेत मिलता है कि यह कोई एक isolated घटना नहीं है। Dating-app based romance fraud में एक जैसे बहानों और सामाजिक इंजीनियरिंग की तकनीकों का इस्तेमाल अलग-अलग शहरों में किया जा रहा है।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी सबक
1. Dating App पर विदेशी पहचान = भरोसे का प्रमाण नहीं
कोई व्यक्ति खुद को डॉक्टर, इंजीनियर, कारोबारी, सैनिक या विदेशी नागरिक बताए, इससे उसकी पहचान साबित नहीं होती।
2. भारत आने वाले व्यक्ति के लिए पैसे भेजना खतरनाक संकेत है
अगर कोई नया ऑनलाइन परिचित कहे कि वह एयरपोर्ट पर फंस गया है और टिकट, कस्टम या इमिग्रेशन के लिए तुरंत पैसा चाहिए, तो भुगतान न करें।
3. सरकारी अधिकारी WhatsApp पर ‘क्लीयरेंस फीस’ मांग रहे हों तो सावधान
कस्टम, पुलिस, इमिग्रेशन या किसी सरकारी विभाग के नाम पर अचानक निजी UPI या बैंक खाते में पैसा भेजने को कहा जाए तो इसे गंभीर Red Flag मानें।
4. फोटो और वीडियो भी फर्जी हो सकते हैं
एयरपोर्ट की तस्वीर, टिकट, ID कार्ड, डॉक्टर की फोटो या वीडियो—इनमें से कोई भी अकेला सबूत पर्याप्त नहीं है। आज डिजिटल सामग्री को आसानी से बदला या गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. पैसे चले गए हों तो शर्म के कारण चुप न रहें
भारत सरकार का National Cyber Crime Reporting Portal वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए उपलब्ध है और तत्काल सहायता के लिए 1930 हेल्पलाइन संचालित है। सरकारी जानकारी के अनुसार, 1930 सिस्टम को वित्तीय धोखाधड़ी में तेजी से कार्रवाई और रकम के ट्रेल पर काम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
तुरंत कदम: बैंक को सूचित करें, 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और सभी चैट, नंबर, UPI IDs, बैंक विवरण, स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
निष्कर्ष
इस घटना की सबसे बड़ी सीख यह है कि साइबर ठगी हमेशा डर दिखाकर ही नहीं होती—कई बार इसकी शुरुआत दोस्ती से होती है।
ठग पहले आपका भरोसा जीतता है, फिर आपकी भावनाओं को इस्तेमाल करता है और अंत में ऐसी स्थिति पैदा करता है जिसमें आपको लगता है कि पैसा देना ही समस्या का एकमात्र समाधान है।
Grindr हो या कोई दूसरा Dating App—ऑनलाइन पहचान को कभी भी वास्तविक पहचान का विकल्प न मानें।
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन दोस्ती के कुछ ही दिनों बाद भारत आने, महंगे गिफ्ट, विदेशी मुद्रा, एयरपोर्ट कस्टम या इमिग्रेशन समस्या की कहानी सुनाकर पैसे मांगता है, तो बातचीत रोकना और स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना सबसे सुरक्षित कदम है।
याद रखें: भरोसा बनाना ठग का पहला हथियार हो सकता है, लेकिन भुगतान करने से पहले सत्यापन आपका सबसे बड़ा बचाव है।
