बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा अब सिर्फ माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं, स्कूलों में भी Cyber Safety को मिल रही जगह।
स्कूल में सिर्फ पढ़ाई नहीं, अब Cyber Safety भी जरूरी: बच्चों को ऑनलाइन खतरे समझा रहा DigiSafe India…..
आज के बच्चे किताबों से जितना सीखते हैं, उतना ही समय मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो प्लेटफॉर्म और AI टूल्स पर भी बिताते हैं। यही वजह है कि बच्चों की डिजिटल दुनिया अब सिर्फ मनोरंजन या पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। इसके साथ Cyberbullying, Online Grooming, Blackmail, Fake Profiles, Scams, Privacy Breach और AI-generated Deepfake जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए DigiSafe India बच्चों के बीच साइबर सुरक्षा की समझ विकसित करने की कोशिश कर रहा है। संस्था की शुरुआत 2021 में Sushmitha Kishore Kumar Singh ने की। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में Cybercrime Intervention Officer (CCIO) कार्यक्रम किया और बाद में बच्चों तथा साइबर अपराध पीड़ितों के लिए जागरूकता और सहायता से जुड़े काम को आगे बढ़ाया।
बच्चों को सिर्फ “सावधान रहो” नहीं, खतरा पहचानना सिखाया जा रहा
DigiSafe India का तरीका सामान्य साइबर जागरूकता से थोड़ा अलग है। बच्चों को केवल यह नहीं बताया जाता कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों के उदाहरणों के जरिए यह समझाने की कोशिश की जाती है कि खतरा दिखाई कैसा देता है और उस समय फैसला कैसे लेना है।
कार्यक्रम में Social Media, Gaming Addiction, Digital Footprint, Online Blackmail और Scams जैसे विषय शामिल हैं। कक्षा में केस-आधारित वीडियो और गतिविधियों के जरिए बच्चों से सवाल करवाए जाते हैं—कौन-सा व्यक्ति भरोसेमंद हो सकता है, कौन-सी ऑनलाइन गतिविधि संदिग्ध है और परेशानी आने पर किस बड़े व्यक्ति से मदद मांगनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, DigiSafe India ने बेंगलुरु के 30 से ज्यादा स्कूलों में काम किया है। तमिलनाडु में भी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, CBSE स्कूलों और अन्य संस्थानों तक कार्यक्रम पहुंचाया गया है। कुछ सत्रों में Cyber Cell के अधिकारी और Ethical Hacker भी शामिल होते हैं, ताकि बच्चों को साइबर हमलों की तकनीकी वास्तविकता समझाई जा सके।
असली समस्या सिर्फ बच्चों की नहीं, माता-पिता की भी है
साइबर सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे जिस डिजिटल दुनिया में रहते हैं, उसमें माता-पिता हमेशा उनके साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चल पाते।
बच्चे किन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं?
वे किससे बात कर रहे हैं?
उनकी तस्वीरें और निजी जानकारी कहां जा रही है?
किसी अजनबी ने दोस्ती की है तो उसका उद्देश्य क्या है?
इन सवालों को समझना जरूरी है।
इसीलिए DigiSafe India अपने कार्यक्रम में Parents और Teachers को भी शामिल करता है। उद्देश्य यह है कि माता-पिता बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखते हुए उनके साथ भरोसे का रिश्ता भी बनाए रखें।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के आधिकारिक National Cyber Crime Reporting Portal पर भी बच्चों के लिए Cyber Grooming, Cyberbullying, Stalking और Online Harassment जैसे जोखिमों के बारे में चेतावनी दी गई है। पोर्टल माता-पिता को बच्चों से ऑनलाइन गतिविधियों पर खुलकर बातचीत करने और संदिग्ध गतिविधियों को गंभीरता से लेने की सलाह देता है।
अब AI ने साइबर सुरक्षा की चुनौती और बढ़ा दी है
कुछ साल पहले साइबर सुरक्षा का मतलब मुख्य रूप से फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट, पासवर्ड चोरी या Malware से बचना माना जाता था। लेकिन Artificial Intelligence यानी AI के तेजी से इस्तेमाल ने खतरे का स्वरूप बदल दिया है।
अब नकली तस्वीरें, आवाज, वीडियो और दूसरे तरह के Deepfake Content तैयार करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। AI का इस्तेमाल ठगी, पहचान के दुरुपयोग और गलत सूचना फैलाने में भी किया जा सकता है।
NCERT के Central Institute of Educational Technology (CIET) ने भी 2026 में “Cyber Safety in the Era of AI” नाम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें AI-enabled cyber threats, privacy breaches, deepfakes, AI-assisted fraud और identity misuse जैसे विषयों को साइबर सुरक्षा से जोड़कर समझाया गया।
DigiSafe India ने भी अपने मौजूदा साइबर-सुरक्षा पाठ्यक्रम में AI Safety को जोड़ना शुरू किया है। New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, संस्था के पास पहले से 100 मॉड्यूल हैं और AI सुरक्षा से जुड़े 80 अतिरिक्त मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इनका विस्तार क्षेत्रीय भाषाओं और ग्रामीण सरकारी स्कूलों तक करने की योजना भी बताई गई है।
भारत सरकार भी Cyber Safety को शिक्षा से जोड़ रही है
यह केवल किसी एक संस्था की पहल नहीं है। केंद्र सरकार के अनुसार, Information Security Education and Awareness (ISEA) कार्यक्रम के तहत देशभर में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
सरकार ने अगस्त 2026 में लोकसभा में बताया कि ISEA के तहत 6,650 जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं और इनमें 11.37 लाख से अधिक लोग शामिल हुए हैं। इनमें विद्यार्थी, शिक्षक, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से जुड़े लोग, सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि CBSE की ओर से डिजिटल एटीकेट और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण से जुड़े प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि NCERT ने अपने शैक्षणिक संसाधनों में साइबर सुरक्षा को शामिल किया है।
NCERT की CIET इकाई के अनुसार, स्कूलों में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं है। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को Cyber Threat पहचानने, निजी डेटा सुरक्षित रखने, ऑनलाइन उत्पीड़न या धोखाधड़ी की स्थिति में मदद मांगने और उचित रिपोर्टिंग प्रक्रिया समझने के लिए तैयार करना भी शामिल है।
लेकिन असली सवाल है—क्या सिर्फ जागरूकता काफी है?
यहीं इस पूरी पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है।
साइबर अपराध तेजी से बदलता है। आज जिस लिंक से ठगी हो रही है, कल उसकी जगह AI-generated voice call आ सकती है। आज जिस तरह Fake Profile बनाई जा रही है, कल Deepfake Video के जरिए किसी बच्चे को ब्लैकमेल किया जा सकता है।
इसलिए Cyber Safety एक बार पढ़ा जाने वाला Chapter नहीं, बल्कि लगातार अपडेट होने वाली Digital Skill है।
DigiSafe India की रिपोर्ट में भी इसी चुनौती का उल्लेख है। संस्था अपने मॉड्यूल को हर साल अपडेट करती है, क्योंकि नए Scam, Fraud और Online Threat लगातार सामने आते रहते हैं।
ऑस्ट्रेलिया का eSafety Commissioner भी स्कूलों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा को चार हिस्सों—Prepare, Engage, Educate और Respond—में देखने का ढांचा इस्तेमाल करता है। यानी सिर्फ बच्चों को खतरे बताना पर्याप्त नहीं; स्कूलों के पास घटना होने पर प्रतिक्रिया देने और नुकसान कम करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
आम परिवार के लिए सबसे जरूरी बात
साइबर सुरक्षा का मतलब बच्चे का मोबाइल छीन लेना नहीं है।
जरूरी है कि बच्चा यह समझे कि—
- OTP, Password और Personal Information किसी से साझा नहीं करनी है।
- अनजान व्यक्ति की Friend Request को तुरंत स्वीकार नहीं करना है।
- संदिग्ध Link, APK या File डाउनलोड नहीं करनी है।
- निजी फोटो और वीडियो शेयर करने से पहले सोचना है।
- Online Blackmail होने पर डरकर चुप नहीं रहना है।
- Cyberbullying या Grooming जैसी स्थिति में किसी Trusted Adult को तुरंत बताना है।
- सोशल मीडिया की Privacy Settings नियमित रूप से जांचनी हैं।
- साइबर अपराध होने पर सबूत—जैसे Screenshot, Chat, Number और Transaction Details—सुरक्षित रखने हैं।
भारत के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में तत्काल 1930 पर रिपोर्ट की जा सकती है। पोर्टल पर Cyber Crime की ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।
निष्कर्ष
बच्चों की डिजिटल दुनिया अब स्कूल की चारदीवारी से बाहर नहीं है। पढ़ाई, दोस्ती, गेमिंग, सोशल मीडिया और AI—सब कुछ इंटरनेट से जुड़ रहा है। इसलिए Digital Literacy के साथ Digital Safety भी जरूरी होती जा रही है।
DigiSafe India जैसी पहल इस दिशा में स्कूल, माता-पिता और बच्चों को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। लेकिन उपलब्ध सरकारी कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन-सुरक्षा मॉडल से एक बात स्पष्ट है—साइबर सुरक्षा को केवल जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली शिक्षा और Incident Response व्यवस्था के रूप में देखना होगा।
क्योंकि इंटरनेट पर सबसे कमजोर कड़ी हमेशा तकनीक नहीं होती—कई बार एक गलत क्लिक, एक भरोसा या एक साझा की गई निजी जानकारी भी बड़े नुकसान की शुरुआत बन सकती है।
