KPSC Veterinary Exam में कथित पेपर लीक का नेटवर्क, उम्मीदवारों से लाखों रुपये लेने का जांच में दावा!!!!
KPSC Exam Scam: ₹1.52 करोड़ में खरीदा गया था सवालों का कथित सौदा, टॉप रैंक तक पहुंचे उम्मीदवार…..
बेंगलुरु: सरकारी नौकरी की परीक्षा में मेहनत, योग्यता और पारदर्शी चयन की उम्मीद रखने वाले हजारों उम्मीदवारों के लिए कर्नाटक से सामने आया KPSC Veterinary Recruitment Scam गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर पहले से प्रश्न उपलब्ध कराने के लिए उम्मीदवारों से बड़ी रकम ली गई।
ताजा जांच में करीब ₹1.52 करोड़ के कथित पैसे के लेन-देन का पता चला है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर लीक हुए 60 से 80 सवालों का इस्तेमाल कुछ उम्मीदवारों ने परीक्षा से पहले तैयारी के लिए किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच में शामिल नौ उम्मीदवारों पर कथित तौर पर कुल ₹1.52 करोड़ देने का आरोप है। इनमें से तीन उम्मीदवारों ने बैकलॉग श्रेणी में शीर्ष रैंक हासिल की, जबकि छह अन्य मुख्य श्रेणी में टॉप-15 तक पहुंचे।
मामला आखिर है क्या?
मामला कर्नाटक सरकार में 400 Veterinary Officer यानी पशु चिकित्सा अधिकारी पदों की भर्ती से जुड़ा है। करीब 1,400 उम्मीदवारों ने इस भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया था और बाद में 329 उम्मीदवारों का चयन हुआ। जांच के दौरान कुछ सफल उम्मीदवारों के परीक्षा परिणाम और उनके पुराने शैक्षणिक प्रदर्शन के बीच अंतर की भी जांच की गई।
CID की जांच के मुताबिक, कथित पेपर लीक सिर्फ परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं था। जांच में आरोप सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले अलग-अलग होटल, रिसॉर्ट और लग्जरी विला में ठहराया गया और वहां उन्हें कथित तौर पर प्रश्न उपलब्ध कराए गए।
सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु के बाहरी इलाके देवनहल्ली में एक मिडिलमैन ने चार विला बुक किए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वहां करीब 20 उम्मीदवारों को लाया गया था।
₹40 लाख से ₹80 लाख तक की कथित डील
इस मामले की एक और अहम कड़ी कथित मिडिलमैन नेटवर्क है।
CID की जांच से संबंधित रिपोर्टों में आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र पाने के लिए ₹40 लाख से ₹80 लाख तक भुगतान किया। परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को कथित तौर पर सुरक्षित जगहों पर रखा गया और प्रश्नों की तैयारी कराई गई। बाद में उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया।
यानी जांचकर्ताओं के सामने जो तस्वीर उभर रही है, उसमें कथित घोटाला केवल प्रश्नपत्र बाहर निकालने तक सीमित नहीं था। इसमें पेपर तक पहुंच → उम्मीदवारों तक जानकारी पहुंचाना → उन्हें तैयारी कराना → परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना जैसी कई कड़ियों की जांच की जा रही है।
जांच में ₹1.52 करोड़ का मनी ट्रेल
CID की जांच में करीब ₹1.52 करोड़ का कथित मनी ट्रेल सामने आने की बात कही गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं ने दो बैंक खातों में करीब ₹92 लाख के जमा का पता लगाया। इन खातों में अलग-अलग उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹1 लाख से ₹10 लाख तक की रकम जमा हुई। जांच में कुछ अन्य उम्मीदवारों से नकद भुगतान के आरोप भी सामने आए हैं।
जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर कुछ बैंक खातों पर रोक लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित खातों में लगभग ₹69.2 लाख फ्रीज किए गए, जबकि मुख्य संदिग्ध बताए जा रहे बसवराज कन्नाले और उनकी पत्नी के खातों में करीब ₹71.18 लाख फ्रीज किए गए। जांच में ₹5.76 लाख नकद बरामद होने की भी बात सामने आई है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—पैसे का मिलना अपने आप में किसी व्यक्ति के अपराध को अदालत में साबित नहीं करता। जांच एजेंसियों को लेन-देन का स्रोत, उसका उद्देश्य और उससे जुड़े दूसरे सबूत अदालत के सामने स्थापित करने होते हैं।
सवालों के घेरे में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया
इस मामले में जांच सिर्फ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है।
जांच रिपोर्टों के मुताबिक, KPSC के तत्कालीन Controller of Examinations IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। गंगवार पर आरोप है कि परीक्षा के लिए अंतिम प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े होने के कारण उनके पास प्रश्नपत्र तक पहुंच थी और कथित तौर पर उसे एक मिडिलमैन तक पहुंचाया गया। वे इन आरोपों के संबंध में जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
इसी मामले में निलंबित KPSC चेयरमैन सहकार एस. शिवशंकरप्पा की भूमिका को लेकर भी जांच की गई है। CID ने परीक्षा के दिनों में अधिकारियों, मिडिलमैन और कुछ उम्मीदवारों के बीच हुई बातचीत और डिजिटल कम्युनिकेशन की जांच की है।
60 से 80 सवाल लीक होने का आरोप
इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा कथित Question Paper Leak है।
CID की जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा में करीब 60 से 80 सवाल पहले ही कुछ उम्मीदवारों तक पहुंचने की बात सामने आई है। जांच में यह भी आरोप है कि लगभग पांच उम्मीदवारों को इन कथित तौर पर लीक हुए सवालों के जवाब देने की विशेष तैयारी कराई गई।
जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर WhatsApp बातचीत, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल सबूत भी जुटाए हैं। अब इन सबूतों को उम्मीदवारों, बिचौलियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बीच जोड़कर देखा जा रहा है।
OMR शीट भी जांच के दायरे में
मामला सिर्फ प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं है।
CID ने कथित तौर पर परीक्षा की OMR Sheets की भी फोरेंसिक जांच शुरू की है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ता 758 OMR शीट से जुड़े फोरेंसिक विश्लेषण का इंतजार कर रहे थे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का तरीका सिर्फ पेपर लीक तक सीमित था या किसी अन्य तरीके से भी धोखाधड़ी हुई।
अब मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है
इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर मामला कर्नाटक हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। 21 सितंबर 2026 के आदेश में हाई कोर्ट ने कथित अनियमितताओं की दोबारा जांच के लिए पांच सदस्यीय SIT यानी Special Investigation Team गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को चुनौती देने के लिए Special Leave Petition (SLP) दायर करने की मंजूरी दी है।
सरकार का पक्ष है कि CID पहले ही अपनी जांच कर चुकी है, जबकि हाई कोर्ट के आदेश में नई SIT से जांच कराने की बात कही गई है। इसलिए अब इस मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण न्यायिक प्रक्रिया भी होगी।
इस घोटाले का असली नुकसान कितना बड़ा है?
पहली नजर में यह मामला ₹1.52 करोड़ का दिखाई देता है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव इससे कहीं बड़ा हो सकता है।
क्योंकि सरकारी भर्ती परीक्षा में यदि प्रश्नपत्र तक गैरकानूनी तरीके से पहुंचने का आरोप सही साबित होता है, तो इसका असर सिर्फ पैसे देने वाले उम्मीदवारों पर नहीं पड़ता। इसका सीधा असर उन हजारों उम्मीदवारों पर पड़ता है जिन्होंने बिना किसी अनुचित साधन के परीक्षा दी।
एक उम्मीदवार के लिए सरकारी नौकरी सिर्फ नौकरी नहीं होती। उसके पीछे कई साल की पढ़ाई, परिवार की आर्थिक उम्मीदें और करियर का भविष्य जुड़ा होता है।
इसलिए Exam Paper Leak का नुकसान केवल परीक्षा की एक कॉपी या कुछ सवालों तक सीमित नहीं रहता। यह पूरी Selection Process की Credibility पर सवाल खड़ा करता है।
लेकिन अंतिम फैसला जांच और अदालत पर निर्भर करेगा
इस पूरे मामले में एक बात स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। अभी सामने आए तथ्य जांच एजेंसियों के आरोप और जांच निष्कर्षों पर आधारित हैं। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें अदालत में दोष सिद्ध होने तक कानूनी रूप से आरोपी ही माना जाएगा।
आगे की जांच में यह तय होना है कि—
- प्रश्नपत्र वास्तव में किस स्तर से बाहर गया?
- कितने उम्मीदवारों को कथित तौर पर पहले से सवाल मिले?
- ₹1.52 करोड़ की पूरी रकम किन लोगों तक पहुंची?
- क्या परीक्षा प्रक्रिया में अंदरूनी मदद मिली?
- कितने चयन प्रभावित हुए?
- और क्या परीक्षा को दोबारा कराने या चयन प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत पड़ेगी?
यही सवाल अब इस मामले की दिशा तय करेंगे।
KPSC Veterinary Recruitment Case की सबसे बड़ी कहानी केवल ₹1.52 करोड़ नहीं है। असली सवाल यह है कि अगर किसी भर्ती परीक्षा की गोपनीयता टूटती है, तो क्या उस परीक्षा के परिणाम पर भरोसा कायम रह सकता है?
इसका अंतिम उत्तर जांच, न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले से ही सामने आएगा।
