शेयर बाजार में कमाई का लालच पड़ा भारी, फर्जी IPO ने लूटे ₹1.54 करोड़!!!
फर्जी IPO में ₹1.54 करोड़ गंवाने वाला कारोबारी: ज्यादा मुनाफे के लालच में ऐसे बिछाया गया ठगी का जाल……
राजकोट/मोरबी: गुजरात के मोरबी में एक कारोबारी कथित तौर पर ऐसे ऑनलाइन निवेश ठगी के जाल में फंस गया, जिसमें उसे एक आकर्षक IPO में पैसा लगाने और भारी मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया गया। भरोसा करने के बाद कारोबारी ने अलग-अलग चरणों में कुल ₹1.54 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि जिस IPO और निवेश अवसर के नाम पर पैसा लिया गया था, वह कथित तौर पर फर्जी था।
पैसा भेजने के बाद जब कारोबारी को अपनी रकम वापस नहीं मिली और कथित ठगों से संपर्क टूट गया, तब उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ। मामले की शिकायत पुलिस से की गई है और जांच के जरिए आरोपियों तथा पैसों के लेन-देन की कड़ियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
आखिर कैसे काम करता है Fake IPO Scam?
इस तरह की ठगी में अपराधी सिर्फ फोन करके पैसा नहीं मांगते। वे पहले विश्वास पैदा करते हैं, फिर निवेश का लालच देते हैं और उसके बाद धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं।
आमतौर पर तरीका कुछ ऐसा हो सकता है—
पहला चरण — निवेश का ऑफर:
पीड़ित को किसी IPO, शेयर या प्री-IPO निवेश का मौका बताया जाता है। इसे सीमित समय का या बेहद खास अवसर बताया जा सकता है।
दूसरा चरण — भरोसा बनाना:
ठग खुद को निवेश विशेषज्ञ, ब्रोकर, कंपनी प्रतिनिधि या वित्तीय सलाहकार के रूप में पेश कर सकते हैं। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और नकली निवेश प्लेटफॉर्म इस प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
तीसरा चरण — पैसा लगवाना:
पीड़ित से बैंक ट्रांसफर, UPI या दूसरे भुगतान माध्यमों से रकम भेजने को कहा जाता है।
चौथा चरण — नकली मुनाफा:
कई मामलों में फर्जी ऐप या वेबसाइट पर निवेश के बदले बढ़ता हुआ ‘Profit’ दिखाया जाता है। इससे पीड़ित को लगता है कि उसका निवेश सही दिशा में जा रहा है।
पांचवां चरण — Withdrawal Trap:
जब निवेशक पैसा निकालना चाहता है तो उससे टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य शुल्क के नाम पर और पैसे मांगे जा सकते हैं।
यहीं से ठगी का असली चेहरा सामने आता है।
यह मामला अकेला नहीं है
फर्जी IPO और ऑनलाइन स्टॉक निवेश के नाम पर होने वाली ठगी लगातार बदलते तरीके से सामने आ रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश STF ने एक कथित Pan-India Fake IPO/Stock Trading Fraud Syndicate के एक आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में ऐसे हजारों शिकायतों का लिंक सामने आने की बात कही गई और एक रिपोर्ट में इस नेटवर्क से जुड़े 3,087 complaints का उल्लेख है।
एक अन्य मामले में मध्य प्रदेश के एक रिटायर्ड GAIL कर्मचारी को कथित तौर पर फर्जी IPO में निवेश के नाम पर ₹28 लाख से अधिक का नुकसान हुआ। पुलिस के मुताबिक, ऑनलाइन अकाउंट में उसे भारी मुनाफा दिखाई दिया, लेकिन रकम निकालने के समय उससे अतिरिक्त शुल्क मांगा गया।
इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—फर्जी ऐप या वेबसाइट पर दिखाई दे रहा Profit वास्तविक पैसा नहीं होता।
असली IPO और फर्जी IPO में बड़ा अंतर
SEBI के अनुसार IPO में निवेश की निर्धारित प्रक्रिया होती है। UPI के जरिए IPO आवेदन में पैसा सीधे किसी अनजान व्यक्ति के बैंक खाते में भेजने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि block की जाती है। शेयर आवंटित होने पर आवश्यक रकम डेबिट होती है और अतिरिक्त राशि unblock हो जाती है।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति कहे—
- “मेरे निजी अकाउंट में पैसा भेजिए”
- “इस WhatsApp नंबर से IPO apply करें”
- “इस APK/app को डाउनलोड करें”
- “गारंटीड IPO allotment मिलेगा”
- “Profit निकालने के लिए पहले tax जमा करें”
- “जल्दी पैसा लगाइए, मौका खत्म हो जाएगा”
तो यह बड़ा Red Flag हो सकता है।
₹1.54 करोड़ का मामला क्या सिखाता है?
इस घटना की सबसे बड़ी सीख सिर्फ यह नहीं है कि ऑनलाइन निवेश में सावधानी बरतनी चाहिए। असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम भेजने से पहले निवेशक ने सामने वाले की पहचान और निवेश प्रक्रिया को कैसे verify किया?
SEBI निवेशकों को केवल registered intermediaries के साथ व्यवहार करने और उनकी registration status जांचने की सलाह देता है। SEBI यह भी चेतावनी देता है कि असामान्य या guaranteed returns का दावा करने वाली योजनाओं से सावधान रहना चाहिए।
SEBI ने UPI और बैंक विवरण की verification सुविधा भी उपलब्ध कराई है, जिससे निवेशक भुगतान से पहले संबंधित विवरण की जांच कर सकते हैं।
निवेश करने से पहले ये 7 सवाल जरूर पूछें
1. IPO सच में मौजूद है या नहीं?
कंपनी और उसके IPO से जुड़ी जानकारी आधिकारिक स्रोतों पर जांचें।
2. पैसा किसके खाते में जा रहा है?
किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते में निवेश राशि भेजना गंभीर चेतावनी हो सकती है।
3. Broker/Intermediary SEBI registered है?
सिर्फ नाम और लोगो देखकर भरोसा न करें।
4. क्या Guaranteed Return दिया जा रहा है?
शेयर बाजार में guaranteed profit का दावा अपने आप में बड़ा red flag है।
5. क्या WhatsApp/Telegram पर निवेश कराया जा रहा है?
ग्रुप में दिख रहे profit screenshots या दूसरे ‘investors’ की सफलता को प्रमाण न मानें।
6. क्या पैसा निकालने के लिए फिर पैसा मांगा जा रहा है?
Tax, processing fee या security deposit के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगना ठगी का संकेत हो सकता है।
7. क्या ऐप/वेबसाइट आधिकारिक है?
सिर्फ इसलिए कि ऐप असली broker जैसा दिखाई देता है, वह असली नहीं हो जाता।
सबसे महत्वपूर्ण बात
IPO में पैसा लगाना और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर IPO के नाम पर पैसा ट्रांसफर करना—दो अलग बातें हैं।
मोरबी के इस मामले में कथित तौर पर ₹1.54 करोड़ का नुकसान इस बात की गंभीर चेतावनी है कि साइबर ठग अब केवल बैंक OTP या KYC के नाम पर ही नहीं, बल्कि Investment + IPO + High Return जैसे भरोसेमंद दिखने वाले वित्तीय शब्दों का इस्तेमाल करके भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
आज के डिजिटल दौर में सबसे सुरक्षित निवेश मंत्र है:
“Profit देखकर नहीं, Process Verify करके निवेश करें।”
