घर आया आपका नाम वाला पार्सल, लेकिन आपने ऑर्डर नहीं किया? एक गलती और पैसा सीधे ठगों की जेब में जा सकता है।
घर पर आया ऐसा पार्सल जिसे आपने ऑर्डर ही नहीं किया? COD देने से पहले रुकिए, यह नया ठगी का जाल हो सकता है…..
कल्पना कीजिए कि शाम के समय आपके घर का दरवाजा बजता है। सामने डिलीवरी एजेंट खड़ा है और हाथ में आपका नाम, मोबाइल नंबर और पूरा पता लिखा हुआ एक पार्सल है। वह कहता है—“आपका Cash on Delivery यानी COD ऑर्डर है, ₹500-600 दीजिए और पार्सल ले जाइए।”
आपको ऑर्डर याद नहीं है। लेकिन मन में आता है कि शायद घर के किसी दूसरे सदस्य ने मंगाया होगा।
यही कन्फ्यूजन इस नए तरह के पार्सल फ्रॉड की सबसे बड़ी ताकत है।
हाल ही में लेखिका किरण मनराल ने सोशल मीडिया पर ऐसा ही अनुभव साझा किया। उनके घर एक COD पार्सल पहुंचा, जिस पर उनका सही नाम, पता और फोन नंबर था। उनके बेटे ने भुगतान कर दिया, लेकिन पार्सल खोलने पर अंदर एक फटा हुआ इस्तेमाल किया हुआ कुर्ता मिला। परिवार ने ऐसा कोई सामान ऑर्डर नहीं किया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसी तरह के अनुभव साझा किए।
आखिर यह ठगी काम कैसे करती है?
इस तरह के मामलों में ठग किसी व्यक्ति के नाम और पते जैसी जानकारी का इस्तेमाल करके ऐसा पार्सल भेज सकते हैं, जिसे देखकर सामने वाले को लगे कि यह किसी परिवार के सदस्य का ऑर्डर है।
पार्सल की कीमत आमतौर पर इतनी रखी जा सकती है कि व्यक्ति ज्यादा जांच-पड़ताल न करे। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति ₹400-700 का COD पार्सल देखकर सोचता है कि शायद घर में किसी ने कुछ मंगाया है, तो वह बिना ज्यादा सवाल किए भुगतान कर सकता है।
पैसे देने के बाद जब पैकेट खुलता है तो अंदर बेकार, बेहद सस्ता या ऑर्डर से बिल्कुल अलग सामान निकल सकता है।
यानी ठगी का असली हथियार महंगा सामान नहीं, बल्कि इंसान की जल्दबाजी और भरोसा है।
फरवरी 2026 में Moneycontrol ने भी COD scams के इसी पैटर्न की जानकारी दी थी—बिना ऑर्डर किए गए पार्सल भेजना और प्राप्तकर्ता से भुगतान करवाना। रिपोर्ट में बताया गया कि ऐसे पैकेटों में बेकार सामान तक भेजा जा सकता है।
सबसे खतरनाक बात: आपका नाम और पता सही कैसे?
यहीं मामला सिर्फ कुछ सौ रुपये की ठगी से आगे बढ़ जाता है।
अगर किसी अनजान पार्सल पर आपका सही नाम, मोबाइल नंबर और पता मौजूद है, तो स्वाभाविक सवाल उठता है कि यह जानकारी ठगों तक पहुंची कहां से?
इसके कई संभावित रास्ते हो सकते हैं—ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी जानकारी, पुराने डेटाबेस, डेटा लीक, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी या दूसरे अनधिकृत स्रोत।
लेकिन किसी एक मामले में यह कहना कि डेटा निश्चित रूप से किसी खास कंपनी से लीक हुआ है, बिना जांच के सही नहीं होगा।
यही वजह है कि ऐसे मामलों में सिर्फ डिलीवरी एजेंट पर शक करने के बजाय पूरे डेटा और ऑर्डर सिस्टम को लेकर सावधानी जरूरी है।
एक और बड़ा खतरा—COD से जुड़ा फर्जी कॉल
COD scam सिर्फ दरवाजे पर आए पार्सल तक सीमित नहीं है।
साइबर अपराधी कभी-कभी खुद को कूरियर या ई-कॉमर्स कंपनी का कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। वे कह सकते हैं कि आपका पार्सल अटक गया है, डिलीवरी के लिए कुछ पैसे देने होंगे या रिफंड पाने के लिए लिंक खोलना होगा।
मई 2026 में कोलकाता पुलिस ने एक ऐसे साइबरक्राइम नेटवर्क पर कार्रवाई की थी, जो COD और कूरियर से जुड़े बहाने बनाकर लोगों को ठग रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को कूरियर या ई-कॉमर्स प्रतिनिधि बताकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते थे।
इसलिए COD parcel scam और fake courier call को अलग-अलग घटनाएं समझना हमेशा सही नहीं है। दोनों में लोगों के डिलीवरी सिस्टम पर भरोसे का फायदा उठाया जा सकता है।
अब सबसे जरूरी सवाल—अगर ऐसा पार्सल आपके घर आए तो क्या करें?
सबसे पहला नियम बेहद आसान है:
जिस सामान का ऑर्डर आपने या आपके परिवार में किसी ने नहीं किया है, उसका भुगतान मत कीजिए।
इसके बाद ये कदम उठाएं:
1. घर के सभी लोगों से पूछें
मां, पिता, भाई, बहन, बच्चे या दूसरे परिवार के सदस्य से पूछ लें कि कहीं उन्होंने सामान तो नहीं मंगाया।
2. Shopping App की Order History चेक करें
Amazon, Flipkart, Meesho या जिस प्लेटफॉर्म से आप खरीदारी करते हैं, वहां जाकर ऑर्डर हिस्ट्री देखें।
3. पार्सल का Sender जरूर देखें
सिर्फ अपना नाम और पता देखकर यह मत मानिए कि पार्सल असली है।
4. डिलीवरी एजेंट के दबाव में न आएं
“अभी पैसे दीजिए”, “वरना ऑर्डर कैंसिल नहीं होगा” या “जल्दी कीजिए” जैसी बातों से प्रभावित न हों।
5. Unknown QR Code या Link से बचें
अगर कोई व्यक्ति कहता है कि COD कैंसिल करने या रिफंड लेने के लिए QR स्कैन करें या लिंक खोलें, तो ऐसा न करें।
6. OTP बिल्कुल साझा न करें
किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंकिंग, UPI या डिलीवरी से संबंधित OTP न बताएं।
अगर पैसे दे दिए तो?
घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें।
पार्सल, पैकेजिंग, भुगतान की रसीद, ट्रैकिंग नंबर, SMS, WhatsApp चैट और संबंधित फोन नंबर सुरक्षित रखें।
अगर आपको लगता है कि यह साइबर फ्रॉड है और पैसे का डिजिटल भुगतान हुआ है, तो भारत में 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत की जा सकती है। ऑनलाइन शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है। सरकारी साइबर पोर्टल संदिग्ध मोबाइल नंबर, ई-मेल, बैंक अकाउंट, URL आदि की जानकारी रिपोर्ट करने की सुविधा भी देता है।
असली सीख सिर्फ ₹500-600 की नहीं है
COD scam को छोटा फ्रॉड समझना गलती होगी।
आज ठगी करने वाले हर बार बैंक अकाउंट खाली करने या OTP चुराने की कोशिश नहीं करते। कई बार वे सिर्फ इतना करते हैं कि आपको भरोसा हो जाए कि सामने वाला वैध डिलीवरी एजेंट है।
सही नाम, सही पता, सही मोबाइल नंबर और हाथ में असली कूरियर कंपनी जैसा पैकेट—ये चार चीजें मिलकर किसी व्यक्ति को कुछ सेकंड के लिए भ्रमित करने के लिए काफी हो सकती हैं।
इसलिए अगली बार दरवाजे पर कोई अनजान COD पार्सल आए तो सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि “पार्सल किसका है?”
सवाल यह होना चाहिए—
“क्या मैंने इसे ऑर्डर किया है?”
अगर जवाब नहीं है, तो सबसे सुरक्षित फैसला है—पैसे मत दीजिए और पार्सल स्वीकार करने से पहले पूरी तरह सत्यापन कीजिए।
