लखनऊ पुलिस का “ऑपरेशन डिजिटल कवच”: डिजिटल अरेस्ट ठगी के खिलाफ पूरा चक्र तोड़ने की तैयारी!!!!
लखनऊ पुलिस का “ऑपरेशन डिजिटल कवच”: डिजिटल अरेस्ट ठगी के खिलाफ पूरा चक्र तोड़ने की तैयारी…….
“डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर हो रही ठगी रोकने के लिए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ शुरू किया है, जिसमें तकनीकी जाँच, बैंक लेन-देन की निगरानी, ठगी की रकम को तुरंत रोकना, पीड़ितों को पैसा लौटाना, आरोपियों की गिरफ्तारी और जागरूकता, सब एक साथ शामिल हैं।
अब तक के आँकड़े
| क्या हुआ | रकम |
|---|---|
| साइबर सेल ने होल्ड/लियन पर रखी रकम (1 से 20 अगस्त) | ₹2,40,56,807 |
| समन्वित कार्रवाई से पीड़ितों को लौटाई गई रकम | ₹16,97,462.72 |
| साइबर पुलिस स्टेशन की मदद से अलग-अलग मामलों में लौटी रकम | लगभग ₹24 लाख |
ये आँकड़े पुलिस के हवाले से हैं और बताते हैं कि शिकायत के तुरंत बाद कार्रवाई कितनी अहम है।
डिजिटल अरेस्ट ठगी कैसे होती है?
ठग खुद को पुलिस अधिकारी, CBI, ED, TRAI या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अफसर बताते हैं। वे गिरफ्तारी, फर्जी केस या मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच का डर दिखाते हैं। पीड़ित को लंबे समय तक वीडियो कॉल पर बैठाए रखा जाता है और फिर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। पूरा खेल डर और जल्दबाज़ी पर टिका होता है, ताकि आदमी सोच न सके।
सबसे बड़ा सच: “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है
पुलिस साफ कह चुकी है कि ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया है ही नहीं। कोई पुलिस अधिकारी या जाँच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती, और कोई असली एजेंसी केस बंद करने या गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे नहीं माँगती।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पूर्व IPS अधिकारी और साइबर अपराध विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक इस ठगी का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, मानसिक दबाव है। उनकी सलाह है कि संदिग्ध कॉल काट दें, उस एजेंसी से अलग से पुष्टि करें और तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
1930 पर तुरंत कॉल क्यों ज़रूरी है?
जाँचकर्ताओं के अनुसार शुरुआती कुछ मिनट और घंटे पैसा वापस पाने के लिए सबसे अहम होते हैं। देर होने पर ठग रकम कई बैंक खातों में घुमा देते हैं और उसे ढूँढना व फ्रीज़ करना कठिन हो जाता है।
बुजुर्गों पर खास ध्यान
अभियान में सीनियर सिटीजन की सुरक्षा पर ज़ोर है। पुलिस ने परिवारों से कहा है कि बुजुर्गों को संदिग्ध वीडियो कॉल, धमकी भरे फोन और तुरंत पैसे माँगने वाले संदेशों के बारे में समझाएँ।
नाना पाटेकर की फिल्म और संदेश
लखनऊ पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस की बनाई जागरूकता फिल्म का प्रचार भी कर रही है, जिसमें नाना पाटेकर हैं। संदेश है: “एक वीडियो देखें, एक परिवार को जागरूक करें।” इस फिल्म की प्रेरणा कानपुर की एक असली घटना है, जिसमें एक सजग नागरिक ने ठगों की चाल पहचानकर उन्हीं से पैसे भरवा लिए।
विश्लेषण: इस खबर में क्या खास है?
- पूरी “चेन” पर वार: आम तौर पर पुलिस ठगी के बाद सिर्फ केस दर्ज करती है। यहाँ शिकायत, जाँच, रकम रोकना, पैसा वापसी, गिरफ्तारी और जागरूकता को एक साथ जोड़ा गया है।
- होल्ड और वापसी में फर्क: ₹2.40 करोड़ रोके गए, पर ₹16.97 लाख ही लौटे, यानी लगभग 7%। यह सीधी तुलना नहीं है, क्योंकि रोकी गई रकम की वापसी में समय लगता है। लेकिन यह दिखाता है कि जल्दी शिकायत करना कितना ज़रूरी है।
- नाम की उलझन न हो: Google का DigiKavach एक अलग कार्यक्रम है। यह ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी पहचानने वाला प्रोग्राम है, जो गृह मंत्रालय और 1930 हेल्पलाइन के साथ काम करता है। लखनऊ पुलिस का “ऑपरेशन डिजिटल कवच” पुलिस का अपना अभियान है। अपने वीडियो में यह फर्क ज़रूर बताएँ।
- UP पुलिस की बड़ी रणनीति: UP पुलिस पहले से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कॉलेज छात्रों को “डिजिटल वॉरियर्स” बनाकर जागरूकता फैला रही है। यह अभियान उसी कड़ी का हिस्सा लगता है।
खास शब्द आसान भाषा में
- डिजिटल अरेस्ट: ठगों का गढ़ा हुआ शब्द। कानून में इसका कोई अस्तित्व नहीं।
- लियन (Lien): बैंक खाते की रकम पर रोक, ताकि ठग उसे निकाल न सकें।
- मनी ट्रेल: पैसा किन-किन खातों से होकर गुज़रा, इसका पूरा रास्ता।
- 1930: राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन।
अगर ऐसा कॉल आए तो ये करें
- घबराएँ नहीं और कॉल काट दें।
- किसी को एक रुपया भी ट्रांसफर न करें।
- घरवालों या पड़ोसी को बताएँ।
- तुरंत 1930 पर कॉल करें।
- cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करें।
