त्योहारी ऑनलाइन खरीदारी: सस्ते ऑफर के पीछे छिपा साइबर जाल!!!
त्योहारी ऑनलाइन खरीदारी: सस्ते ऑफर के पीछे छिपा साइबर जाल…..
मुख्य बात
त्योहार शुरू होते ही ई-कॉमर्स साइटों पर भारी छूट और सेल की भरमार हो जाती है, लेकिन सस्ते सौदे की तलाश में की गई एक छोटी-सी चूक महंगी पड़ सकती है। ठग इसी भीड़ का फायदा उठाते हैं।
ठग किन तरीकों से जाल बिछा रहे हैं?
1. नकली वेबसाइट और फर्जी विज्ञापन (फिशिंग)
फिशिंग का मतलब है असली जैसी दिखने वाली नकली साइट या लिंक बनाकर लोगों को फंसाना। ठग मशहूर शॉपिंग साइटों जैसी दिखने वाली वेबसाइटें बनाते हैं और फेसबुक-इंस्टाग्राम पर लुभावने विज्ञापन चलाते हैं। ग्राहक पैसे दे देता है, पर सामान नहीं आता, और कई बार उसकी निजी जानकारी भी चोरी हो जाती है।
रिपोर्ट में बताए गए कुछ उदाहरण:
- “साइबर अलर्ट” की जांच में फ्लिपकार्ट जैसी दिखने वाली एक नकली साइट मिली।
- मीशो का लोगो इस्तेमाल करने वाले विज्ञापनों में तीन सूट ₹149 में और तीन कुर्ती सेट ₹199 में बेचने का दावा किया गया। शिकायत करने वालों का पैसा मीशो के खाते में नहीं, बल्कि दूसरे नामों या किराना दुकानों के खातों में गया।
- त्योहार पर सूखे मेवे और पटाखों की मांग का फायदा उठाया जा रहा है। एक विज्ञापन में 4 किलो ड्राई फ्रूट सिर्फ ₹239 में बताया गया। मेटा की एड लाइब्रेरी में ऐसे करीब 240 ठगी वाले विज्ञापन दर्ज होने की बात कही गई है।
2. गूगल सर्च और होटल बुकिंग
सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, गूगल सर्च में भी नकली साइट या नकली कस्टमर केयर नंबर ऊपर आ सकते हैं। पुरी के होटल सोनार बांग्ला जैसे नाम वाले संदिग्ध वेबपेज बनाए गए, जहां एडवांस देने के बाद पता चला कि बुकिंग हुई ही नहीं। इसलिए होटल, धर्मशाला या टिकट के लिए नंबर और लिंक हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही लें। ट्रेन टिकट के लिए IRCTC की वेबसाइट या ऐप ही इस्तेमाल करें।
आंकड़ों में तस्वीर
| जानकारी | आंकड़ा |
|---|---|
| 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कुल शिकायतें | 17,71,622 |
| इनमें से ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतें | 5,11,196 |
| हिस्सेदारी | लगभग 29% |
सरल भाषा में कहें तो हर 10 शिकायतों में से लगभग 3 ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी थीं।
विश्लेषण: नए नियम कब से लागू होंगे?
यह बात अक्सर छूट जाती है। उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 बन चुके हैं, लेकिन अभी लागू नहीं हुए हैं।
- ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
- उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इन्हें 9 सितंबर 2026 को अधिसूचित किया था।
यानी इस दिवाली की खरीदारी इन नए नियमों के दायरे में नहीं आएगी। इसलिए इस बार सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी हद तक आपकी अपनी सावधानी पर है।
नियमों की खास बातें:
- प्रायर प्राइस (Prior Price): जब भी कोई प्लेटफॉर्म छूट बताएगा, उसे घटा हुआ दाम और “प्रायर प्राइस” दोनों दिखाने होंगे। प्रायर प्राइस का मतलब है छूट घोषित होने से पहले के 30 दिनों में उस सामान का सबसे कम दाम। इससे “पहले दाम बढ़ाओ, फिर छूट दिखाओ” वाली चाल पर लगाम लगेगी।
- डार्क पैटर्न (Dark Patterns): ये वेबसाइट के ऐसे डिजाइन हैं जो आपको चालाकी से गलत फैसले की तरफ धकेलते हैं, जैसे झूठा “सिर्फ 2 बचे हैं” संदेश या छिपे हुए शुल्क। प्लेटफॉर्म को डार्क पैटर्न रोकने के 2023 के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा, हर साल खुद का ऑडिट करना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र दिखाना होगा।
- शिकायत निपटारा: शिकायत की रसीद (Receipt) या प्राप्ति-स्वीकृति (Acknowledgement) 48 घंटे में देनी होगी और एक महीने में निपटारा करना होगा। हर ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से जुड़ना होगा और शिकायतकर्ता को ग्रीवांस अधिकारी द्वारा दर्ज शिकायत की कॉपी देनी होगी।
- डेटा की सुरक्षा: मार्केटप्लेस कंपनियां आपकी स्पष्ट सहमति के बिना आपकी जानकारी का तय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी।
ध्यान रखें: ये नियम असली प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करते हैं। नकली वेबसाइट बनाने वाले ठग किसी नियम को नहीं मानते, इसलिए नियम आपकी सतर्कता का विकल्प नहीं हैं।
सुरक्षित खरीदारी के 7 आसान कदम
- ऑफर पर क्लिक करने से पहले वेबसाइट का पता (URL) ध्यान से पढ़ें। एक अक्षर का फर्क भी नकली साइट की निशानी हो सकता है।
- सिर्फ आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से खरीदें।
- सोशल मीडिया विज्ञापन के लिंक से सीधे भुगतान न करें।
- WhatsApp पर आई अनजान लिंक या APK फाइल से कोई ऐप डाउनलोड न करें।
- विक्रेता की जानकारी, रिटर्न पॉलिसी, कस्टमर सपोर्ट और असली समीक्षाएं देखें।
- बैंक और क्रेडिट कार्ड के लेन-देन पर नजर रखें।
- बहुत ही सस्ता दाम (₹149 में तीन सूट जैसा) दिखे तो रुकें और सोचें।
आज AI की मदद से नकली वेबसाइट और डीपफेक बनाना आसान हो गया है, इसलिए सतर्कता और जरूरी है। सूत्र याद रखने लायक है: “BUY NOW” दबाने से पहले “CHECK NOW” करें।
अगर ठगी हो जाए तो क्या करें?
यह जानकारी रिपोर्ट नहीं है, बहुत काम की है।
- तुरंत 1930 पर कॉल करें। यह साइबर वित्तीय ठगी की राष्ट्रीय हेल्पलाइन है, जो गृह मंत्रालय के तहत I4C चलाता है।
- शिकायत cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी दर्ज करें।
- गोल्डन आवर यानी ठगी के बाद का शुरुआती समय सबसे अहम है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी कहा कि जल्दी रिपोर्ट करने से पैसा फ्रीज या वापस होने की संभावना बढ़ती है, जबकि 3 से 15 दिन की देरी से पैसा कई खातों में घूम जाता है और वापसी मुश्किल हो जाती है।
- दिसंबर 2025 में सरकार ने राज्यसभा में बताया कि सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम से 23 लाख से ज्यादा शिकायतों में ₹7,000 करोड़ से अधिक बचाए जा चुके हैं। यानी समय पर रिपोर्ट करने से फर्क पड़ता है।
