फर्जी GST फर्मों का खेल: दूसरे के PAN कार्ड पर करोड़ों का कारोबार, जयपुर से आरोपी गिरफ्तार!!!
फर्जी GST फर्मों का खेल: दूसरे नपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) GSTके PAN कार्ड पर करोड़ों का कारोबार, जयपुर से आरोपी गिरफ्तार……
समाचार पुनर्लेखन | 21 अक्टूबर 2026 | उत्तर प्रदेश, मेरठ और पीलीभीत
उत्तर प्रदेश में फर्जी GST फर्मों और नकली ई-वे बिल के जरिए टैक्स में हेराफेरी करने के आरोप में यूपी एसटीएफ ने जयपुर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मामले में दूसरे व्यक्ति के PAN कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके फर्जी कंपनियां बनाई गईं। इन कंपनियों के नाम पर कारोबार दिखाया गया और कथित तौर पर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने का रास्ता तैयार किया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग करके उसके नाम पर ऐसा कारोबार दिखाया जा सकता है, जिसकी उसे जानकारी तक नहीं होती। इसका असर केवल सरकारी राजस्व पर ही नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की आर्थिक और कानूनी स्थिति पर भी पड़ सकता है, जिसके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया हो।
1. कैसे सामने आया पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के व्यापारी मोहम्मद फरमान की शिकायत से सामने आया। 3 जनवरी 2023 को उन्हें आयकर विभाग से नोटिस मिला। नोटिस में उनके PAN नंबर से जुड़े बड़े कारोबारी लेनदेन का विवरण सामने आया, जबकि व्यापारी के अनुसार, इस कारोबार से उनका कोई संबंध नहीं था।
जांच में कथित तौर पर पता चला कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दिल्ली में ‘रायन इंटरनेशनल’ और ‘फुटनेक्स्ट इंटरनेशनल’ नाम से GST फर्में पंजीकृत की गई थीं। इन फर्मों के जरिए हुए लेनदेन का विवरण उनके कर-संबंधी रिकॉर्ड में भी दिखाई दे रहा था। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों और पुलिस से शिकायत की।
मामले की शुरुआती जांच में पर्याप्त प्रगति नहीं होने पर जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी गई।
2. फर्जी बिल और बैंक खातों से कैसे चलता था कथित घोटाला?
एसटीएफ की जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी अंकुर कांडा अपने सहयोगियों के साथ बिटुमिन के कारोबार से जुड़ा था। बिटुमिन का इस्तेमाल सड़क निर्माण सहित कई कामों में किया जाता है।
जांच में आरोप सामने आया कि फर्जी कंपनियों और बिलों के जरिए ऐसे कारोबारी लेनदेन दिखाए जाते थे, जिनके आधार पर गलत तरीके से टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सके।
इस मामले में कथित तौर पर निम्न तरीके अपनाए गए:
- फर्जी GST फर्में: दूसरे व्यक्ति के PAN और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कंपनियां बनाई गईं।
- फर्जी ई-वे बिल: सामान की आवाजाही से जुड़े दस्तावेजों का उपयोग कथित तौर पर लेनदेन को वास्तविक दिखाने के लिए किया गया।
- बैंक खातों का इस्तेमाल: रिपोर्टों के मुताबिक, फर्मों के नाम पर IDBI बैंक और यस बैंक समेत अन्य बैंकों में खाते खोले गए।
- कमीशन का आरोप: जांच के अनुसार, फर्जी बिलों के आधार पर रकम ट्रांसफर की जाती थी और कथित तौर पर कमीशन काटकर पैसे दूसरे खातों या हवाला के माध्यम से वापस किए जाते थे।
इन आरोपों की पूरी पुष्टि और वित्तीय लेनदेन की वास्तविक सीमा का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
3. ITC क्या है और इससे सरकार को नुकसान कैसे हो सकता है?
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) GST व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामान्य तौर पर, पात्र कारोबारी अपने व्यावसायिक सामान या सेवाओं की खरीद पर चुकाए गए GST का क्रेडिट, कानूनी शर्तें पूरी होने पर, अपनी बिक्री पर देय GST के मुकाबले ले सकते हैं।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी व्यापारी ने खरीद पर ₹10,000 GST चुकाया और बिक्री पर ₹15,000 GST देय है। अन्य सभी शर्तें पूरी होने पर वह ₹10,000 का पात्र क्रेडिट इस्तेमाल कर सकता है और बाकी ₹5,000 जमा कर सकता है।
लेकिन यदि खरीद वास्तव में हुई ही नहीं और केवल कागजों पर फर्जी बिल तैयार करके ITC का दावा किया जाए, तो सरकार को मिलने वाले टैक्स में नुकसान हो सकता है।
यही इस तरह के कथित GST घोटालों का मुख्य तरीका है: वास्तविक सामान की खरीद-बिक्री के बिना कागजी लेनदेन दिखाकर अनुचित टैक्स लाभ हासिल करना।
4. यह केवल एक मामला नहीं: सरकारी रिकॉर्ड क्या बताते हैं?
सरकार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति से पता चलता है कि फर्जी ITC का दुरुपयोग बड़े स्तर पर भी सामने आ चुका है।
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, मार्च 2024 में मेरठ CGST कमिश्नरेट ने 232 कथित फर्जी कंपनियों से जुड़े एक नेटवर्क की जांच का विवरण जारी किया था। उस मामले में लगभग ₹1,048 करोड़ के अनुचित ITC और करीब ₹5,842 करोड़ के कथित माल-आपूर्ति मूल्य का पता चला था। उस जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
यह आंकड़ा वर्तमान जयपुर गिरफ्तारी वाले मामले का नहीं है। यह एक अलग मामले का आधिकारिक विवरण है, जो बताता है कि फर्जी कंपनियों और बिलिंग के जरिए GST व्यवस्था का दुरुपयोग कितने बड़े स्तर पर हो सकता है।
इसी तरह, फरवरी 2024 में PIB ने बताया था कि वित्त वर्ष 2023–24 में दिसंबर 2023 तक, देशभर में 1,700 फर्जी ITC मामलों का पता चला था, जिनमें लगभग ₹18,000 करोड़ की राशि शामिल थी। उस अवधि में 98 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी दी गई थी।
इन आंकड़ों को वर्तमान मामले की रकम या नुकसान के साथ जोड़ना सही नहीं होगा, लेकिन वे इस तरह के अपराधों के व्यापक जोखिम को समझने में मदद करते हैं।
5. जयपुर से गिरफ्तारी के बाद अब क्या होगा?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एसटीएफ मेरठ की टीम ने राजस्थान पुलिस की मदद से जयपुर में कार्रवाई कर अंकुर कांडा को गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पीलीभीत लाया गया, ताकि संबंधित मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
जांच एजेंसियां अब कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही हैं।
अभी इन बातों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है:
- कथित फर्जी कारोबार की कुल राशि कितनी थी?
- सरकार को वास्तविक राजस्व नुकसान कितना हुआ?
- फर्जी बिलों से ITC का लाभ किन कारोबारियों ने लिया?
- इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल थे?
- जिनके PAN कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, उनमें और कितने लोग प्रभावित हुए?
इन सवालों के जवाब जांच की प्रगति और आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होंगे।
6. आम लोगों और व्यापारियों के लिए जरूरी सबक
यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी देता है कि PAN कार्ड, आधार और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग केवल पहचान की चोरी तक सीमित नहीं रहता; इससे किसी व्यक्ति के नाम पर संदिग्ध वित्तीय और कर-संबंधी रिकॉर्ड भी बन सकते हैं।
बचाव के लिए कुछ जरूरी कदम:
- PAN और आधार की कॉपी बिना जरूरत साझा न करें। जहां दस्तावेज देना जरूरी हो, वहां उद्देश्य और प्राप्तकर्ता की पहचान जांचें।
- नौकरी या कमीशन के लालच में KYC दस्तावेज न दें। किसी अनजान व्यक्ति को अपनी पहचान पर फर्म, GST पंजीकरण या बैंक खाता खुलवाने की अनुमति न दें
- आयकर और GST रिकॉर्ड समय-समय पर जांचें। अनजान कारोबार या संदिग्ध लेनदेन दिखने पर संबंधित विभाग से संपर्क करें।
- नोटिस को नजरअंदाज न करें। आयकर विभाग या GST विभाग से संदिग्ध सूचना मिले, तो उसकी प्रामाणिकता आधिकारिक माध्यम से जांचकर समय पर जवाब दें।
- शिकायत और सबूत सुरक्षित रखें। संदिग्ध दस्तावेज, नोटिस, ईमेल और बैंक रिकॉर्ड संभालकर रखें तथा जरूरत पड़ने पर कर विशेषज्ञ या वकील की मदद लें।
निष्कर्ष
जयपुर से अंकुर कांडा की गिरफ्तारी उस कथित नेटवर्क की जांच में एक अहम कदम है, जिसमें दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों, फर्जी GST कंपनियों और ई-वे बिल के जरिए टैक्स व्यवस्था का दुरुपयोग किए जाने का आरोप है।
इस मामले की सबसे बड़ी सीख यह है कि फर्जी कारोबार का जोखिम केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं है—किसी निर्दोष व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल होने पर उसे भी आयकर नोटिस और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
