Instagram पर नौकरी नहीं, साइबर गैंग का खतरनाक जाल चल रहा था।
Instagram पर ‘बैंक अकाउंट किट फैक्ट्री’ का भंडाफोड़: सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाकर चल रहा था करोड़ों का साइबर खेल….
दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो Instagram के जरिए युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खाते खरीदता था। इसके बाद इन्हीं खातों का इस्तेमाल पूरे देश में होने वाली ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था। पुलिस ने इस नेटवर्क को “बैंक अकाउंट किट फैक्ट्री” का नाम दिया है क्योंकि गिरोह सिर्फ बैंक खाते ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की पूरी एक्सेस अपराधियों को उपलब्ध कराता था।
आखिर क्या है “बैंक अकाउंट किट”?
साइबर अपराध की दुनिया में “बैंक अकाउंट किट” का मतलब होता है—
- बैंक पासबुक
- ATM/Debit कार्ड
- चेकबुक
- मोबाइल नंबर (SIM)
- इंटरनेट बैंकिंग ID और पासवर्ड
- UPI एक्सेस
यानी किसी व्यक्ति के बैंक खाते को पूरी तरह अपराधियों के हवाले कर दिया जाता है।
कैसे चलता था पूरा खेल?
जांच के अनुसार गिरोह Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन डालता था।
इन विज्ञापनों में लिखा जाता था—
- घर बैठे कमाई
- बैंक अकाउंट किराये पर दें
- प्रति माह ₹20,000 से ₹50,000 तक कमाएं
- बिना मेहनत पैसा कमाएं
लालच में आकर कई लोग अपने बैंक खाते और दस्तावेज गिरोह को सौंप देते थे।
इसके बाद—
- खाते में ठगी का पैसा आता।
- पैसा तुरंत दूसरे खातों में भेज दिया जाता।
- अंत में नकदी निकालकर या क्रिप्टो सहित अन्य माध्यमों से आगे ट्रांसफर कर दी जाती।
- पुलिस जांच में सबसे पहले उसी व्यक्ति का बैंक खाता सामने आता जिसने अपना अकाउंट किराये पर दिया था।
यानी थोड़े से पैसों के लालच में कई लोग खुद भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं।
पुलिस को क्या मिला?
जांच में पुलिस को ऐसे कई बैंक खाते मिले जिनका इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी के लिए किया गया था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं बल्कि संगठित “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क था, जो देशभर के साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध करा रहा था। इस तरह के नेटवर्क डिजिटल फ्रॉड की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं।
“म्यूल अकाउंट” क्या होता है?
Cyber Security की भाषा में ऐसे बैंक खाते, जिनका उपयोग अपराधियों के पैसे छिपाने और घुमाने के लिए किया जाता है, Mule Accounts कहलाते हैं।
इन खातों के मालिक कई बार जानते हैं कि वे गलत काम कर रहे हैं, जबकि कई लोग केवल किराया कमाने के लालच में अनजाने में अपराध का हिस्सा बन जाते हैं।
यह मामला क्यों बेहद गंभीर है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार आज अधिकांश बड़े ऑनलाइन फ्रॉड—
- Digital Arrest
- Investment Scam
- Trading Scam
- Loan App Fraud
- OTP Fraud
- Courier Scam
- KYC Scam
इन सभी में चोरी का पैसा सबसे पहले ऐसे ही Mule Accounts में भेजा जाता है।
यदि ऐसे खातों की सप्लाई रुक जाए तो साइबर अपराधियों के लिए करोड़ों रुपये की ठगी करना काफी मुश्किल हो जाएगा।
लोगों को क्या समझना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति कहे—
- अपना बैंक अकाउंट किराये पर दे दो
- ATM कार्ड दे दो
- सिर्फ पैसे रिसीव करने हैं
- आपके खाते से कोई जोखिम नहीं होगा
तो यह लगभग निश्चित रूप से साइबर अपराध का हिस्सा हो सकता है।
याद रखें—
बैंक खाता, ATM कार्ड, SIM और UPI किसी को देना कानूनन गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
बचाव के आसान उपाय
- अपना बैंक अकाउंट कभी किराये पर न दें।
- ATM कार्ड, PIN और UPI PIN किसी के साथ साझा न करें।
- सोशल मीडिया पर “Easy Money” वाले विज्ञापनों से सावधान रहें।
- संदिग्ध लेन-देन दिखे तो तुरंत बैंक को सूचित करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें ताकि रकम फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सके।
विश्लेषण
यह मामला केवल Instagram फ्रॉड का नहीं है, बल्कि भारत में तेजी से फैल रहे Bank Account Mule Network का उदाहरण है। आज साइबर अपराधी खुद ठगी करने से ज्यादा ऐसे लोगों की तलाश करते हैं जो थोड़े पैसों के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध करा दें। ऐसे नेटवर्क डिजिटल फ्रॉड की रीढ़ बन चुके हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां अब केवल ठगी करने वालों को ही नहीं, बल्कि बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई तेज कर रही हैं।
