बेटिंग ऐप से कमाई का सपना दिखाकर फंसाया, गंजाम पुलिस ने दबोचा नेटवर्क; भारी संख्या में कार्ड और SIM बरामद।
गंजाम में ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का खुलासा, 3 गिरफ्तार; ₹1 करोड़ की ठगी की जांच में 78 ATM कार्ड और 86 SIM बरामद…..
ओडिशा के गंजाम जिले में साइबर पुलिस ने कथित इंटर-स्टेट ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में झारखंड और छत्तीसगढ़ से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने लोगों को ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कम समय में बड़ा रिटर्न दिलाने का लालच दिया और उनसे पैसे जमा करवाए। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से करीब ₹1 करोड़ की कथित ठगी का संदेह है। हालांकि, ठगी की वास्तविक रकम और नेटवर्क की पूरी पहुंच का पता डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद ही चलेगा।
किराये के मकान से चल रहा था कथित नेटवर्क
मामला गंजाम जिले के रंभा थाना क्षेत्र का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि दूसरे राज्यों से आए कुछ युवक किराये के मकानों में रहकर ऑनलाइन बेटिंग एप्लिकेशन के प्रचार और संचालन से जुड़ी गतिविधियां कर रहे हैं।
इसके बाद गंजाम साइबर पुलिस ने गजपति नगर और पालुरगड़ा इलाके में छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ संदिग्धों ने भागने की कोशिश की। दो लोगों को मौके से पकड़ा गया, जबकि अन्य के भाग निकलने की बात सामने आई। बाद में मोबाइल फोन से मिली जानकारी के आधार पर जगदीश सेठी उर्फ सूरज को चामाखंडी इलाके से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सत्रुघ्न कुमार पांडेय निवासी झारखंड तथा धर्मदास माणिकपुरी और जगदीश सेठी उर्फ सूरज निवासी छत्तीसगढ़ के रूप में हुई है।
78 ATM कार्ड और 86 SIM ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में डिजिटल और बैंकिंग सामग्री बरामद की। इनमें 78 ATM/डेबिट और अन्य कार्ड, 16 बैंक पासबुक, 86 SIM कार्ड, 14 स्मार्टफोन, दो लैपटॉप, एक Chromebook, एक मोटरसाइकिल और कई दस्तावेज शामिल हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में लैपटॉप की संख्या को लेकर मामूली अंतर है, लेकिन ATM कार्ड, SIM, पासबुक और मोबाइल की बरामदगी की जानकारी लगातार सामने आई है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ ATM कार्ड या SIM की संख्या नहीं है। पुलिस के मुताबिक, जब्त मोबाइल और डिजिटल उपकरणों में अलग-अलग लोगों के PAN, Aadhaar, बैंक अकाउंट और पहचान संबंधी जानकारी भी मिली है। साथ ही ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े User ID, Password और Deposit-Withdrawal Records मिलने की बात कही गई है।
यही डेटा अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये बैंक खाते और पहचान दस्तावेज केवल बेटिंग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहे थे या कथित ठगी के पैसे को प्राप्त करने, अलग-अलग खातों में भेजने और निकालने के लिए भी इस्तेमाल किए गए।
लोगों को कैसे फंसाया जाता था?
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क लोगों को ज्यादा रिटर्न का लालच देता था। यानी किसी व्यक्ति को यह विश्वास दिलाया जाता था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसा जमा करने या बेटिंग करने से उसे तेजी से बड़ा फायदा हो सकता है।
ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि शुरुआत में पीड़ित को छोटे लाभ या भरोसेमंद दिखने वाले डिजिटल इंटरफेस के जरिए विश्वास में लिया जाता है। इसके बाद उससे ज्यादा रकम जमा कराने की कोशिश की जा सकती है।
गंजाम मामले में पुलिस ने कई ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े User IDs, Passwords और Transaction Records मिलने की बात कही है। स्थानीय रिपोर्टों में Reddy Play 11, Hush 777, 100 Panel और Fairplay जैसे नाम भी जांच से जुड़े बताए गए हैं। इन प्लेटफॉर्मों के नाम जांच में सामने आना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित प्लेटफॉर्म या उसके संचालक इस मामले में दोषी हैं; पुलिस को डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर भूमिका स्थापित करनी होगी।
₹1 करोड़ की रकम अभी जांच का विषय
पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर करीब ₹1 करोड़ की ठगी का संदेह जताया है। लेकिन इसे अभी अंतिम नुकसान या सिद्ध अपराध की रकम मानना सही नहीं होगा। पुलिस डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच, बैंकिंग रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की पड़ताल कर रही है।
जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण यह होगा कि बरामद ATM कार्ड और बैंक खातों में कितना पैसा आया, पैसा कहां से आया, किन खातों में ट्रांसफर हुआ और आखिरकार कहां निकाला गया।
यही प्रक्रिया कथित Financial Trail को सामने ला सकती है।
मामला सिर्फ तीन गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं?
इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस को एक साथ इतने ATM कार्ड, SIM कार्ड, बैंक पासबुक और पहचान दस्तावेज मिले हैं। इससे जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल है कि क्या गिरफ्तार आरोपी सिर्फ नेटवर्क के स्थानीय ऑपरेटर थे या किसी बड़े अंतरराज्यीय सिस्टम की एक कड़ी।
पुलिस अब कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान, कुल लेन-देन और ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाने में जुटी है। जब्त डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया और आगे की जांच जारी है।
आम लोगों के लिए इस मामले का सबक
गंजाम का यह मामला दिखाता है कि ऑनलाइन बेटिंग का लालच केवल पैसे हारने का जोखिम नहीं है। अगर किसी अनजान एप या व्यक्ति के जरिए पैसा जमा कराया जा रहा है और बदले में असामान्य या गारंटीड रिटर्न का दावा किया जा रहा है, तो वहां वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा भी हो सकता है।
खास तौर पर किसी व्यक्ति को अपना ATM कार्ड, SIM, बैंक अकाउंट, OTP, UPI PIN, नेट बैंकिंग पासवर्ड या पहचान दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए। किसी के कहने पर अपने खाते में पैसा लेकर आगे ट्रांसफर करना भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि ऐसा खाता जांच में मनी-म्यूल अकाउंट के रूप में सामने आ सकता है।
निष्कर्ष
गंजाम साइबर पुलिस की कार्रवाई ने कथित ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के पीछे मौजूद बैंकिंग और डिजिटल ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं। तीन गिरफ्तारियां शुरुआती कार्रवाई हैं; असली तस्वीर डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैंकिंग ट्रेल और अन्य संदिग्धों की पहचान के बाद साफ होगी।
फिलहाल पुलिस करीब ₹1 करोड़ की कथित ठगी, 78 ATM/डेबिट कार्ड, 86 SIM कार्ड, 16 बैंक पासबुक और बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरणों की कड़ियों को जोड़ रही है। इसलिए इस मामले को केवल ऑनलाइन बेटिंग की कार्रवाई के बजाय डिजिटल पहचान, बैंक खातों और अंतरराज्यीय साइबर-फ्रॉड नेटवर्क की जांच के नजरिए से देखना अधिक महत्वपूर्ण है।
