व्हाट्सएप दोस्ती बनी जाल, विदेशी गिफ्ट के नाम पर लाखों की ठगी
दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 गिरफ्तार……
दिल्ली पुलिस की साइबर थाना (दक्षिण-पश्चिम जिला) टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाइजीरियाई नागरिक भी शामिल है, जो कथित तौर पर विदेशी पार्सल, डॉलर और सोना भेजने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ठगता था। पुलिस ने इस कार्रवाई में दिल्ली, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में एक साथ छापेमारी की और आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
कैसे हुई ठगी?
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता से पहले व्हाट्सएप चैट और फोन कॉल के जरिए संपर्क किया गया। ठगों ने खुद को अमेरिका में रहने वाला व्यक्ति बताकर उससे दोस्ती की। कुछ समय बाद उन्होंने दावा किया कि उसके नाम से अमेरिका से एक पार्सल भेजा गया है, जिसमें अमेरिकी डॉलर, सोना और अन्य कीमती सामान है।
इसके बाद अलग-अलग लोगों ने खुद को कस्टम अधिकारी, इमिग्रेशन अधिकारी और अन्य सरकारी एजेंसियों का कर्मचारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि पार्सल छुड़ाने के लिए “मनी डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट”, कस्टम क्लियरेंस, फ्लाइट टिकट और अन्य शुल्क जमा करना होगा। इन बहानों में फंसकर पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों और UPI आईडी में कुल 1.46 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
जांच में क्या मिला?
मामले की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा, बैंक लेन-देन और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाया।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका इस प्रकार बताई गई है:
- दिल्ली का आरोपी बैंक खातों की व्यवस्था करता था।
- तेलंगाना के दो आरोपी साइबर ठगों को “म्यूल अकाउंट” (Mule Accounts) उपलब्ध कराते थे।
- नाइजीरियाई आरोपी व्हाट्सएप कॉल और चैट के जरिए खुद को कस्टम, इमिग्रेशन या अन्य अधिकारियों के रूप में पेश कर पीड़ितों को डराता और झूठी कहानियां सुनाकर पैसे ट्रांसफर करवाता था।
- ठगी की रकम कई बैंक खातों में घुमाकर उसका स्रोत छिपाया जाता था।
विश्लेषण: यह साइबर ठगी कैसे काम करती है?
यह कोई साधारण ऑनलाइन फ्रॉड नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) आधारित संगठित साइबर अपराध है।
अपराधी पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं, फिर विदेशी पार्सल, डॉलर, गिफ्ट, सोना या विरासत मिलने जैसी कहानी बनाते हैं। इसके बाद अलग-अलग लोग सरकारी अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं ताकि पीड़ित को कहानी वास्तविक लगे।
इसी तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Foreign Parcel Scam, Advance Fee Fraud या 419 Scam कहा जाता है, जिसमें पहले छोटी रकम ली जाती है और बाद में लगातार नए शुल्क के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं।
“म्यूल बैंक अकाउंट” क्या होते हैं?
जांच में सामने आया कि आरोपी म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे थे।
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी ठगी का पैसा एक खाते से दूसरे खाते में घुमाने के लिए करते हैं ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
हाल के महीनों में देश के कई राज्यों में ऐसे नेटवर्क पकड़े गए हैं, जिनमें करोड़ों रुपये इसी तरीके से ट्रांसफर किए गए।
इस मामले से क्या सीख मिलती है?
यदि कोई व्यक्ति आपको कहे—
- विदेश से पार्सल आया है।
- डॉलर, सोना या महंगा गिफ्ट भेजा गया है।
- कस्टम क्लियरेंस फीस जमा करनी होगी।
- टैक्स, सर्टिफिकेट या रिलीज चार्ज देना होगा।
- सरकारी अधिकारी बनकर तुरंत भुगतान करने का दबाव डाले।
तो लगभग निश्चित रूप से यह साइबर ठगी हो सकती है।
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
- किसी अनजान व्यक्ति की विदेशी पार्सल वाली कहानी पर भरोसा न करें।
- कस्टम या सरकारी विभाग कभी भी व्हाट्सएप चैट के जरिए पैसे जमा करने को नहीं कहते।
- बिना आधिकारिक वेबसाइट या दस्तावेज सत्यापित किए कोई भुगतान न करें।
- किसी भी संदिग्ध UPI ID या बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
- यदि साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। शुरुआती समय में शिकायत करने से रकम फ्रीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
