29 फर्जी LIC चेक से लाखों की हेराफेरी, कोर्ट ने Sameer Joshi को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई।
फर्जी LIC चेक से ₹54.23 लाख की धोखाधड़ी, Sameer Joshi को 3 साल 6 महीने की सजा…..
लखनऊ: फर्जी चेक के जरिए पैसे निकालने और बाद में उस रकम को अलग-अलग बैंक खातों तथा कारोबारी गतिविधियों में इस्तेमाल करने के मामले में Sameer Joshi को अदालत ने दोषी ठहराया है। लखनऊ की विशेष PMLA अदालत ने 15 सितंबर 2026 को दिए फैसले में उसे 3 साल 6 महीने के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर ₹20,000 का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर उसे छह महीने की अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी।
29 फर्जी LIC चेक से निकाली गई रकम
यह मामला Life Insurance Corporation (LIC) के नाम से तैयार किए गए फर्जी चेकों की धोखाधड़ी से जुड़ा है। ED के मुताबिक, इस मामले में कुल 29 फर्जी LIC चेक तैयार किए गए और उन्हें भुनाया गया। इन चेकों की कुल रकम करीब ₹54.23 लाख थी। इस मूल मामले की जांच CBI से जुड़े अपराध के आधार पर आगे बढ़ी और इसके बाद ED ने Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ED की जांच में सामने आया कि Sameer Joshi को अपराध से हासिल रकम अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से मिली। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद इस पैसे को अलग-अलग कामों में इस्तेमाल किया गया, जिसमें व्यावसायिक गतिविधियां भी शामिल थीं।
₹14,000 को माना गया ‘Proceeds of Crime’
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ED की जांच के दौरान ₹14,000 की रकम को Sameer Joshi से संबंधित Proceeds of Crime यानी अपराध से प्राप्त आय के रूप में चिन्हित किया गया।
इस रकम के बराबर मूल्य की उसकी पैतृक संपत्ति (ancestral property) को ED ने 17 मार्च 2018 को अस्थायी रूप से अटैच किया था। बाद में PMLA Adjudicating Authority ने 6 सितंबर 2018 को इस संपत्ति की अटैचमेंट की पुष्टि कर दी।
यहां यह समझना जरूरी है कि ₹14,000 और पूरे ₹54.23 लाख एक ही चीज नहीं हैं। ₹54.23 लाख 29 फर्जी चेकों की कुल रकम है, जबकि ED ने जांच में ₹14,000 को विशेष रूप से Sameer Joshi से संबंधित अपराध की आय के तौर पर चिन्हित किया था। यह अंतर खबर को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
CBI मामले में भी हो चुकी थी सजा
इस मामले की मूल आपराधिक कार्रवाई में भी Sameer Joshi को अदालत से सजा मिल चुकी थी। 7 अगस्त 2026 को संबंधित CBI/LEA कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए 1 साल 9 महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई थी। ED के अनुसार, यह सजा बाद वाली PMLA सजा के साथ समानांतर (concurrently) चलने का आदेश दिया गया।
अब PMLA अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराध में अलग से दोषसिद्धि की है। अदालत ने PMLA की धारा 3 और धारा 4 के तहत दोषी ठहराते हुए 3 साल 6 महीने के कठोर कारावास और ₹20,000 जुर्माने का आदेश दिया।
₹14,000 से जुड़ी संपत्ति भी केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त
अदालत के फैसले का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा संपत्ति से जुड़ा है। PMLA की धारा 8(5) के तहत अदालत ने अपराध की आय के रूप में चिन्हित ₹14,000 के बराबर अटैच संपत्ति को केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त (confiscate) करने का निर्देश दिया।
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
इस मामले को केवल ‘फर्जी चेक से धोखाधड़ी’ के रूप में देखना अधूरा होगा। मामला उस चरण तक पहुंचा जहां जांच एजेंसी ने यह पता लगाने की कोशिश की कि धोखाधड़ी से हासिल पैसा कहां गया, किन बैंक खातों में पहुंचा और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
यही Money Laundering जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। PMLA के तहत केवल मूल अपराध से हासिल रकम ही नहीं, बल्कि उस रकम को अलग-अलग माध्यमों से इस्तेमाल या छिपाने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाती है।
इस मामले में अदालत की दोषसिद्धि यह भी दिखाती है कि किसी वित्तीय धोखाधड़ी में पैसा बैंकिंग सिस्टम के जरिए आगे बढ़ जाने के बावजूद जांच एजेंसियां उसके financial trail को खंगाल सकती हैं।
फिलहाल ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
मुख्य तथ्य
- आरोपी: Sameer Joshi
- मामला: फर्जी LIC चेकों की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग
- फर्जी चेक: 29
- कुल चेक राशि: करीब ₹54.23 लाख
- PMLA अदालत का फैसला: 15 सितंबर 2026
- सजा: 3 साल 6 महीने का कठोर कारावास
- जुर्माना: ₹20,000
- जुर्माना न देने पर: 6 महीने की अतिरिक्त जेल
- चिह्नित Proceeds of Crime: ₹14,000
- CBI/LEA कोर्ट की सजा: 1 साल 9 महीने
- संपत्ति: ₹14,000 के बराबर मूल्य की संपत्ति अटैच और बाद में केंद्र सरकार के पक्ष में confiscate करने का आदेश
- जांच: ED की आगे की जांच जारी
