25–30% मासिक रिटर्न का लालच, नकली वेबसाइट और बॉन्ड के जरिए महिला से ₹23 लाख की कथित ठगी!
₹23 लाख का फर्जी बॉन्ड निवेश घोटाला: पूर्व बैंक रिलेशनशिप मैनेजर गिरफ्तार, नकली वेबसाइट और दस्तावेजों से बनाया भरोसे का जाल…..
चेन्नई: ऊंचे और जल्दी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराने वाले फर्जीवाड़े का एक मामला चेन्नई में सामने आया है। वेस्ट जोन साइबर क्राइम पुलिस ने एक 39 वर्षीय पूर्व बैंक रिलेशनशिप मैनेजर पूजा जैन को एक महिला से कथित तौर पर ₹23 लाख की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित अपराध में किया गया था।
मामले में पुलिस के अनुसार, 40 वर्षीय हेमा प्रियदर्शिनी को कथित तौर पर ‘IBL Bonds’ में निवेश के नाम पर हर महीने 25 से 30 प्रतिशत तक रिटर्न देने का भरोसा दिलाया गया था। हेमा ने 2024 में कथित तौर पर ₹15 लाख और इसके बाद 2025 में ₹8 लाख और लगाए। इस तरह कुल रकम ₹23 लाख पहुंच गई। शुरुआत में उन्हें ब्याज के रूप में भुगतान मिला, जिससे निवेश योजना पर भरोसा और मजबूत हुआ। लेकिन कुछ समय बाद भुगतान बंद हो गया। इसके बाद कथित तौर पर कंपनी को आर्थिक नुकसान होने की बात बताई गई।
बैंकिंग अनुभव का कथित तौर पर इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि पूजा जैन 2019 से निजी बैंकों में रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी थी। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान उसे ग्राहकों से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिली और कथित तौर पर इसी तरह की जानकारी का इस्तेमाल संभावित निवेशकों तक पहुंचने के लिए किया गया।
जांच के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी को वास्तविक निवेश कारोबार जैसा दिखाने के लिए एक वेबसाइट डोमेन ‘INDIABONDSLIMITED’ तैयार कराया गया। पुलिस के अनुसार, इसके लिए Justdial के जरिए एक वेब डेवलपर से संपर्क किया गया था। इसके अलावा ‘IBL & Co’ नाम से कथित फर्जी फर्म के बैंक खाते खोले गए।
निवेशकों से मिलने वाले चेक पहले इन खातों में जमा किए जाते थे और पुलिस के अनुसार बाद में रकम को व्यक्तिगत बचत खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इससे निवेशकों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि उनका पैसा किसी वास्तविक वित्तीय संस्था या बॉन्ड योजना में लगाया जा रहा है।
असली दिखाने के लिए बनाए गए कथित फर्जी बॉन्ड
इस मामले का एक अहम पहलू फर्जी निवेश दस्तावेज हैं। पुलिस के मुताबिक, लैपटॉप की मदद से कथित तौर पर नकली बॉन्ड प्रमाणपत्र तैयार किए गए और उन्हें निवेशकों को ईमेल के जरिए भेजा गया।
यानी कथित धोखाधड़ी केवल फोन या मौखिक भरोसे तक सीमित नहीं थी। वेबसाइट, फर्म के नाम पर बैंक खाते और निवेश दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पूरी व्यवस्था को वास्तविक निवेश कंपनी जैसा दिखाने की कोशिश की गई। यही कारण है कि ऐसे मामलों में केवल दस्तावेज देखकर निवेश की वैधता मान लेना जोखिम भरा हो सकता है।
शिकायत के बाद शुरू हुई साइबर जांच
हेमा प्रियदर्शिनी की शिकायत के आधार पर 22 अगस्त 2026 को वेस्ट जोन साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद विशेष साइबर क्राइम टीम ने जांच शुरू की। पुलिस ने कथित लेन-देन, बैंक खातों, डिजिटल गतिविधियों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इसी प्रक्रिया में पूजा जैन की कथित भूमिका सामने आई और उसे गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, जांच में पूजा के खिलाफ पहले से दर्ज कुछ धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ये मामले नुंगमबक्कम और कोलाथुर पुलिस थानों तथा सेंट्रल क्राइम ब्रांच से जुड़े हैं। आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी कर रही है।
इस मामले से आम निवेशक को क्या समझना चाहिए?
इस केस में सबसे बड़ा चेतावनी संकेत था 25–30 प्रतिशत मासिक रिटर्न का दावा। इतना असामान्य और लगातार मासिक रिटर्न किसी निवेश प्रस्ताव को स्वतः धोखाधड़ी साबित नहीं करता, लेकिन यह निवेशक के लिए गंभीर जांच-पड़ताल का संकेत जरूर होना चाहिए।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है दस्तावेज और वेबसाइट। किसी निवेश योजना की वेबसाइट, ईमेल से मिला प्रमाणपत्र या आकर्षक बॉन्ड डॉक्यूमेंट अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कंपनी या निवेश उत्पाद वास्तविक और नियामकीय रूप से अधिकृत है।
तीसरा जोखिम उस स्थिति में बढ़ जाता है जब निवेश के लिए रकम किसी व्यक्ति, संदिग्ध कंपनी या ऐसे खाते में भेजने को कहा जाए जिसका संबंध आधिकारिक वित्तीय संस्था से स्पष्ट रूप से प्रमाणित न हो।
खास बात
इस मामले में कथित तौर पर बैंकिंग क्षेत्र का अनुभव + ग्राहक संबंधों की जानकारी + नकली वेबसाइट + फर्जी निवेश दस्तावेज + बैंक खातों की श्रृंखला—इन सभी चीजों को जोड़कर भरोसेमंद निवेश योजना का रूप देने की कोशिश की गई। इसलिए यह मामला केवल सामान्य ऑनलाइन ठगी नहीं, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी वित्तीय पहचान के इस्तेमाल की ओर भी इशारा करता है। हालांकि, इन सभी आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में ₹23 लाख की कथित धोखाधड़ी, आरोपी की गिरफ्तारी, ‘IBL Bonds’, ‘INDIABONDSLIMITED’ डोमेन, ‘IBL & Co’ और फर्जी बॉन्ड दस्तावेजों से जुड़े आरोपों की जानकारी पुलिस जांच के हवाले से दी गई है। आरोपी पर लगे आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
