सावधान: नेट बैंकिंग अपडेट के नाम पर साइबर ठगों का नया जाल, लाखों की ठगी।
रिटायर्ड इंजीनियर से 3 लाख रुपये की नेट बैंकिंग ठगी: एक फोन कॉल ने खाली कर दिया बैंक खाता….
पुणे में एक सेवानिवृत्त इंजीनियर साइबर अपराधियों के जाल में फंस गए और अपने बैंक खाते से 3 लाख रुपये गंवा बैठे। ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर फोन किया और KYC अपडेट तथा नेट बैंकिंग से जुड़ी औपचारिकता पूरी करने का बहाना बनाया। बातचीत के दौरान उन्होंने पीड़ित से संवेदनशील बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली। कुछ ही देर में उनके खाते से बिना अनुमति के कई ट्रांजैक्शन कर करीब 3 लाख रुपये निकाल लिए गए। घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुई पूरी ठगी?
जानकारी के अनुसार, पीड़ित को एक कॉल आया जिसमें सामने वाले ने खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि यदि KYC या नेट बैंकिंग की जानकारी तुरंत अपडेट नहीं की गई तो बैंकिंग सेवाएं बंद हो सकती हैं। भरोसा जीतने के बाद ठग ने गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद साइबर अपराधियों ने खाते से कई ऑनलाइन लेनदेन कर रकम निकाल ली। जब पीड़ित ने बैंक स्टेटमेंट देखा, तब उन्हें ठगी का पता चला।
- पीड़ित: उत्तराखंड के एक सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त (Retired) 85 वर्षीय बुजुर्ग, जो फिलहाल अपने परिवार के साथ खराड़ी, पुणे में रहते हैं।
- शुरुआत कैसे हुई: दिसंबर 2025 में पीड़ित का एक सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) के बैंक खाते का नेट बैंकिंग निष्क्रिय (Deactivate) हो गया था।
- जालसाजी का तरीका: फरवरी 2026 में सोशल मीडिया पर सर्फिंग करते समय बुजुर्ग को एक पेज दिखा जो बिल्कुल उनके बैंक का आधिकारिक पेज लग रहा था। उन्होंने नेट बैंकिंग सहायता के लिए उसमें दिए गए एक लिंक पर क्लिक किया।
- फर्जी कॉल और APK फाइल: लिंक पर क्लिक करने के कुछ ही समय बाद उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया और नेट बैंकिंग सेवा 24 घंटे के भीतर चालू करने का दावा किया।
- ठगी: आरोपी ने बुजुर्ग के फोन पर एक ‘APK फाइल’ (Android Application package) भेजी और उसमें उनकी व्यक्तिगत व बैंकिंग जानकारी दर्ज करने को कहा। जैसे ही उन्होंने जानकारी भरी, जालसाजों ने उनके खाते से दो बार में 3 लाख रुपये निकाल लिए।
यह तरीका क्यों खतरनाक है?
साइबर अपराधी अब केवल OTP मांगकर ही ठगी नहीं करते। वे बैंक अधिकारी, RBI, पुलिस, कूरियर कंपनी या KYC टीम बनकर लोगों का विश्वास जीतते हैं। कई मामलों में वे लोगों से:
- नेट बैंकिंग यूजर आईडी या पासवर्ड पूछते हैं।
- OTP या MPIN साझा करवाते हैं।
- मोबाइल पर फर्जी लिंक भेजते हैं।
- Remote Access App या APK इंस्टॉल करवाते हैं।
- स्क्रीन शेयरिंग के जरिए बैंकिंग जानकारी चुरा लेते हैं।
इसके बाद कुछ मिनटों में पूरा बैंक खाता खाली किया जा सकता है।
यह कोई अकेली घटना नहीं
हाल के महीनों में पुणे सहित कई शहरों में वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर्ड अधिकारियों को निशाना बनाकर साइबर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। कहीं फर्जी शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये ठगे गए, तो कहीं “डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर लोगों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई। इससे साफ है कि साइबर अपराधी अब विशेष रूप से बुजुर्गों और रिटायर्ड लोगों को निशाना बना रहे हैं।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
- कोई भी बैंक कभी फोन पर OTP, CVV, PIN या नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगता।
- KYC अपडेट कराने के लिए आए किसी भी कॉल पर भरोसा न करें।
- बैंक का नंबर हमेशा उसकी आधिकारिक वेबसाइट या पासबुक से ही लें।
- किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- APK फाइल या Remote Access App इंस्टॉल न करें।
- बैंक खाते में SMS और ईमेल अलर्ट हमेशा चालू रखें।
- शक होने पर तुरंत बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क करें और खाते को ब्लॉक करवाएं।
अगर आपके साथ साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?
- तुरंत बैंक को सूचना देकर खाते या कार्ड को ब्लॉक कराएं।
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक ट्रांजैक्शन, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी ही अधिक संभावना होती है कि संदिग्ध खाते में पहुंची रकम को फ्रीज कराया जा सके।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल अधिकांश बैंकिंग फ्रॉड तकनीकी कमजोरी से नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग के जरिए होते हैं। अपराधी लोगों के मन में डर, जल्दबाजी या लालच पैदा करके उनसे स्वयं गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसलिए किसी भी फोन कॉल, मैसेज या लिंक पर कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है.
