मोबाइल टावर लगाने का ऑफर निकला फर्जी, पुणे में लाखों की साइबर ठगी!!!
मोबाइल टावर लगाने का झांसा, पुणे के व्यक्ति से ₹4.17 लाख की साइबर ठगी….
पुणे में एक व्यक्ति को मोबाइल टावर लगाने के बदले मोटा किराया मिलने का लालच देना भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने टावर इंस्टॉलेशन का फर्जी ऑफर देकर उससे अलग-अलग बहानों से कुल ₹4.17 लाख ऐंठ लिए। जब पीड़ित को समझ आया कि टावर लगाने का वादा केवल पैसे ठगने की साजिश थी, तब उसने पुलिस से शिकायत की।
कैसे रचा गया पूरा जाल?
मिली जानकारी के मुताबिक, ठगों ने पीड़ित को उसकी संपत्ति पर मोबाइल टावर लगाने का प्रस्ताव दिया। इसके बदले हर महीने अच्छी-खासी कमाई होने का भरोसा दिलाया गया। यह ऑफर सुनने में आकर्षक था, लेकिन असली मकसद पीड़ित से पैसा वसूलना था।
ठगों ने प्रक्रिया को असली दिखाने के लिए अलग-अलग चरण बनाए। पीड़ित से रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज और दस्तावेजों से जुड़े खर्च जैसे बहानों पर रकम जमा कराई गई। अलग-अलग भुगतान करते-करते नुकसान बढ़कर ₹4.17 लाख हो गया।
यह तरीका नया जरूर नहीं है, लेकिन इसकी रणनीति बेहद प्रभावी है—पहले कमाई का लालच, फिर फर्जी प्रक्रिया, उसके बाद एक के बाद एक शुल्क और अंत में ठगों का गायब हो जाना।
सबसे बड़ा फैक्ट: DoT और TRAI टावर के लिए पैसा नहीं लेते
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। Department of Telecommunications (DoT) और Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने मोबाइल टावर लगाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर पहले से सार्वजनिक चेतावनी जारी कर रखी है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, DoT/TRAI मोबाइल टावर लगाने के लिए जमीन या मकान किराये पर देने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं और टावर लगाने के लिए कोई NOC जारी नहीं करते। अधिकृत Telecom Service Providers और Infrastructure Providers की जानकारी DoT की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
DoT ने यह भी स्पष्ट किया है कि टावर लगाने के नाम पर security deposit, application fee, registration charge, government tax या advance payment मांगना बड़ा खतरे का संकेत है। ऐसे फर्जी ऑपरेटर पैसे लेने के बाद संपर्क बंद कर सकते हैं।
2026 में भी जारी है Tower Fraud का खतरा
यह सिर्फ पुराना साइबर फ्रॉड नहीं है। TRAI की वेबसाइट पर Mobile Tower Fraud के लिए अलग चेतावनी मौजूद है और जुलाई 2026 में भी इस विषय को अपडेट किया गया है।
TRAI ने यह भी चेताया है कि उसके नाम का इस्तेमाल करके Tower Installation Offers, फर्जी दस्तावेज और फर्जी सरकारी मंजूरी दिखाकर लोगों से पैसे वसूले जा सकते हैं।
ठगी को पहचानने के 5 संकेत
1. बहुत ज्यादा किराये का वादा:
अगर कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट आधिकारिक प्रक्रिया के हर महीने भारी किराये की गारंटी दे रहा है, तो सावधान रहें।
2. पहले पैसे मांगना:
“Registration”, “NOC”, “Processing”, “Tax”, “Security Deposit” या “File Charge” के नाम पर अग्रिम भुगतान मांगा जाए तो इसे Red Flag मानें।
3. TRAI/DoT का नाम और लोगो:
सिर्फ किसी दस्तावेज पर सरकारी लोगो लगा होना उसे असली साबित नहीं करता। ठग फर्जी लेटर और प्रमाणपत्र तैयार कर सकते हैं।
4. जल्दी भुगतान का दबाव:
“आज पैसा नहीं दिया तो ऑफर खत्म” जैसी बातों से दबाव बनाया जाए तो भुगतान न करें।
5. निजी खाते में पैसा:
किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध संस्था के निजी बैंक खाते/UPI में रकम भेजने से पहले उसकी वैधता जांचें।
असली प्रक्रिया में सबसे पहले क्या करें?
किसी भी मोबाइल टावर के ऑफर पर भरोसा करने से पहले कंपनी की पहचान और उसका authorized Telecom Service Provider (TSP) या Infrastructure Provider (IP-1) होना DoT के आधिकारिक रिकॉर्ड से जांचें। सरकारी एजेंसियों के नाम, लोगो और NOC देखकर अकेले भरोसा न करें।
सबसे महत्वपूर्ण नियम याद रखें:
“टावर लगाने के लिए पहले पैसा मांगने वाला ऑफर—पहले जांचें, फिर कोई फैसला लें।”
अगर पैसा चला गया तो क्या करें?
सबसे पहले ठगों को और पैसा न भेजें। बैंक/पेमेंट सर्विस को तुरंत सूचना दें, सभी transaction details, UPI ID, मोबाइल नंबर, WhatsApp चैट, ईमेल, screenshots और बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और पुलिस/साइबर अपराध अधिकारियों को शिकायत दें।
इस मामले की सबसे बड़ी सीख यही है कि मोबाइल टावर की लालच वाली स्कीम में असली कमाई का सपना दिखाकर पहले आपसे पैसा लिया जाता है। पुणे का ₹4.17 लाख का मामला बताता है कि पुराने साइबर फ्रॉड के तरीके आज भी नए डिजिटल रूप में लोगों को निशाना बना रहे हैं।
