ऑनलाइन ऑर्डर का खेल, कंपनी को लगा ₹42 लाख का बड़ा झटका!!!
सूरत में ई-कॉमर्स फ्रॉड का बड़ा खुलासा: 5,121 फर्जी ऑर्डर बनाकर कंपनी से ₹42.20 लाख की कथित ठगी…..
ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर फर्जी ऑर्डर बनाकर कंपनी की रिफंड और पेमेंट व्यवस्था की कथित कमजोरी का फायदा उठाने वाले एक गिरोह का सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 5,121 संदिग्ध Cash-on-Delivery ऑर्डर तैयार किए और इस प्रक्रिया के जरिए Flipkart India Pvt Ltd से करीब ₹42.20 लाख की रकम हासिल की।
कैसे रची गई पूरी साजिश?
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने M/s Sukhvilash Creations नाम से एक विक्रेता अकाउंट बनाया। इसके बाद हजारों ऐसे COD ऑर्डर तैयार किए गए, जिनका उद्देश्य वास्तविक ग्राहकों तक सामान पहुंचाना नहीं था।
जांच के अनुसार गिरोह ऑर्डर डिलीवर होने से पहले ही उन्हें Cancel कर देता था। यहीं कथित तौर पर इस फ्रॉड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, Seller को ऑर्डर की रकम करीब तीन दिन में मिल जाती थी, जबकि सामान्य डिलीवरी प्रक्रिया में लगभग सात दिन लगते थे। आरोप है कि ऑर्डर कैंसल होने के बाद भी आरोपियों ने कंपनी को भुगतान वापस नहीं किया और Seller Protection Fund (SPF) से जुड़ी प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग किया।
Telegram के जरिए बनते थे फर्जी ऑर्डर
जांच में यह भी सामने
आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर एक Telegram यूजर की मदद ली। पुलिस के अनुसार हर फर्जी ऑर्डर तैयार कराने के लिए करीब ₹120 का भुगतान किया जाता था।
यानी यह केवल एक व्यक्ति द्वारा किया गया साधारण ऑनलाइन फ्रॉड नहीं था, बल्कि इसमें फर्जी Seller Account + बड़े पैमाने पर Fake Orders + Telegram Network + Refund Mechanism की कथित कमजोरी जैसे कई हिस्से जुड़े हुए थे।
मास्टरमाइंड कौन?
पुलिस ने 28 वर्षीय Ashav Lungariya को इस मामले का कथित मास्टरमाइंड बताया है। जांच के अनुसार उसने कंपनी को रजिस्टर कराने के लिए कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर इस्तेमाल किया।
उसके अलावा पुलिस ने Rakshit Radadiya (26), Bhautik Thummar (27), Akash Vora (26) और Rohan Vora (23) को भी गिरफ्तार किया है।
5,121 ऑर्डर क्यों महत्वपूर्ण हैं?
इस मामले की सबसे बड़ी बात सिर्फ ₹42.20 लाख का कथित नुकसान नहीं है। असली चिंता यह है कि आरोपियों ने हजारों ऑर्डरों के जरिए सिस्टम को लगातार इस्तेमाल किया।
अगर 5,121 ऑर्डरों और ₹42.20 लाख की कथित रकम को मोटे तौर पर देखा जाए, तो औसत प्रभाव लगभग ₹824 प्रति ऑर्डर बैठता है। इससे संकेत मिलता है कि कथित रणनीति छोटे-छोटे लेनदेन को बड़े पैमाने पर दोहराकर कुल रकम बढ़ाने पर आधारित थी।
यही वजह है कि आधुनिक E-commerce Fraud में केवल एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़ना पर्याप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म को ऑर्डर के पूरे व्यवहार—जैसे Order Creation, Cancellation, Seller Payout, Refund और Account Identity—को एक साथ देखना पड़ता है।
असली खतरा: सिस्टम की कमजोरी का गलत इस्तेमाल
यह मामला आम ग्राहक को ठगने वाले पारंपरिक OTP Scam या UPI Fraud से अलग है। यहां पुलिस के अनुसार कथित तौर पर ग्राहक से सीधे पैसा लेने के बजाय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के कारोबारी सिस्टम को निशाना बनाया गया।
इस तरह के मामलों को Business Logic Abuse कहा जा सकता है—जहां अपराधी किसी ऐप को हैक करने के बजाय उसके वैध नियमों और प्रक्रियाओं को इस तरह इस्तेमाल करता है कि सिस्टम खुद नुकसान पैदा करने लगे।
यही साइबर अपराध की बदलती तस्वीर है। अब हर फ्रॉड में जरूरी नहीं कि कोई पासवर्ड चोरी हो या सर्वर हैक किया जाए। कभी-कभी वैध अकाउंट और वैध फीचर का गलत इस्तेमाल भी बड़े आर्थिक नुकसान में बदल सकता है।
प्लेटफॉर्म्स के लिए क्या सबक?
इस मामले से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा संकेत सामने आते हैं:
- असामान्य COD ऑर्डर पैटर्न की रियल-टाइम निगरानी जरूरी है।
- बार-बार बनने और कैंसल होने वाले ऑर्डरों पर Risk Score बढ़ाया जाना चाहिए।
- Seller को जल्दी भुगतान और बाद में Cancellation होने की स्थिति में Automated Risk Hold लगाया जा सकता है।
- एक ही मोबाइल नंबर, डिवाइस, IP या पहचान से जुड़े अलग-अलग अकाउंट्स का Network Analysis किया जाना चाहिए।
- Refund और Seller Protection Fund के दावों में Transaction-Level Verification मजबूत करना जरूरी है।
- Telegram जैसे बाहरी प्लेटफॉर्म से जुड़े संदिग्ध ऑर्डर पैटर्न को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
जांच अभी खत्म नहीं हुई
पुलिस की कार्रवाई के बावजूद यह मामला पूरी तरह बंद नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियों के लिए अब महत्वपूर्ण सवाल यह होंगे कि 5,121 ऑर्डरों में कितने वास्तव में फर्जी थे, रकम किन खातों तक पहुंची, Telegram नेटवर्क में और कौन लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी निशाना बनाया गया था।
इसलिए ₹42.20 लाख की रकम को इस गिरोह की पूरी गतिविधि का अंतिम आंकड़ा मानना जल्दबाजी होगी। आगे की जांच से मनी ट्रेल और संभावित अन्य सहयोगियों की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
निष्कर्ष
सूरत का यह मामला दिखाता है कि साइबर फ्रॉड अब केवल मोबाइल कॉल, फर्जी लिंक या OTP तक सीमित नहीं रहा। E-commerce platforms की business processes भी अपराधियों के निशाने पर हैं।
यहां कथित तौर पर किसी ग्राहक को बहला-फुसलाकर पैसा नहीं भेजवाया गया, बल्कि ऑर्डर और भुगतान की प्रक्रिया में मौजूद कथित loophole को बड़े पैमाने पर दोहराया गया। यही इस केस की सबसे महत्वपूर्ण बात है।
पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन कानूनी रूप से आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
