गेमिंग ऐप पर दिखा मुनाफा निकला जाल, युवक ने गंवाई करोड़ों की संपत्ति।
पैसों की लालच ने गंवाई पुश्तैनी जमीन: ऑनलाइन गेमिंग ऐप के चक्कर में ₹1.27 करोड़ की ठगी….
ऑनलाइन गेमिंग में जल्दी पैसा कमाने की चाह एक 26 वर्षीय ट्रांसपोर्टर को बेहद भारी पड़ गई। पनवेल के रहने वाले इस युवक ने ‘Khelo24match’ नाम के ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर दांव लगाने के लिए अपनी पुश्तैनी कृषि जमीन तक बेच दी। इसके बाद धीरे-धीरे उसने करीब ₹1.27 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में UPI के जरिए भेज दिए। जब ऐप पर दिखाई जा रही कथित कमाई निकालने की कोशिश की, तो पैसा वापस नहीं मिला और उसे ठगी का एहसास हुआ।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने 9 अक्टूबर 2024 से 28 जुलाई 2026 के बीच इस प्लेटफॉर्म पर रकम लगाई। उसे कार्ड गेम, कैसीनो और दूसरे सट्टेबाजी वाले खेलों में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
सबसे बड़ा जाल यह था कि ऐप पर उसकी कथित कमाई/प्रॉफिट लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देता था। इससे उसे लगा कि पैसा सचमुच बन रहा है। इसी भरोसे में उसने और रकम लगानी शुरू कर दी। रकम जुटाने के लिए उसने अपनी पुश्तैनी कृषि जमीन बेच दी।
जब उसने ऐप पर दिख रहा मुनाफा निकालना चाहा, तो रकम नहीं निकली। इसके बाद उसे समझ आया कि जिस प्लेटफॉर्म को वह वैध गेमिंग ऐप समझ रहा था, वह कथित तौर पर ठगी का माध्यम बन चुका था। इसके बाद उसने नवी मुंबई साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
₹1.27 करोड़ एक ही बार में नहीं गए
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक झटके में हुई ठगी नहीं थी।
पीड़ित से कथित तौर पर बार-बार अलग-अलग UPI ट्रांसफर कराए गए और रकम विभिन्न बैंक खातों में भेजी गई। यानी ठगी का मॉडल ऐसा दिखाई देता है जिसमें पीड़ित को एक बड़े ट्रांजैक्शन के बजाय धीरे-धीरे अधिक पैसा लगाने के लिए तैयार किया जाता है।
यही तरीका ऑनलाइन गेमिंग और निवेश से जुड़े कई फ्रॉड में खतरनाक साबित होता है—पहले छोटी रकम से भरोसा बनाया जाता है, फिर व्यक्ति को बड़ी रकम लगाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाता है।
पुलिस ने किन लोगों पर मामला दर्ज किया?
नवी मुंबई साइबर पुलिस के अनुसार, मामले में प्लेटफॉर्म से जुड़े अज्ञात डायरेक्टर, मैनेजर, कस्टमर केयर प्रतिनिधि, वेबसाइट लिंक से जुड़े लोग और उन बैंक खातों के धारक जांच के दायरे में हैं, जिनमें पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराई गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और अन्य संबंधित प्रावधानों के साथ IT कानून तथा ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित कानून के तहत कार्रवाई शुरू की है।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं
इस घटना को अलग-थलग मामला मानना सही नहीं होगा। जून 2026 में नवी मुंबई में ही एक 25 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक ने कथित ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड में करीब ₹1.26 करोड़ गंवाने की शिकायत की थी। उसने भी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर रकम लगाई थी और पुलिस के अनुसार शुरुआती दौर में छोटी रकम निकाल पाने से उसे प्लेटफॉर्म के असली होने का भरोसा हुआ। बाद में उसने बड़ी रकम लगाई।
दोनों मामलों में एक समान पैटर्न दिखाई देता है—पहले भरोसा, फिर छोटी सफलता का संकेत, उसके बाद बड़ी रकम का निवेश और अंत में निकासी में परेशानी।
बड़ा सवाल: ऐप पर दिख रहा Profit असली था या सिर्फ स्क्रीन पर?
यही इस तरह के फ्रॉड का सबसे खतरनाक हिस्सा है।
किसी ऐप पर आपके खाते में ₹10 लाख, ₹20 लाख या ₹50 लाख का “Profit” दिखाई देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह पैसा वास्तव में आपके बैंक खाते में मौजूद है।
अगर पैसा केवल ऐप के अंदर दिखाई दे रहा है और उसे स्वतंत्र रूप से बैंक खाते में निकालना संभव नहीं है, तो उस “कमाई” का आर्थिक मूल्य शून्य भी हो सकता है।
स्क्रीन पर दिखने वाला बैलेंस ≠ बैंक में मौजूद पैसा।
यही फर्क समझना ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड से बचने की पहली शर्त है।
एक जरूरी कानूनी अपडेट
इस मामले में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कानून का संदर्भ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 लागू किया गया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र को विनियमित करना है और ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश, संचालन, सुविधा, विज्ञापन, प्रचार और भागीदारी पर रोक का प्रावधान करता है।
MeitY ने अप्रैल 2026 में इस कानून के तहत Online Gaming Authority of India से संबंधित अधिसूचनाएं और जांच अधिकारियों के प्राधिकरण से जुड़े नोटिफिकेशन भी प्रकाशित किए हैं।
इसलिए किसी ऐप का खुद को “legal”, “licensed”, “government approved” या “100% safe” बताना अपने आप में पर्याप्त प्रमाण नहीं है। उसकी वैधानिक स्थिति की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
आम लोगों के लिए 7 बड़े सबक
1. जमीन, घर या गहने बेचकर ऑनलाइन गेमिंग में पैसा न लगाएं।
कमाई की कोई गारंटी नहीं होती और नुकसान की भरपाई भी निश्चित नहीं होती।
2. “Guaranteed Profit” सबसे बड़ा Red Flag है।
गेमिंग या सट्टेबाजी में निश्चित मुनाफे का दावा भरोसे का प्रमाण नहीं है।
3. ऐप का Wallet असली बैंक बैलेंस नहीं है।
जब तक पैसा आपके अपने बैंक खाते में सफलतापूर्वक नहीं पहुंचता, उसे कमाई मानकर न चलें।
4. अलग-अलग बैंक खातों में पैसा भेजने को सामान्य न समझें।
किसी प्लेटफॉर्म के नाम पर बार-बार अलग-अलग निजी खातों में भुगतान मांगा जाए तो विशेष सावधानी बरतें।
5. शुरुआत में छोटी जीत भी जाल हो सकती है।
कुछ रकम निकाल पाने से यह साबित नहीं होता कि पूरा प्लेटफॉर्म सुरक्षित है।
6. “और पैसा डालो, तभी withdrawal खुलेगा” जैसी मांग से बचें।
ऐसे मामलों में व्यक्ति पहले ही काफी पैसा गंवा चुका होता है और उसे और रकम लगाने के लिए दबाव दिया जा सकता है।
7. ठगी होते ही तुरंत शिकायत करें।
समय बीतने से रकम को अलग-अलग खातों और माध्यमों में आगे ट्रांसफर किया जा सकता है। इसलिए बैंक, साइबर अपराध तंत्र और संबंधित अधिकारियों को तुरंत जानकारी देना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
यह मामला केवल ₹1.27 करोड़ की ठगी नहीं है। इसकी सबसे बड़ी चेतावनी यह है कि ऑनलाइन फ्रॉड अब केवल फर्जी लिंक या OTP तक सीमित नहीं रहा। Gaming, betting, fake profits और डिजिटल भुगतान को जोड़कर ऐसा जाल बनाया जा सकता है जिसमें व्यक्ति अपनी बड़ी संपत्ति तक दांव पर लगा देता है।
सबसे खतरनाक सोच है—“बस एक बार पैसा वापस निकाल लूं, फिर छोड़ दूंगा।”
क्योंकि कई मामलों में इसी उम्मीद के कारण व्यक्ति नुकसान की भरपाई करने के लिए और पैसा लगाता चला जाता है। नवी मुंबई के इस मामले में कथित तौर पर रकम धीरे-धीरे बढ़कर ₹1.27 करोड़ तक पहुंच गई।
याद रखें: ऑनलाइन ऐप पर दिख रहा मुनाफा तभी असली है, जब वह सुरक्षित तरीके से आपके अपने बैंक खाते में पहुंच जाए।
