मोबाइल में आया नकली ऐप, खुल गया बैंक खातों और डेटा पर अपराधियों का रास्ता!!!
फर्जी APK से ₹125 करोड़ की साइबर ठगी: 31 हजार से ज्यादा इंस्टॉलेशन, 5,613 मोबाइल प्रभावित; पटना से 4 आरोपी गिरफ्तार….
सूरत साइबर क्राइम सेल ने एक बड़े APK-based cyber fraud network का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में अब तक 336 फर्जी APK फाइलें, करीब 31,174 इंस्टॉलेशन, 5,613 प्रभावित मोबाइल डिवाइस और देशभर में लगभग ₹125.39 करोड़ के कथित साइबर फ्रॉड का लिंक सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने पटना के एक होटल से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच में इस नेटवर्क के तार झारखंड के जामताड़ा से जुड़े होने की बात सामने आई है।
शुरुआत सिर्फ ₹5 लाख की शिकायत से हुई
मामले की जांच मई 2026 में सामने आए एक ₹5 लाख के बैंक फ्रॉड से शुरू हुई। शिकायत के अनुसार पीड़ित को WhatsApp के जरिए ‘PNB One.APK’ नाम की एक फर्जी फाइल भेजी गई। इसे बैंकिंग ऐप समझकर मोबाइल में इंस्टॉल करने के बाद उसके बैंक खाते से कथित तौर पर ₹5 लाख ट्रांसफर कर दिए गए।
यहीं से सूरत साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल करते हुए जांचकर्ताओं को ऐसे कई APK फाइलों का पता चला, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग लोगों को निशाना बनाने में किया गया था।
336 फर्जी APK का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह कोई एक फर्जी ऐप का मामला नहीं था। पुलिस को 336 malicious APK files मिलीं, जिनसे जुड़े करीब 31,174 installations का पता चला। इनमें से 5,613 डिवाइस compromise होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार इन गतिविधियों का संबंध देशभर में लगभग ₹125.39 करोड़ के साइबर फ्रॉड से पाया गया है। हालांकि यह आंकड़ा जांच में सामने आए लिंक पर आधारित है और पूरी रकम की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
APK इतना खतरनाक क्यों है?
APK यानी Android Package Kit—Android फोन में ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। सामान्य तौर पर यूजर को ऐप भरोसेमंद स्रोत से ही इंस्टॉल करना चाहिए। समस्या तब शुरू होती है जब अपराधी बैंक, पुलिस, सरकारी विभाग, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी या किसी जानी-पहचानी कंपनी के नाम पर फर्जी APK भेजते हैं।
ऐसी फाइल इंस्टॉल होने के बाद ऐप को दिए गए permissions और उसके malicious behaviour के जरिए फोन की संवेदनशील जानकारी या बैंकिंग गतिविधियों को निशाना बनाया जा सकता है।
CERT-In ने भी 2026 में फर्जी RTO/e-Challan APK campaign के बारे में चेतावनी दी थी, जिसमें अपराधी नकली नोटिस भेजकर Android users को malicious APK इंस्टॉल करवाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे malware का उद्देश्य संवेदनशील जानकारी चुराना और unauthorized transactions को सक्षम करना हो सकता है।
जामताड़ा से पटना तक पुलिस की कार्रवाई
तकनीकी जांच के बाद पुलिस को नेटवर्क के जामताड़ा कनेक्शन के संकेत मिले। जांच टीम ने जामताड़ा में तलाश की और इसके बाद नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए पटना तक पहुंच बनाई।
पुलिस ने एक होटल से चार संदिग्धों को पकड़ा। रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई करीब 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की जांच-पड़ताल और तकनीकी ट्रैकिंग के बाद हुई।
जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में APK बनाने वाले, इसे फैलाने वाले, बैंक खातों का इस्तेमाल करने वाले और पैसे को आगे ट्रांसफर करने वाले कितने लोग शामिल थे।
एक आरोपी के डिवाइस से बड़ा सुराग
जांच में एक संदिग्ध के लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच महत्वपूर्ण साबित हुई। रिपोर्ट के अनुसार उसके डिवाइस से 121 से ज्यादा APK files विकसित/सप्लाई किए जाने के संकेत मिले और इनसे जुड़े डेटा में लगभग ₹64.38 करोड़ के साइबर फ्रॉड का लिंक बताया गया है।
इससे यह संकेत मिलता है कि नेटवर्क सिर्फ लोगों को APK भेजने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे तकनीकी स्तर पर फर्जी ऐप तैयार करने और बड़े पैमाने पर उन्हें फैलाने की व्यवस्था भी हो सकती है।
इस केस का सबसे बड़ा खतरा क्या है?
इस मामले की गंभीरता सिर्फ ₹125 करोड़ की कथित ठगी नहीं है। असली चिंता है एक साथ हजारों मोबाइल डिवाइस तक पहुंच बनाने वाला infrastructure।
यानी साइबर अपराध का मॉडल अब केवल—
फोन करो → OTP मांगो → पैसे निकालो
तक सीमित नहीं रह गया है।
अब नया तरीका हो सकता है—
फर्जी पहचान → WhatsApp पर APK → ऐप इंस्टॉल → फोन/जानकारी पर नियंत्रण → बैंकिंग फ्रॉड
यही कारण है कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK file को इंस्टॉल करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
- WhatsApp, Telegram या SMS पर आई अनजान APK file इंस्टॉल न करें।
- बैंक, पुलिस, RTO या सरकारी विभाग के नाम पर भेजी गई फाइल को देखकर तुरंत भरोसा न करें।
- बैंकिंग ऐप हमेशा official app store या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें।
- किसी ऐप को अनावश्यक SMS, Accessibility, Notification या अन्य sensitive permissions न दें।
- फोन में अचानक अनजान ऐप, असामान्य battery/data usage या संदिग्ध गतिविधि दिखे तो उसे गंभीरता से लें।
- बैंक खाते से पैसा निकलते ही 1930 पर तुरंत कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
भारत सरकार के अनुसार CFCFRMS के जरिए 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है। इसलिए फ्रॉड होने के बाद समय गंवाना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
विश्लेषण: ₹125 करोड़ से बड़ा है यह मामला
इस केस से तीन महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं।
पहली—Cybercrime अब mass-scale infrastructure बन चुका है।
336 APK और हजारों installations बताते हैं कि अपराधी एक-एक पीड़ित को manually target करने के बजाय automated और scalable तरीके अपना रहे हैं।
दूसरी—मोबाइल अब सिर्फ communication device नहीं रहा।
उसी फोन में बैंकिंग ऐप, OTP, personal documents, contacts और payment services मौजूद होती हैं। इसलिए malicious APK का असर केवल फोन तक सीमित नहीं रह सकता।
तीसरी—साइबर अपराध में अलग-अलग राज्यों की कड़ियां जुड़ सकती हैं।
इस केस में शिकायत सूरत से सामने आई, जांच पटना तक पहुंची और नेटवर्क का संबंध जामताड़ा से बताया गया। इससे स्पष्ट है कि cybercrime की जांच में interstate coordination और digital forensics बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फर्जी APK को सिर्फ एक “ऐप” समझना भारी पड़ सकता है। सूरत पुलिस की इस कार्रवाई ने दिखाया है कि एक संदिग्ध APK से शुरू हुई जांच किस तरह हजारों डिवाइस और करोड़ों रुपये के कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क तक पहुंच सकती है। फिलहाल गिरफ्तारियां जांच की शुरुआत हैं; नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, पैसों के flow और प्रभावित लोगों की पूरी संख्या का पता जांच आगे बढ़ने पर ही चलेगा।
सबसे जरूरी नियम: अनजान APK डाउनलोड नहीं करें—और अगर पैसा निकल गया है तो तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें।
