देवरिया में साइबर ठगी का जाल टूटा, म्यूल अकाउंट और क्रिप्टो कनेक्शन से खुला राज।!!!
देवरिया में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया: Mule Accounts से Crypto Platforms तक पहुंचाया जा रहा था संदिग्ध पैसा…..
उत्तर प्रदेश के देवरिया में पुलिस ने एक ऐसे कथित साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ यानी दूसरे लोगों के अवैध पैसे को घुमाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही 24 नामजद लोगों और 4-5 अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
मामला आखिर है क्या?
देवरिया पुलिस के अनुसार, आरोपियों का नेटवर्क कथित तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए साइबर अपराध से हासिल रकम को अलग-अलग डिजिटल माध्यमों तक पहुंचाने का काम कर रहा था। जांच में Binance, TG Exchange और iPay ऐप जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
सरल भाषा में समझें तो अपराधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ठगी के बाद मिले पैसे को अपने असली खाते में सीधे रखना नहीं, बल्कि उसकी पहचान छिपाते हुए आगे भेजना होती है। इसी काम में Mule Account महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुलिस का आरोप है कि इस नेटवर्क में ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया जिनका इस्तेमाल संदिग्ध रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
Mule Account क्या होता है?
Mule Account वह बैंक अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या नेटवर्क की संदिग्ध अथवा अवैध रकम को प्राप्त करने, ट्रांसफर करने या निकालने के लिए किया जाता है।
कई मामलों में खाताधारक को कमीशन, नौकरी, आसान कमाई या किसी दूसरे बहाने से अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाता है। कुछ मामलों में खाताधारक खुद भी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
यही कारण है कि “अपना बैंक अकाउंट किसी और को इस्तेमाल करने देना” बेहद जोखिम भरा है।
अगर उस खाते से साइबर ठगी की रकम गुजरती है तो खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है।
Crypto Platforms का इस्तेमाल क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि कथित नेटवर्क में बैंकिंग सिस्टम के साथ Crypto और Digital Platforms का भी इस्तेमाल सामने आया है। पुलिस के मुताबिक Binance, TG Exchange और iPay जैसे माध्यम जांच में सामने आए हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म अपने आप में अपराध का माध्यम है। असली समस्या तब पैदा होती है जब अपराधी अवैध धन की आवाजाही को छिपाने या उसकी ट्रेसिंग मुश्किल बनाने के लिए डिजिटल वित्तीय चैनलों का दुरुपयोग करते हैं।
यानी साइबर अपराध अब सिर्फ फर्जी कॉल या OTP तक सीमित नहीं रह गया है। इसके पीछे Bank Accounts + Digital Wallets + Crypto + Online Platforms जैसी कई परतें जुड़ सकती हैं।
4 गिरफ्तार, लेकिन जांच अभी बड़ी है
देवरिया पुलिस ने इस कार्रवाई में चार कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा 24 लोगों के नाम FIR में दर्ज किए गए हैं, जबकि 4 से 5 अज्ञात लोगों की भी भूमिका की जांच की जा रही है।
इससे संकेत मिलता है कि पुलिस की जांच केवल गिरफ्तार किए गए चार लोगों तक सीमित नहीं है। अब जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण यह पता लगाना होगा कि:
- बैंक खातों का असली नियंत्रक कौन था?
- खातों में पैसा कहां से आया?
- पैसा किन-किन खातों या प्लेटफॉर्म पर भेजा गया?
- Crypto transactions में किन wallets या accounts का इस्तेमाल हुआ?
- अलग-अलग राज्यों में इस नेटवर्क के संपर्क कौन हैं?
- क्या इन खातों को दूसरे साइबर फ्रॉड मामलों से भी जोड़ा जा सकता है?
बड़ा सवाल: पैसा किस साइबर ठगी से आया?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण जांच Money Trail की होगी।
किसी साइबर फ्रॉड नेटवर्क को पकड़ने में सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती। पुलिस को यह साबित करने के लिए वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी समझनी पड़ती है।
उदाहरण के तौर पर कथित नेटवर्क की संरचना कुछ इस तरह हो सकती है:
Victim → Fraudster → Mule Account → Multiple Transfers → Digital/Crypto Platform → अन्य Accounts/Wallets
यदि जांचकर्ता इस पूरी श्रृंखला को जोड़ लेते हैं तो सिर्फ स्थानीय स्तर के आरोपी ही नहीं, बल्कि नेटवर्क के मुख्य संचालक और फंड मैनेजर तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है।
हालांकि, इस मामले में इस पूरी money trail के अंतिम स्वरूप के बारे में जांच अभी जारी है; इसलिए किसी व्यक्ति या प्लेटफॉर्म को अपराध का दोषी मानना जांच और अदालत के अंतिम निष्कर्ष से पहले उचित नहीं होगा।
यह कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
देवरिया की कार्रवाई साइबर अपराध के बदलते तरीके की ओर इशारा करती है। पहले आम लोगों को फोन करके OTP या UPI के जरिए सीधे पैसा ट्रांसफर कराने वाले फ्रॉड अधिक चर्चा में रहते थे। अब अपराधी कथित तौर पर Financial Layering का इस्तेमाल कर रहे हैं—यानी पैसा एक खाते से दूसरे खाते और फिर अलग-अलग डिजिटल चैनलों में भेजना।
अप्रैल 2026 में देवरिया से जुड़े एक अन्य मामले में भी पुलिस कार्रवाई के दौरान म्यूल अकाउंट और लगभग ₹60 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट सामने आई थी। हालांकि वह अलग मामला था और उसे वर्तमान केस की रकम या नेटवर्क के साथ जोड़ना सही नहीं होगा।
इससे एक व्यापक तस्वीर जरूर सामने आती है—म्यूल अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय infrastructure बनते जा रहे हैं।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक
अगर कोई व्यक्ति आपसे कहे—
“अपना बैंक अकाउंट दे दो, हर महीने कमीशन मिलेगा।”
तो इसे आसान कमाई का मौका समझने के बजाय संभावित जोखिम मानें।
किसी दूसरे व्यक्ति को अपना:
- Bank Account
- ATM/Debit Card
- UPI ID
- Internet Banking
- OTP
- SIM
- Crypto Wallet
- KYC Documents
इस्तेमाल करने देना गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।
खास तौर पर “Account Rent”, “Commission for Transactions” या “Work From Home – Receive and Transfer Money” जैसे ऑफर से सावधान रहें।
निष्कर्ष
देवरिया पुलिस की कार्रवाई यह दिखाती है कि साइबर अपराध की लड़ाई अब सिर्फ अपराधी की पहचान करने तक सीमित नहीं है। पैसे की पूरी डिजिटल यात्रा को ट्रैक करना उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
इस केस में चार गिरफ्तारियां हुई हैं और कई अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अब जांच की असली परीक्षा Money Trail, Bank Accounts, Digital Platforms और संभावित Crypto Transactions को जोड़ने में होगी।
सबसे जरूरी बात—अपना बैंक अकाउंट किसी और को इस्तेमाल करने देना “छोटी मदद” नहीं हो सकती। वह आपको किसी बड़े साइबर अपराध की वित्तीय कड़ी बना सकता है।
