दिल्ली में “चलता-फिरता कॉल सेंटर”: कार में बैठकर ठगी, 3 गिरफ्तार!!!!!
दिल्ली में “चलता-फिरता कॉल सेंटर”: कार में बैठकर ठगी, 3 गिरफ्तार……
खबर क्या है?
दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जो चलती SUV से चल रहा था। इस गाड़ी को मोबाइल कॉल सेंटर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि लोकेशन ट्रैक न हो सके। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपी (सभी दिल्ली के रहने वाले): लोकेश तोमर (37), हिमांशु राठौड़ और तुषार (35)।
पुलिस आरोपियों तक कैसे पहुँची?
- पूर्वी दिल्ली में एक FIR दर्ज हुई और जाँच शुरू हुई।
- जाँच में हिमांशु राठौड़ से जुड़े एक बैंक खाते पर शक हुआ। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते के संदिग्ध लेन-देन दर्ज थे।
- इसी पैसे के रास्ते (मनी ट्रेल) से पुलिस नेटवर्क के बाकी लोगों तक पहुँची।
- पूर्वी दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके में गाड़ी को रोका गया। वहीं बाकी दो आरोपी पकड़े गए और सामान बरामद हुआ।
पुलिस को क्या-क्या मिला?
सात मोबाइल फोन, 15 बैंक/डेबिट/मेट्रो कार्ड, पाँच PAN कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी कॉपी, छह चेकबुक, तीन पासबुक, एक साइन किया हुआ चेक, दो रेंट एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट साइज फोटो, ग्राहकों की सूची वाले नौ पन्ने और NPCI की एक संदिग्ध नकली मोहर।
इसका मतलब यह है कि गिरोह के पास दूसरों के नाम पर फर्जी या किराये के बैंक खाते खोलने और चलाने का पूरा सामान था। ठगी का पैसा ऐसे खातों से घुमाया जाता है।
चलती गाड़ी ही क्यों?
- मोबाइल टावर और फोन की लोकेशन से पुलिस ठिकाना खोज लेती है। गाड़ी लगातार चलती रहे तो एक जगह का सबूत नहीं बनता।
- किसी दफ्तर या किराये के कमरे पर छापा पड़ने का खतरा नहीं रहता।
- सामान समेटकर भागना आसान होता है।
यह तरीका नया है, पर ठगी की बाकी चाल पुरानी ही है: फोन, भरोसा, डर या लालच।
जाँच अभी खत्म नहीं हुई
पुलिस इन मामलों में से एक आरोपी के मुंबई और तेलंगाना के साइबर ठगी मामलों से संबंध की भी जाँच कर रही है। ठगी की रकम कितनी थी और लोगों को किस बहाने से फँसाया गया, यह जानकारी मुझे उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली। पुलिस की अगली जानकारी का इंतज़ार करना ठीक रहेगा।
दूसरे मामलों से तुलना (विश्लेषण)
यह कोई अकेली घटना नहीं है। दिल्ली-NCR में फर्जी कॉल सेंटर बार-बार पकड़े जा रहे हैं:
- पलवल पुलिस का मामला: आरोपी बैंक अधिकारी बनकर फोन करते थे, क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर OTP लेते थे और फिर पैसा अलग-अलग वॉलेट में भेज देते थे। इस गिरोह के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 100 से ज्यादा शिकायतें और 40 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी मिली।
- गुरुग्राम पुलिस का मामला: मुख्य आरोपी महिलाओं को 12,000 रुपये महीना वेतन और ठगी की रकम पर 2% कमीशन देता था। एक महीने बाद वह फोन और SIM तोड़कर नए ले लेता था।
- तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की कार्रवाई: दिल्ली में चल रहे कॉल सेंटर नेटवर्क से 21 तेलुगु बोलने वाली महिला टेलीकॉलर और एक बैंक खाताधारक पकड़े गए। यह नेटवर्क करीब डेढ़ साल से चल रहा था।
इन मामलों से तीन बातें साफ होती हैं:
- दिल्ली से बाहर के लोग भी शिकार बन रहे हैं। ठग दिल्ली में बैठते हैं और ठगी देश के किसी भी कोने में होती है।
- ठगी का असली इंजन बैंक खाते हैं। खाता पकड़ में आया तो पूरा नेटवर्क खुल जाता है, जैसा इस केस में हुआ।
- ठग अपना तरीका बदलते रहते हैं। कभी किराये का कमरा, कभी बार-बार बदले जाने वाले फोन, और अब चलती गाड़ी।
पुलिस भी बड़े स्तर पर कार्रवाई कर रही है। Business Standard के अनुसार दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन CyHawk में दो दिन के अभियान के दौरान 4,400 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया।
आम लोग खुद को कैसे बचाएँ?
- OTP, PIN और CVV किसी को न बताएँ। असली बैंक कभी फोन पर ये नहीं माँगता।
- “कार्ड की लिमिट बढ़ाने”, “रिवॉर्ड पॉइंट भुनाने” या “सस्ता लोन” वाले फोन पर भरोसा न करें।
- अनजान नंबर से आए लिंक या ऐप न खोलें।
- ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकने की उम्मीद उतनी ज्यादा रहेगी।
- अपने बैंक खाते या SIM को कमीशन के लालच में किसी को किराये पर न दें। ऐसा करने पर आप खुद आरोपी बन सकते हैं।
(1930 हेल्पलाइन और NCRP पोर्टल गृह मंत्रालय की व्यवस्था है। इस्तेमाल से पहले पोर्टल पर एक बार जाँच लें, क्योंकि नंबर और वेबसाइट बदल सकती हैं।)
