ग्रेटर नोएडा के PNB में “35 करोड़” की गड़बड़ी का आरोप: खाते खाली, ग्राहक परेशान!!!!
ग्रेटर नोएडा के PNB में “35 करोड़” की गड़बड़ी का आरोप: खाते खाली, ग्राहक परेशान
खबर एक नज़र में
- जगह: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सेक्टर पाई-1 / ऐच्छर शाखा, ग्रेटर नोएडा, गौतम बुद्ध नगर
- आरोप: ग्राहकों के बचत खातों और FD (फिक्स्ड डिपॉज़िट) से बिना इजाज़त पैसा निकाला गया
- कुल रकम: करीब ₹35 करोड़। यह आँकड़ा ग्राहकों के दावों पर आधारित है। PTI के हवाले से बताया गया कि बैंक या पुलिस ने इस रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
- कार्रवाई: बैंक ने शाखा प्रबंधक समेत कई कर्मचारियों को सस्पेंड किया और बीटा-2 थाने में केस दर्ज हुआ।
मामला क्या है?
ग्रेटर नोएडा की इस शाखा के कई खाताधारकों ने शिकायत की कि उनके खाते का पैसा अचानक गायब हो गया। उनका कहना है कि न कोई SMS आया, न कोई फोन, और न उन्होंने किसी कागज़ पर दस्तख़त किए।
कुछ पीड़ितों की बात:
- विजेंद्र सिंह (किसान): उनके खाते में करीब 87-88 लाख रुपये थे, अब सिर्फ 1 लाख दिख रहा है। यह रकम ज़मीन के मुआवज़े की थी।
- हनीफ खान: उनके खाते में 39 लाख रुपये थे, अब कुछ नहीं बचा। उनके मुताबिक न मैसेज आया, न उन्होंने कोई कागज़ साइन किया।
- ज़ाकिर: उनका दावा है कि 9.5 लाख रुपये गायब हैं और बैंक से कोई मैसेज नहीं मिला।
- एक परिवार की महिला: जेवर एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहीत ज़मीन के मुआवज़े में ₹1.29 करोड़ मिले थे, पर बाद में ₹1.18 करोड़ गायब मिले।
गड़बड़ी का पता कैसे चला?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ग्राहकों ने चेक से भुगतान करना चाहा तो चेक बाउंस हो गए। बैंक जाकर जाँच की तो पता चला कि पैसा हमनाम (एक जैसे नाम वाले) लोगों के खातों में भेजा गया था।
एक ग्राहक ने यह भी बताया कि माँ के खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं था, इसलिए समय पर अलर्ट नहीं मिले। उसका दावा है कि यह गड़बड़ी कई सालों से चल रही हो सकती है। यह अभी सिर्फ़ आरोप है, जाँच में साबित होना बाकी है।
अब तक की कार्रवाई
| कदम | जानकारी |
|---|---|
| सस्पेंशन | शाखा प्रबंधक समेत 5 कर्मचारी निलंबित, शाखा का स्टाफ बदला गया |
| पुलिस केस | करीब 16 खाताधारकों की शिकायत पर FIR (DNA ने 18 शिकायतें बताई हैं) |
| बैंक की जाँच | PNB की एंटी-करप्शन टीम अलग से जाँच कर रही है |
| ग्राहकों का विरोध | बुधवार को ग्राहक शाखा के बाहर जमा हुए, किसान संगठन भी धरने पर बैठा |
ध्यान देने वाली बातें (विश्लेषण)
1. आँकड़ों में फर्क है। शिकायतों की संख्या 16 और 18 बताई गई है। शाखा प्रबंधक का नाम भी अलग-अलग रिपोर्टों में अलग है। इसलिए पक्का मानें वही जो बैंक या पुलिस की आधिकारिक जानकारी में आए।
2. निशाने पर वे लोग रहे जिन्होंने एक साथ बड़ी रकम पाई। कई पीड़ित किसान हैं जिन्हें ज़मीन अधिग्रहण का मुआवज़ा मिला। ऐसे खाते में बड़ी रकम लंबे समय तक पड़ी रहती है और खाताधारक रोज़ बैंकिंग ऐप नहीं देखते। गड़बड़ी करने वालों के लिए यह आसान मौका बन सकता है।
3. असली सवाल “सिस्टम की चूक या अंदर के लोगों की मिलीभगत” का है। DNA की रिपोर्ट का शीर्षक भी यही पूछता है। जाँच इसी से तय होगी कि FD कैसे समय से पहले तोड़ी गईं और पैसा दूसरे खातों में कैसे गया।
4. अलर्ट न मिलना बड़ी कड़ी हो सकता है। अगर मोबाइल नंबर खाते से जुड़ा न हो, या अलर्ट बंद हो, तो ग्राहक को पता ही नहीं चलता।
5. आरोप और दोषसिद्धि अलग चीज़ें हैं। अभी जाँच जारी है। किसी को दोषी कहना जल्दबाज़ी होगी।
आम लोग क्या करें? (बचाव के आसान उपाय)
- मोबाइल नंबर और ईमेल खाते से लिंक कराएँ। SMS अलर्ट चालू रखें।
- महीने में कम से कम एक बार पासबुक अपडेट कराएँ या ऐप में स्टेटमेंट देखें। FD का स्टेटस भी जाँचें।
- कोई भी गड़बड़ी दिखे तो तुरंत लिखित शिकायत दें और रसीद ज़रूर लें।
- बैंक न सुने तो बैंकिंग लोकपाल (RBI Ombudsman) के पास जाएँ। यह सेवा मुफ़्त है और RBI की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज होती है।
- खाली चेक या खाली फॉर्म पर कभी दस्तख़त न करें। अपना पासबुक, चेकबुक और KYC के कागज़ किसी और को भरोसे के नाम पर न सौंपें।
- बड़ी रकम एक ही खाते में लंबे समय तक न छोड़ें। FD कराते समय रसीद और नॉमिनी की जानकारी अपने पास रखें।
