Special 26 जैसी नकली रेड का खेल, दिल्ली पुलिस ने सात आरोपियों को पकड़ा!!!!
फर्जी CBI रेड के नाम पर कारोबारियों से वसूली, गलत घर पहुंचना पड़ा भारी….
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने ऐसे कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताकर कारोबारियों के घरों में फर्जी छापेमारी करता था और डर दिखाकर नकदी व कीमती सामान ऐंठने की कोशिश करता था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह की कथित मास्टरमाइंड आसिफा और पूजा थीं। दोनों की मुलाकात दिल्ली के एक बार/रेस्तरां से हुई थी और बाद में उन्होंने मिलकर इस तरह की वारदातों की योजना बनाई।
मामला तब खुला जब 11 अगस्त को आठ लोगों का एक समूह रोहिणी के प्रशांत विहार स्थित एक कारोबारी के घर पहुंचा। आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी बताया और फर्जी पहचान पत्र दिखाकर छापेमारी की बात कही। कारोबारी और उसकी मां ने जब सर्च वारंट दिखाने को कहा तो कथित तौर पर उन्हें धमकाया गया। समूह करीब 90 मिनट तक बाहर रहा और पड़ोसियों के हस्तक्षेप के बाद वहां से चला गया। इसके बाद कारोबारी ने पुलिस से संपर्क किया।
पूरा खेल कैसे चलता था?
पुलिस की जांच के अनुसार, गिरोह पहले ऐसे कारोबारियों को निशाना बनाता था जिनके पास बड़ी मात्रा में नकदी या संपत्ति होने की जानकारी मिल सकती थी। कथित तौर पर इन लोगों को ऐसी सूचना पुराने कर्मचारियों, परिचितों या अन्य संपर्कों से मिलती थी।
इसके बाद फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लेटरहेड, CBI/ED लिखे जैकेट और नोटिस तैयार किए जाते थे। छापे को वास्तविक दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर टीम का हिस्सा बनाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, ऐसे लोगों को एक रेड के लिए लगभग ₹4,000-₹5,000 दिए जाते थे।
गिरोह जरूरत के अनुसार खुद को अलग-अलग एजेंसियों का अधिकारी बताता था। यानी लक्ष्य और परिस्थितियों के हिसाब से CBI, ED या Crime Branch का नाम इस्तेमाल किया जाता था।
गलत दरवाजे ने खोला पूरा राज
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कथित आरोपी उस कारोबारी तक पहुंच गए, लेकिन उनकी गतिविधियों ने शक पैदा कर दिया। कारोबारी के परिवार ने दस्तावेज और वारंट की मांग की तथा पुलिस को सूचना दी।
पुलिस को भेजे गए कथित फर्जी CBI नोटिस का स्क्रीनशॉट भी जांच में महत्वपूर्ण सुराग बना। तकनीकी जांच, CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
पुलिस ने इस मामले में आसिफा (29), पूजा (27), कुलदीप शर्मा (63), चंदर प्रकाश शर्मा (38), शुभम उर्फ गोलू (26), राजवीर सिंह (21) और नितिन शर्मा (30) को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। जांच में कथित तौर पर CBI मोनोग्राम वाले कपड़े और फर्जी पहचान पत्रों से जुड़ी डिजिटल सामग्री भी मिली।
पूर्व बैंककर्मी पर भी शक
जांच में सामने आया कि कुलदीप शर्मा, जो पहले बैंकिंग क्षेत्र में काम कर चुके थे, कथित तौर पर कारोबारी के बारे में जानकारी रखते थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने कारोबारी का पता और घर में नकदी या कीमती सामान होने की संभावित जानकारी साझा की थी।
वहीं पूजा के रिश्तेदार चंदर प्रकाश पर कथित तौर पर फर्जी रेड के लिए लोगों की व्यवस्था करने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल थे और उन्हें संभावित लक्ष्यों की जानकारी कहां से मिलती थी।
क्या दूसरे शहरों में भी हुई ऐसी वारदात?
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कथित तौर पर फर्जी रेड के वीडियो और तस्वीरें मिली हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या इसी गिरोह ने दिल्ली के अलावा मुंबई या जम्मू-कश्मीर में भी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया था।
पुलिस को दो-तीन ऐसी संभावित फर्जी रेड की आशंका है और डिजिटल तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
हालांकि, इन संभावित घटनाओं की जांच अभी जारी है। इसलिए इन्हें फिलहाल पुलिस की जांच के दायरे में आई आशंकाएं माना जाना चाहिए, अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं।
इस मामले की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
यह मामला सिर्फ ठगी का नहीं, बल्कि सरकारी एजेंसियों की पहचान के दुरुपयोग का उदाहरण है। अपराधियों ने कथित तौर पर लोगों के मन में मौजूद CBI और ED जैसी एजेंसियों के डर को ही हथियार बनाया।
ऐसे अपराध में पीड़ित के सामने कुछ मिनटों में ऐसी स्थिति बनाई जाती है जिसमें वह सोचने-समझने की क्षमता खो सकता है। सरकारी पहचान पत्र, यूनिफॉर्म, आधिकारिक भाषा और छापे का माहौल मिलकर घटना को वास्तविक जैसा बना देते हैं।
यही कारण है कि किसी भी व्यक्ति को केवल वर्दी, ID कार्ड या WhatsApp पर भेजे गए नोटिस देखकर किसी व्यक्ति को सरकारी अधिकारी नहीं मान लेना चाहिए।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
- CBI/ED/पुलिस अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति से आधिकारिक पहचान और दस्तावेजों की पुष्टि करें।
- केवल WhatsApp पर भेजे गए नोटिस को देखकर घबराएं नहीं।
- कथित छापे के दौरान सर्च वारंट/कानूनी दस्तावेज देखने की मांग करें।
- संदिग्ध स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
- घर में मौजूद CCTV फुटेज, फोन नंबर, वाहन नंबर और संदेश सुरक्षित रखें।
- किसी डर या दबाव में नकद पैसा या कीमती सामान न सौंपें।
- यदि कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर धमका रहा है, तो उसकी पहचान स्वतंत्र माध्यम से सत्यापित करें।
महत्वपूर्ण: पुलिस के अनुसार इस मामले में आरोपियों के खिलाफ वसूली/Extortion, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई है। आरोपियों पर लगे आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं; दोष सिद्ध होना अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
विश्लेषण: इस केस का सबसे बड़ा सबक यह है कि आज ठगों को सिर्फ बैंक OTP या फर्जी लिंक की जरूरत नहीं है। वे सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता की नकल करके भी लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए किसी भी कथित सरकारी कार्रवाई में पहचान + कानूनी दस्तावेज + स्वतंत्र सत्यापन—इन तीनों को जांचे बिना भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
