Gold Loan के नाम पर करोड़ों का खेल, कमीशन के लालच में फंसे निवेशक!!!
नडियाद में ₹2.5 करोड़ की कथित ठगी: गोल्ड लोन के नाम पर कमीशन का लालच, निवेशकों के पैसे अटके…..
गुजरात के नडियाद से गोल्ड लोन से जुड़ी एक कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शिकायत के मुताबिक, एक डिस्ट्रीब्यूटर और कई अन्य लोगों से करीब ₹2.5 करोड़ की रकम जुटाई गई। उन्हें बताया गया था कि गोल्ड-लोन से जुड़े कारोबार में रकम लगाने या प्रोसेसिंग कराने पर हर ₹1 लाख पर ₹500 कमीशन मिलेगा। शुरुआत में भुगतान मिलने से योजना भरोसेमंद लगने लगी, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। मामला अब CID Crime Ahmedabad तक पहुंच गया है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, 44 वर्षीय शिकायतकर्ता फरवरी 2020 में एक Payment Services Company से डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में जुड़े थे। बाद में वे Super Distributor बन गए और उनके नेटवर्क में करीब 560 व्यापारी जुड़े थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 2021 में कंपनी से जुड़े गुजरात और महाराष्ट्र के अधिकारियों ने उन्हें गोल्ड-लोन से संबंधित एक योजना बताई। इसमें दावा किया गया कि प्रत्येक ₹1 लाख के प्रोसेस किए गए कारोबार पर ₹500 कमीशन मिलेगा।
दिसंबर 2021 में कथित तौर पर शिकायतकर्ता की मां के नाम से एक समझौता किया गया और उनके नाम पर खोले गए Current Account के माध्यम से लेन-देन किया गया।
दिसंबर 2021 से मई 2023 के बीच शिकायतकर्ता और अन्य निवेशकों ने कथित तौर पर कुल ₹2.5 करोड़ लगाए। रकम कथित रूप से अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाई गई, जिनमें कैश, बैंक ट्रांसफर, अंगड़िया चैनल, ब्रांच डिपॉजिट और डिजिटल वॉलेट/रिटेलर आईडी शामिल थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि करीब ₹1 करोड़ उनकी अपनी बचत थी, जबकि बाकी रकम रिश्तेदारों, डिस्ट्रीब्यूटर्स, व्यापारियों और अन्य निवेशकों से जुटाई गई थी।
शुरुआत में मिला कमीशन, फिर बंद हो गया भुगतान
शिकायत के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद करीब ₹30 लाख कमीशन के तौर पर वापस मिले। इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ। लेकिन दिसंबर 2022 से भुगतान कथित तौर पर बंद हो गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने कंपनी के अधिकारियों से मूल रकम और बकाया कमीशन वापस करने की मांग की। आरोप है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद पैसा वापस नहीं किया गया।
अब CID Crime Ahmedabad शिकायत में बताए गए लेन-देन, समझौते और कंपनी से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। इसलिए इस मामले में आरोपों को फिलहाल कथित माना जाना चाहिए; जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्या है?
यह मामला सिर्फ गोल्ड लोन का नहीं, बल्कि “कमीशन के बदले पैसा लगाने” वाले मॉडल का भी संकेत देता है।
सामान्य तौर पर गोल्ड लोन में ग्राहक अपना सोना गिरवी रखकर ऋण लेता है। RBI की Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025 में सोने के मूल्यांकन, दस्तावेज, LTV, गिरवी रखी संपत्ति की सुरक्षा और उसे वापस करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं।
लेकिन नडियाद मामले में सामने आया मॉडल अलग नजर आता है। यहां शिकायत के अनुसार लोगों को गोल्ड-लोन से जुड़े लेन-देन पर निश्चित कमीशन का लालच दिया गया और बड़ी रकम जुटाई गई। इसलिए इसे सीधे सामान्य बैंकिंग गोल्ड-लोन प्रक्रिया समझना उचित नहीं होगा।
क्यों यह मामला गंभीर है?
- तय कमीशन का लालच
₹1 लाख पर ₹500 यानी 0.5% प्रति प्रोसेसिंग का वादा सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन बड़ी रकम पर यह आकर्षक रिटर्न जैसा दिखाई देता है। - शुरुआती भुगतान से भरोसा बनना
कथित तौर पर करीब ₹30 लाख का कमीशन मिलने के बाद निवेशकों को यह व्यवस्था वास्तविक लग सकती थी। यही पैटर्न कई वित्तीय धोखाधड़ियों में लोगों का भरोसा कायम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। - बड़ी संख्या में कारोबारी नेटवर्क
शिकायतकर्ता का नेटवर्क लगभग 560 व्यापारियों तक था। ऐसे नेटवर्क में किसी योजना का भरोसा तेजी से फैल सकता है। - अलग-अलग भुगतान माध्यम
शिकायत में कैश, बैंकिंग चैनल, अंगड़िया और डिजिटल माध्यमों का उल्लेख है। जांच के दौरान इन सभी लेन-देन की transaction trail महत्वपूर्ण होगी।
क्या यह गोल्ड लोन में बढ़ते फ्रॉड का हिस्सा है?
भारत में गोल्ड-लोन से जुड़े दूसरे तरह के धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, 2026 में महाराष्ट्र के जलना में एक बैंक शाखा में कथित ₹7.31 करोड़ का गोल्ड-लोन फ्रॉड सामने आया, जहां बैंक के गोल्ड-लोन खातों से जुड़े असली आभूषणों को कथित तौर पर नकली आभूषणों से बदलने का आरोप लगा।
ओडिशा में भी 2026 में ₹5.21 करोड़ के कथित गोल्ड-लोन फ्रॉड में बैंक अधिकारियों पर फर्जी आभूषणों के आधार पर ऋण मंजूर करने का आरोप लगा।
इन मामलों और नडियाद की घटना को एक ही तरह का अपराध नहीं कहा जा सकता। लेकिन एक समान जोखिम सामने आता है—गोल्ड-लोन की विश्वसनीयता का इस्तेमाल करके वित्तीय लेन-देन में भरोसा पैदा करना।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
अगर कोई व्यक्ति या कंपनी कहती है कि “पैसा लगाइए और हर ₹1 लाख पर निश्चित कमीशन मिलेगा”, तो केवल कंपनी के कर्मचारी, पहचान या शुरुआती भुगतान के आधार पर भरोसा न करें।
- कंपनी का legal registration और वास्तविक business model जांचें।
- समझौते में पैसा किस उद्देश्य से लिया जा रहा है, स्पष्ट देखें।
- व्यक्तिगत खाते, रिश्तेदार के खाते या अनौपचारिक चैनल में बड़ी रकम भेजने से बचें।
- केवल WhatsApp/फोन पर मिले आश्वासन को पर्याप्त प्रमाण न मानें।
- बैंक/NBFC का नाम इस्तेमाल किया जा रहा हो तो संबंधित संस्था की official website/branch से सीधे पुष्टि करें।
- हर transaction की bank statement, receipt, agreement और communication records सुरक्षित रखें।
- किसी योजना में “गारंटीड कमीशन” या “बिना जोखिम निश्चित कमाई” का दावा हो तो उसे red flag मानें।
निष्कर्ष
नडियाद का यह मामला दिखाता है कि वित्तीय धोखाधड़ी हमेशा फर्जी ऐप या OTP के जरिए ही नहीं होती। कई बार व्यापारिक नेटवर्क, भरोसेमंद दिखने वाले अधिकारी और नियमित कमीशन के जरिए भी लोगों को बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार किया जा सकता है।
फिलहाल ₹2.5 करोड़ की रकम, ₹30 लाख कमीशन, समझौते और आरोपित कंपनी अधिकारियों की भूमिका शिकायत में लगाए गए दावों का हिस्सा हैं। CID Crime की जांच यह तय करेगी कि पैसा वास्तव में किस रास्ते से गया, योजना की वास्तविक प्रकृति क्या थी और किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।
