WhatsApp पर मिला निवेश का ऑफर, फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट और फिर ₹51 लाख की रकम गायब!
स्टॉक मार्केट में मुनाफे का झांसा, वडोदरा के 61 वर्षीय व्यक्ति से ₹51 लाख की ठगी…..
वडोदरा: शेयर बाजार में कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच एक 61 वर्षीय व्यक्ति को भारी पड़ गया। वडोदरा में साइबर ठगों के एक गिरोह ने कथित तौर पर उन्हें निवेश से मोटा रिटर्न दिलाने का भरोसा देकर ₹51 लाख से ज्यादा की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली। पीड़ित ने मामले की शिकायत वडोदरा साइबर क्राइम पुलिस से की है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
WhatsApp कॉल से शुरू हुआ संपर्क
शिकायत के मुताबिक, जून में पीड़ित महेंद्र मारू को WhatsApp पर एक व्यक्ति ने कॉल किया। उसने अपना नाम रवि बताया और शेयर बाजार में निवेश की अलग-अलग योजनाओं के बारे में जानकारी दी। शुरुआत में मारू ने निवेश करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद आरोपी ने उन्हें एक ऐसी योजना का भरोसा दिया जिसमें करीब ₹2 लाख मुनाफे का दावा किया गया था। कथित तौर पर आरोपी ने यह भी कहा कि मुनाफे में से उसे केवल 10 प्रतिशत कमीशन मिलेगा। इस बातचीत से पीड़ित को योजना वास्तविक होने का भरोसा हुआ।
इसके बाद उन्होंने अपने मौजूदा Demat Account के जरिए आरोपी की बताई कंपनियों के शेयर खरीदने शुरू किए।
पहले नुकसान कराया, फिर भरोसा बढ़ाया
जुलाई में एक अन्य व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और एक खास कंपनी के शेयर में निवेश करने की सलाह दी। पीड़ित ने उसके निर्देश पर निवेश किया, लेकिन उन्हें नुकसान हो गया।
यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू हुआ। आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें दूसरी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। भरोसा पैदा करने के लिए उन्हें दूसरे निवेशकों के कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट भी भेजे गए।
इसके बाद ठगों ने उन्हें शेयर ट्रेडिंग के लिए एक नया Demat Account खोलने को कहा। जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर यह भरोसा दिया कि वे खुद उनके निवेश को मैनेज करेंगे।
अलग-अलग खातों में भेजी गई करोड़ों वाली रकम का रास्ता
इसके बाद पीड़ित को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजने के निर्देश दिए गए। शिकायत के अनुसार, अगस्त से सितंबर के बीच उन्होंने कई लेनदेन किए और कुल मिलाकर ₹52 लाख से अधिक रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दी।
ठगी करने वालों ने शुरुआत में उन्हें ₹97,000 निकालने की अनुमति भी दी। इससे उन्हें यह विश्वास हो सकता था कि उनका निवेश वास्तविक है और पैसे निकालना संभव है।
लेकिन बाद में कहानी बदल गई।
आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनके निवेश में नुकसान चल रहा है और अगर उन्हें अपनी रकम वापस निकालनी है तो उन्हें और पैसा निवेश करना होगा। यहीं पीड़ित को संदेह हुआ।
जब उन्होंने अपने बेटे को पूरी बात बताई तो परिवार को साइबर ठगी की आशंका हुई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस अब पैसे के लेनदेन और आरोपियों से जुड़े खातों की जांच कर रही है।
ठगों की रणनीति समझना जरूरी
इस मामले में ठगी का पैटर्न खास तौर पर ध्यान देने लायक है। यह केवल एक फोन कॉल से होने वाली ठगी नहीं थी, बल्कि Trust Building → Small Profit → Bigger Investment → Withdrawal Block जैसे चरणों में आगे बढ़ती दिखाई देती है।
पहले संपर्क किया गया, फिर मुनाफे का लालच दिया गया। इसके बाद कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर भरोसा मजबूत किया गया। छोटी रकम निकालने की अनुमति देकर निवेश को वास्तविक दिखाया गया। जब पीड़ित ने बड़ी रकम लगा दी तो अतिरिक्त पैसा लगाने की मांग सामने आई।
SEBI ने भी निवेशकों को Fake Trading App Scams के इसी तरह के पैटर्न को लेकर चेतावनी दी है। नियामक के मुताबिक ठग सोशल मीडिया या WhatsApp/Telegram के जरिए आकर्षक रिटर्न का दावा कर सकते हैं, फर्जी विशेषज्ञ या सफल ट्रेडिंग के स्क्रीनशॉट दिखा सकते हैं, नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐप में काल्पनिक मुनाफा दिखाकर निवेशक से और पैसा लगवा सकते हैं। बाद में निकासी रोककर अलग-अलग फीस या अतिरिक्त निवेश की मांग की जा सकती है।
सबसे बड़ा RED FLAG क्या था?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी यह थी कि निवेश के लिए रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजने को कहा गया। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश की रकम तीसरे पक्ष के बैंक खाते में भेजना गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।
SEBI ने निवेशकों को फर्जी ट्रेडिंग ऐप और अनधिकृत प्लेटफॉर्म से सावधान रहने तथा निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की वैधता जांचने की सलाह दी है। मार्च 2026 में SEBI ने Google के साथ मिलकर SEBI-रजिस्टर्ड संस्थाओं के स्टॉक ट्रेडिंग ऐप्स के लिए Google Play Store पर ‘Verified’ लेबल की पहल भी शुरू की थी।
आम निवेशक क्या समझें?
शेयर बाजार में गारंटीड या असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का दावा अपने आप में चेतावनी का संकेत है। सोशल मीडिया या WhatsApp पर मिले किसी तथाकथित निवेश विशेषज्ञ की बात पर केवल स्क्रीनशॉट, मुनाफे के आंकड़े या शुरुआती छोटी निकासी देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
निवेश करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि सामने वाला व्यक्ति या संस्था SEBI के साथ पंजीकृत है या नहीं और जिस ट्रेडिंग ऐप का इस्तेमाल कराया जा रहा है वह वास्तविक और अधिकृत है या नहीं।
किसी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की आशंका होने पर भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जा सकती है और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 1930 हेल्पलाइन से तत्काल संपर्क करना महत्वपूर्ण है। SEBI भी संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने के लिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह देता है।
निष्कर्ष: इस मामले की पुलिस जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपियों की पहचान, पूरी रकम की बरामदगी और ठगी के नेटवर्क की वास्तविक सीमा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन घटना यह दिखाती है कि साइबर ठग अब केवल डर दिखाकर नहीं, बल्कि मुनाफे, फर्जी विशेषज्ञता और नकली निवेश रिकॉर्ड के जरिए भी लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं।
