अमेरिका को निशाना बनाने वाला फर्जी कॉल सेंटर गिरोह, ED ने मास्टरमाइंड दबोचा।
यूएस के लोगों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर पर ED की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड गिरफ्तार….
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हैदराबाद से संचालित एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क के मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह गिरोह भारत से बैठकर अमेरिका के नागरिकों को सरकारी अधिकारी, टैक्स विभाग या टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बनकर फोन करता था और उन्हें डराकर या झांसा देकर लाखों डॉलर की ठगी करता था। आरोपी पर इस साइबर ठगी से कमाए गए पैसे को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाने और अलग-अलग खातों तथा कंपनियों के माध्यम से घुमाने का भी आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
जांच के अनुसार यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग अमेरिकी लहजे (Accent) में बात करने की ट्रेनिंग लेते थे। वे खुद को कभी IRS (अमेरिकी टैक्स विभाग), कभी सोशल सिक्योरिटी अधिकारी, तो कभी Microsoft, Apple या अन्य बड़ी टेक कंपनियों का टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर लोगों को फोन करते थे।
इसके बाद वे पीड़ितों से कहते थे कि:
- आपके कंप्यूटर में वायरस है।
- आपके बैंक खाते से अवैध लेनदेन हुआ है।
- आपके टैक्स में गड़बड़ी है।
- आपके सोशल सिक्योरिटी नंबर का गलत इस्तेमाल हुआ है।
डर और घबराहट का फायदा उठाकर वे पीड़ितों से बैंक ट्रांसफर, गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी या अन्य माध्यमों से पैसे वसूल लेते थे।
ED की जांच में क्या सामने आया?
ED की जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही है। एजेंसी का कहना है कि ठगी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और अन्य वित्तीय माध्यमों से घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि:
- इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं।
- विदेशों में पैसा कैसे भेजा गया।
- किन बैंक खातों और कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।
- क्या इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से भी संबंध थे।
भारत से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर क्यों बने बड़ी चिंता?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई ऐसे कॉल सेंटर पकड़े गए हैं जो विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करते थे। इनमें सबसे आम तरीके हैं:
- फर्जी टेक सपोर्ट स्कैम
- टैक्स विभाग बनकर धमकी देना
- बैंक अधिकारी बनकर OTP और बैंक जानकारी लेना
- रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करवाना
- नकली इनवॉइस या रिफंड के नाम पर पैसे वसूलना
इन मामलों में अक्सर कमाई गई रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अलग-अलग खातों में भेजकर उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती है।
ED की भूमिका क्या होती है?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) सीधे साइबर ठगी की जांच नहीं करता, बल्कि जब किसी अपराध से कमाई गई अवैध रकम को छिपाने, घुमाने या वैध दिखाने का मामला सामने आता है, तब ED Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत कार्रवाई करता है। एजेंसी बैंक खाते फ्रीज कर सकती है, संपत्तियां जब्त कर सकती है और आरोपियों को गिरफ्तार भी कर सकती है।
आम लोगों के लिए सीख
यदि कोई व्यक्ति फोन पर खुद को सरकारी अधिकारी, पुलिस, बैंक कर्मचारी या किसी बड़ी टेक कंपनी का प्रतिनिधि बताकर:
- तुरंत पैसे भेजने का दबाव डाले,
- गिफ्ट कार्ड खरीदने को कहे,
- Remote Access App डाउनलोड करवाए,
- बैंक OTP या पासवर्ड मांगे,
तो समझिए कि यह साइबर ठगी हो सकती है। ऐसी स्थिति में कॉल तुरंत काट दें, किसी भी प्रकार की निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें और आधिकारिक हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
यह गिरफ्तारी केवल एक आरोपी की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई का हिस्सा मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय नेटवर्क, सहयोगियों और विदेशों तक फैले मनी ट्रेल की जांच कर रही हैं। यदि जांच में और सबूत मिलते हैं, तो इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा संपत्तियों की जब्ती भी हो सकती है।
