जिंदा पति को कागजों में मृत दिखाया, फिर करोड़ों की संपत्ति का सौदा कर दिया गया!
जिंदा पति को कागजों में ‘मृत’ दिखाया, फिर ₹1.11 करोड़ में बेच दिया फ्लैट; मुंबई में पत्नी गिरफ्तार…..
मुंबई: मुंबई के बोरीवली से संपत्ति के नाम पर फर्जीवाड़े का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने 49 वर्षीय शालिनी डायना क्रास्टा को कथित तौर पर अपने जिंदा पति रयान क्रास्टा को सरकारी कागजों में मृत दिखाकर उनका संयुक्त फ्लैट बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी डेथ सर्टिफिकेट, नकली सोसायटी NOC और गलत हलफनामे जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रयान क्रास्टा जीवित हैं और उन्हें अपने नाम की संपत्ति बिक जाने की जानकारी करीब एक साल बाद मिली।
2016 में खरीदा था संयुक्त फ्लैट
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रयान और शालिनी की शादी वर्ष 2007 में हुई थी। दोनों ने वर्ष 2016 में मुंबई के बोरीवली स्थित राज विला को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, एलएम रोड में एक बेडरूम का फ्लैट खरीदा था।
इस फ्लैट की खरीद कीमत करीब ₹73.80 लाख थी। इसके लिए लगभग ₹56 लाख का होम लोन भी लिया गया था। रयान ने पुलिस शिकायत में दावा किया कि उन्होंने लोन की किस्तें चुकाईं और संपत्ति दोनों के नाम पर दर्ज थी।
बाद में पति-पत्नी अलग रहने लगे। इसी दौरान कथित तौर पर फ्लैट को बेचने की योजना बनाई गई।
कागजों में पति को ही ‘मार’ दिया
पुलिस के अनुसार, शालिनी ने कथित तौर पर रयान का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराया। इसके साथ ही एक ऐसा हलफनामा भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें शालिनी को रयान का कानूनी वारिस बताया गया था।
संपत्ति की बिक्री के लिए कथित तौर पर सोसायटी की NOC यानी No Objection Certificate भी पेश की गई। लेकिन जब रयान ने इस दस्तावेज को सोसायटी के पदाधिकारियों को दिखाया तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि ऐसी NOC सोसायटी ने जारी नहीं की थी और दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षरों पर भी सवाल उठे।
यानी आरोपों के मुताबिक, केवल पति की पहचान या हस्ताक्षर से जुड़ी धोखाधड़ी नहीं हुई, बल्कि संपत्ति की बिक्री को वैध दिखाने के लिए कई दस्तावेज तैयार किए गए।
₹1.11 करोड़ में हुई फ्लैट की बिक्री
जांच में सामने आया कि यह फ्लैट 11 अप्रैल 2025 को रजिस्टर्ड दस्तावेज के जरिए धर्मेश जगदीश तन्ना और धारा धर्मेश तन्ना को बेच दिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, सौदे की रकम करीब ₹1.11 करोड़ थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल कहां किया गया और क्या उसे किसी दूसरे निवेश या खाते में भेजा गया।
मामला तब खुला जब मई 2026 में रयान के एक दोस्त ने उन्हें बताया कि उनके फ्लैट पर मॉर्गेज यानी गिरवी से जुड़ी जानकारी सामने आई है। इसके बाद रयान और उनकी मां ने संबंधित निजी बैंक से संपर्क किया। वहां से उन्हें फ्लैट की बिक्री और उससे जुड़े लोन की जानकारी मिली।
इसके बाद उन्होंने सोसायटी के अधिकारियों से भी संपर्क किया और कथित फर्जी NOC की जानकारी सामने आई।
9 सितंबर को गिरफ्तारी
शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने शालिनी को 9 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया। उन्हें बोरीवली की मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस को पूछताछ के लिए कस्टडी मिली।
अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित फर्जी डेथ सर्टिफिकेट और NOC किसने तैयार किए, इस प्रक्रिया में और कौन लोग शामिल थे और ₹1.11 करोड़ की रकम कहां गई।
मामला सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, दस्तावेजी सुरक्षा पर भी सवाल
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कथित धोखाधड़ी केवल पति-पत्नी के बीच संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं दिखती। यदि पुलिस के आरोप सही साबित होते हैं तो इसमें मृत्यु प्रमाणपत्र, कानूनी वारिस का हलफनामा, हाउसिंग सोसायटी की NOC और रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन जैसे कई स्तरों पर दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।
आम आदमी के लिए इसका सबसे बड़ा सबक यह है कि सिर्फ रजिस्टर्ड दस्तावेज होना ही पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। संयुक्त संपत्ति, होम लोन और पारिवारिक विवाद वाले मामलों में समय-समय पर प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, सोसायटी रिकॉर्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति की जांच करना जरूरी है।
साथ ही, किसी व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित करने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की सत्यता की जांच में संबंधित सरकारी और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल पुलिस इस मामले में कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और रकम के इस्तेमाल की दिशा में जांच कर रही है। शालिनी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी।
