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सुप्रीम कोर्ट सख्त, डिजिटल अरेस्ट ठगों को अब जमानत मिलना होगा बेहद मुश्किल।

aajtaksafe@gmail.com July 28, 2026
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: डिजिटल अरेस्ट ठगी के आरोपियों को आसानी से नहीं मिलेगी जमानत…..

देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में गिरफ्तार आरोपियों को सामान्य परिस्थितियों में जमानत नहीं दी जाएगी। केवल असाधारण (Exceptional) और ठोस कानूनी आधार होने पर ही जमानत पर विचार किया जाएगा। अदालत का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी केवल एक व्यक्ति के साथ ठगी नहीं, बल्कि समाज और देश की आर्थिक सुरक्षा पर बड़ा हमला है।

आखिर डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED, RBI, TRAI, कस्टम अधिकारी या सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या व्हाट्सऐप कॉल करते हैं।

पीड़ित को डराया जाता है कि—

  • आपके आधार या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अपराध में हुआ है।
  • आपके बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
  • आपके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है।
  • आपको तुरंत वीडियो कॉल पर रहना होगा, नहीं तो गिरफ्तारी होगी।

इसके बाद डर के माहौल में लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—

  • डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड अब संगठित अपराध (Organised Crime) का रूप ले चुके हैं।
  • इन अपराधों में कई राज्यों और कई देशों तक फैले नेटवर्क शामिल होते हैं।
  • ऐसे मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
  • इसलिए केवल बेहद विशेष परिस्थितियों में ही जमानत पर विचार किया जाएगा।

अदालत ने इसे इतना गंभीर क्यों माना?

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि—

  • अपराधी फर्जी बैंक खाते (Mule Accounts) इस्तेमाल करते हैं।
  • चोरी का पैसा कुछ ही मिनटों में कई खातों में भेज दिया जाता है।
  • कई गैंग विदेशों से ऑपरेट करते हैं।
  • नकली दस्तावेज, फर्जी कोर्ट आदेश और AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • बुजुर्ग, महिलाएं, डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर और कारोबारी सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट दे चुका है सख्त संदेश

हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट लगातार डिजिटल अरेस्ट मामलों पर चिंता जताता रहा है।

अदालत ने पहले भी कहा था कि—

  • डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी पूरे देश के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
  • राज्यों की पुलिस को ऐसे मामलों को संगठित अपराध की तरह जांचना चाहिए।
  • जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
  • साइबर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई ही इस नेटवर्क को तोड़ सकती है।

देश में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध?

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं—

  • लोगों में साइबर जागरूकता की कमी
  • आसानी से उपलब्ध फर्जी बैंक खाते
  • किराये पर लिए गए मोबाइल नंबर और सिम
  • विदेशी कॉलिंग सिस्टम
  • एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स
  • क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल पेमेंट का दुरुपयोग
  • सोशल इंजीनियरिंग और AI आधारित वॉयस क्लोनिंग

अगर आपको ऐसा कॉल आए तो क्या करें?

✔ घबराएं नहीं।

✔ याद रखें—भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी नागरिक को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।

✔ कोई भी अधिकारी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहता।

✔ किसी भी अनजान खाते में पैसा न भेजें।

✔ OTP, PIN, CVV या स्क्रीन शेयर बिल्कुल न करें।

✔ तुरंत कॉल काटें।

✔ संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर स्वयं संपर्क करें।

✔ साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर तुरंत दर्ज करें।

इस फैसले का क्या असर पड़ेगा?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख जांच एजेंसियों को मजबूत करेगा। अब डिजिटल अरेस्ट मामलों में आरोपियों के लिए शुरुआती चरण में जमानत पाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। इससे जांच पूरी करने, गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने और चोरी की रकम का पता लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में वास्तव में असाधारण और कानूनी रूप से उचित परिस्थितियां हों, तो जमानत पर विचार किया जा सकता है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह संदेश केवल एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी है। अदालत ने साफ कर दिया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी को सामान्य आर्थिक अपराध नहीं माना जाएगा। ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के प्रति न्यायपालिका का रुख बेहद सख्त रहेगा, ताकि देशभर में तेजी से फैल रहे साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

ऐसे ही खबरों से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए Click here

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