AI Deepfake का आतंक, वीडियो वायरल करने की धमकी देकर मांगी लाखों की रकम।
AI से बनाई अश्लील वीडियो दिखाकर ₹10 लाख की ठगी! देहरादून में सनसनीखेज ब्लैकमेलिंग का मामला…
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल अब लोगों की प्रतिष्ठा और निजी जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उत्तराखंड के देहरादून जिले के ऋषिकेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां तीन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति की AI की मदद से फर्जी अश्लील वीडियो तैयार कर उसे वायरल करने की धमकी दी और बदले में ₹10 लाख की रकम मांगी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति को कुछ लोगों ने संपर्क कर दावा किया कि उनके पास उसकी आपत्तिजनक वीडियो मौजूद है। आरोपियों ने कहा कि यदि उसने ₹10 लाख नहीं दिए, तो वे वीडियो सोशल मीडिया और उसके परिचितों के बीच वायरल कर देंगे।
जांच में सामने आया कि वीडियो वास्तविक नहीं थी, बल्कि AI तकनीक की मदद से तैयार या एडिट की गई फर्जी सामग्री (Deepfake/AI Generated Video) होने की आशंका है। पीड़ित ने डरने के बजाय पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
मामले की जांच कर रहे उप-निरीक्षक (SI) देवेंद्र पंवार के अनुसार:
- पेन ड्राइव के जरिए ब्लैकमेलिंग: आरोपी जगजीत सिंह, मोनू पाल और रवि गुप्ता ने पीड़ित को कुछ दिन पहले एक पेन ड्राइव दी थी और उसे घर जाकर देखने को कहा।
- AI से फर्जी वीडियो तैयार करना: जब पीड़ित ने पेन ड्राइव खोली, तो उसमें उसकी शक्ल से छेड़छाड़ (मॉर्फिंग) करके बनाई गई अश्लील वीडियो और तस्वीरें थीं। पीड़ित का कहना है कि यह पूरा कंटेंट एआई टूल की मदद से फर्जी तरीके से बनाया गया है।
- 10 लाख रुपये की मांग: जब पीड़ित ने आरोपियों से इसका विरोध किया, तो उन्होंने यह अश्लील सामग्री उसके परिवार और परिचितों में फैलाने की धमकी दी और 10 लाख रुपये की मांग की।
- राजनीतिक पहुंच का डर: आरोपियों ने पीड़ित को डराने के लिए यह भी दावा किया कि उनके संबंध बड़े नेताओं से हैं, इसलिए पुलिस या कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
AI वीडियो से ब्लैकमेलिंग कैसे होती है?
साइबर अपराधी अब आधुनिक AI टूल्स का इस्तेमाल करके—
- किसी व्यक्ति का चेहरा दूसरी वीडियो पर लगा देते हैं।
- नकली अश्लील फोटो या वीडियो तैयार करते हैं।
- आवाज की भी AI क्लोनिंग कर लेते हैं।
- फिर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं।
ऐसे मामलों में अधिकांश पीड़ित बदनामी के डर से शिकायत नहीं करते, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
Deepfake क्या होता है?
Deepfake ऐसी तकनीक है जिसमें AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा, हावभाव या आवाज बदलकर ऐसा कंटेंट तैयार किया जाता है जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही तकनीक फिल्मों, मनोरंजन और शिक्षा में उपयोगी हो सकती है, लेकिन गलत हाथों में यह ब्लैकमेल, धोखाधड़ी और फर्जी प्रचार का हथियार बन जाती है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा AI आधारित साइबर अपराध
साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही हैं कि अब अपराधी केवल फर्जी कॉल या OTP तक सीमित नहीं हैं। AI की मदद से—
- Deepfake वीडियो,
- Voice Cloning,
- Fake Identity,
- Digital Arrest,
- Sextortion,
- Fake Investment Scam
जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल के महीनों में देश के कई राज्यों से AI आधारित ब्लैकमेलिंग और फर्जी वीडियो बनाकर पैसे मांगने के मामले सामने आए हैं।
अगर आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें?
- घबराकर पैसे बिल्कुल न भेजें।
- वीडियो या संदेश को तुरंत डिलीट न करें, उसका स्क्रीनशॉट और सबूत सुरक्षित रखें।
- आरोपी से बहस करने के बजाय पुलिस को सूचना दें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- जरूरत पड़ने पर 1930 साइबर हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें।
- अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी मजबूत रखें और दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) चालू करें।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति AI से बनी फोटो, वीडियो या ऑडियो दिखाकर पैसे मांगता है, तो डरने के बजाय तुरंत कानूनी सहायता लें। समय पर शिकायत करने से अपराधियों तक पहुंचना आसान होता है और दूसरे लोगों को भी ऐसे गिरोहों से बचाया जा सकता है।
निष्कर्ष
देहरादून का यह मामला दिखाता है कि AI केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि गलत इस्तेमाल होने पर गंभीर साइबर अपराध का माध्यम भी बन सकता है। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो या AI आधारित धमकी पर तुरंत विश्वास न करें। जागरूकता, डिजिटल सुरक्षा और समय पर पुलिस शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
