सावधान!! कुछ हजार रुपये का लालच आपको जेल पहुंचा सकता है!!!
19 राज्यों में फैला ₹12.18 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क ध्वस्त, 17 गिरफ्तार, 14 मुकदमे दर्ज
प्रयागराज/प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। प्रतापगढ़ साइबर क्राइम सेल की कार्रवाई में 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 14 एफआईआर दर्ज की गईं। जांच में सामने आया कि इन आरोपियों के बैंक खाते और मोबाइल नंबर देश के 19 राज्यों में हुए लगभग ₹12.18 करोड़ के साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए थे।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
पुलिस जांच के अनुसार यह गिरोह सीधे लोगों से ठगी करने के बजाय साइबर अपराधियों को “सुविधा” उपलब्ध कराता था। इसके सदस्य अपने या दूसरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते, सिम कार्ड उपलब्ध कराते और इन्हें कमीशन लेकर साइबर ठगों को सौंप देते थे।
ऐसे बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट (Mule Account)’ कहा जाता है। इन खातों में ठगी की रकम पहले जमा कराई जाती है और फिर कई खातों में तेजी से ट्रांसफर करके उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती है। इसी वजह से पुलिस के लिए असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
पुलिस को क्या मिला?
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई बैंक खाते, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक और अन्य डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क से और कितने साइबर अपराध जुड़े हुए हैं। पुलिस अब धन के पूरे ट्रांजैक्शन ट्रेल (Money Trail) की भी जांच कर रही है।
पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहा है बड़ा अभियान
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष अभियान “ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)” का हिस्सा है। इस अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधियों, फर्जी बैंक खातों, सिम नेटवर्क और ऑनलाइन ठगी करने वाले संगठित गिरोहों पर एक साथ कार्रवाई करना है।
हाल के दिनों में आगरा, बाराबंकी, चंदौली, कानपुर और अन्य जिलों में भी करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क पकड़े गए हैं। कई मामलों में पुलिस ने बड़ी संख्या में म्यूल अकाउंट संचालकों और एजेंटों को गिरफ्तार किया है।
साइबर अपराध का बदलता तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार आजकल अधिकांश साइबर ठगी में अपराधी खुद अपने बैंक खाते इस्तेमाल नहीं करते। वे बेरोजगार युवाओं, छात्रों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर ले लेते हैं। बाद में इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध रकम इधर-उधर भेजी जाती है।
यही कारण है कि केवल बैंक खाता उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध माना जाता है और ऐसा करने वाले व्यक्ति पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अगर आपके खाते का गलत इस्तेमाल हो जाए तो क्या होगा?
यदि आपका बैंक खाता साइबर ठगी में इस्तेमाल होता है, तो—
- आपका बैंक खाता फ्रीज किया जा सकता है।
- पुलिस पूछताछ और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
- भविष्य में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
- यदि जानबूझकर खाता उपलब्ध कराया गया है, तो जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
- किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या सिम कार्ड कभी किराए पर न दें।
- बैंक खाते के बदले कमीशन या आसान कमाई का कोई भी प्रस्ताव स्वीकार न करें।
- अनजान लिंक, निवेश योजना, टेलीग्राम या व्हाट्सऐप ग्रुप पर भरोसा न करें।
- यदि साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में रकम फ्रीज कराई जा सकती है।
निष्कर्ष
प्रतापगढ़ में हुई यह कार्रवाई दिखाती है कि अब साइबर अपराध केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बैंक खातों, मोबाइल सिम और पैसों के लेन-देन का एक संगठित नेटवर्क काम करता है। ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामलों की कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक लोग अपने बैंक खाते और व्यक्तिगत दस्तावेज किसी दूसरे को देने से बचेंगे नहीं, तब तक ऐसे गिरोह नए तरीके खोजते रहेंगे।
