UP बना साइबर ठगों का सबसे बड़ा निशाना!
यूपी बना साइबर ठगी की राजधानी? सिर्फ 6 महीनों में 1.85 लाख शिकायतें, देशभर में ₹10,178 करोड़ की ऑनलाइन ठगी
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान जितनी तेजी से बढ़ रहा है, साइबर अपराध भी उसी रफ्तार से लोगों की मेहनत की कमाई पर हमला कर रहा है। गृह मंत्रालय के तहत हुई हालिया समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों (1 जनवरी से 30 जून) के दौरान देशभर में 12.71 लाख से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें लोगों ने ₹10,178 करोड़ से अधिक की ऑनलाइन ठगी की जानकारी दी। सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश से दर्ज की गईं।
उत्तर प्रदेश सबसे आगे, महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में केवल छह महीनों के भीतर करीब 1.85 लाख साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं। इसके बाद महाराष्ट्र (लगभग 1.58 लाख), कर्नाटक (1.21 लाख), गुजरात और बिहार का स्थान रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान, UPI के व्यापक उपयोग और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के कारण उत्तर प्रदेश साइबर अपराधियों के लिए बड़ा निशाना बन गया है।
किन तरीकों से हो रही है सबसे ज्यादा ठगी?
साइबर अपराधियों के तरीके पहले से कहीं अधिक आधुनिक और खतरनाक हो चुके हैं। सबसे अधिक मामले इन तरीकों से सामने आ रहे हैं—
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम
- फर्जी ट्रेडिंग और निवेश ऐप
- शेयर मार्केट में दोगुना मुनाफा देने का झांसा
- फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल
- KYC अपडेट और कार्ड ब्लॉक होने का डर
- UPI और QR Code स्कैम
- लोन ऐप और पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड
- सोशल मीडिया लिंक और फर्जी वेबसाइट
- AI से बनाई गई नकली आवाज (Voice Clone) और Deepfake वीडियो
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अब अपराधी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी पहचानना पहले से अधिक कठिन हो गया है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
गृह मंत्रालय के अधीन Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) लगातार राज्यों, बैंकों और डिजिटल भुगतान कंपनियों के साथ मिलकर कार्रवाई कर रहा है।
हाल के सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- हजारों संदिग्ध बैंक खाते और मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए हैं।
- लाखों फर्जी SIM और संदिग्ध डिजिटल पहचान पर कार्रवाई हुई है।
- साइबर फ्रॉड रोकने के लिए Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) का उपयोग किया जा रहा है।
- e-Zero FIR जैसी नई व्यवस्था लागू की जा रही है ताकि साइबर अपराध की शिकायत तुरंत दर्ज होकर जांच शुरू हो सके।
- अब तक ₹25,000 करोड़ से अधिक की संदिग्ध राशि बचाई जा चुकी है, जबकि पीड़ितों को ₹323 करोड़ से अधिक वापस दिलाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस भी चला रही है विशेष अभियान
साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाल ही में “ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)“ शुरू किया है। इस अभियान के दौरान साइबर गैंग, फर्जी बैंक खाते (Mule Accounts), फर्जी SIM नेटवर्क और ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोहों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, अब तक ₹530 करोड़ से अधिक की संदिग्ध राशि फ्रीज की जा चुकी है।
पैसा वापस क्यों नहीं मिल पाता?
साइबर अपराधी चोरी किए गए पैसे को कुछ ही मिनटों में कई बैंक खातों, ई-वॉलेट, क्रिप्टो प्लेटफॉर्म या म्यूल अकाउंट्स के जरिए अलग-अलग जगह भेज देते हैं। कई मामलों में पैसा विदेश तक पहुंच जाता है। इसलिए यदि पीड़ित तुरंत शिकायत नहीं करता, तो रकम वापस मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है।
अगर आपके साथ साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?
यदि किसी भी तरह का ऑनलाइन फ्रॉड हो—
- तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- अपने बैंक को तुरंत सूचित कर कार्ड या खाता ब्लॉक करवाएं।
- OTP, PIN, CVV या स्क्रीन शेयरिंग ऐप की अनुमति कभी किसी को न दें।
- चैट, कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें।
विशेषज्ञों की सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आज सबसे बड़ा बचाव जागरूकता है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश के लालच से बचें, और यदि कोई खुद को पुलिस, CBI, RBI या बैंक अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो पहले उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज होना केवल एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। डिजिटल भुगतान जितना सुविधाजनक है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। सरकार नई तकनीक और कानूनों के जरिए कार्रवाई तेज कर रही है, लेकिन साइबर अपराधियों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूक नागरिक और समय पर शिकायत दर्ज करना ही है।
