नोट दोगुने का लालच पड़ा भारी, लाखों गंवाकर ठगी का शिकार बने लोग।
हैदराबाद में ‘नोट दोगुने’ करने का झांसा देकर ₹20 लाख की ठगी, दो विदेशी नागरिक गिरफ्तार….
हैदराबाद पुलिस ने एक ऐसे ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को नोट दोगुने (Money Multiplication Scam) करने का लालच देकर लाखों रुपये ठग रहा था। इस मामले में पुलिस ने दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक कारोबारी से करीब ₹20 लाख की ठगी की। पुलिस ने उनके कब्जे से ₹10 लाख नकद, नकली भारतीय और अमेरिकी नोट, विशेष रसायन (केमिकल), काला कागज तथा ठगी में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया है।
कैसे करते थे ठगी?
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी पहले लोगों से दोस्ती करते थे और दावा करते थे कि उनके पास ऐसा खास केमिकल है जिससे असली नोटों को कुछ ही मिनटों में दोगुना किया जा सकता है।
विश्वास दिलाने के लिए वे पहले एक डेमो दिखाते थे। इस डेमो में हाथ की सफाई (Sleight of Hand), पहले से छिपाए गए असली नोट और नकली नोटों का इस्तेमाल कर ऐसा भ्रम पैदा किया जाता था कि मशीन या केमिकल की मदद से नोट बढ़ गए हैं।
जब पीड़ित को भरोसा हो जाता, तब उससे बड़ी रकम मांगी जाती।
इसके बाद आरोपी पैसे को एक बॉक्स में रखकर कहते थे कि “केमिकल की प्रक्रिया पूरी होने तक बॉक्स मत खोलना।” फिर वे मौके से फरार हो जाते थे।
जब पीड़ित बॉक्स खोलता, तब उसमें असली नोटों की जगह केवल सफेद कागज या रंगीन फोटो कॉपी पेपर मिलता था।
पुलिस ने कैसे पकड़ा?
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल सुरागों की मदद से दोनों आरोपियों का पता लगाया।
गिरफ्तार आरोपियों में एक पहले भी धोखाधड़ी, पासपोर्ट नियमों के उल्लंघन और अन्य मामलों में आरोपी रह चुका है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।
यह “मनी मल्टीप्लिकेशन स्कैम” क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई नई ठगी नहीं है। दुनिया के कई देशों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है—
- ब्लैक मनी वॉशिंग स्कैम
- केमिकल मनी स्कैम
- मनी डबलिंग फ्रॉड
- करेंसी मल्टीप्लिकेशन फ्रॉड
इन सभी में अपराधी विज्ञान, केमिकल या किसी गुप्त तकनीक का झूठा दावा करके लोगों को धोखा देते हैं। वास्तव में ऐसी कोई तकनीक मौजूद नहीं है जिससे असली भारतीय मुद्रा को रासायनिक प्रक्रिया से दोगुना बनाया जा सके।
लोगों को क्यों फंसना आसान लगता है?
ऐसे गिरोह मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं।
- पहले छोटी रकम पर नकली सफलता दिखाते हैं।
- पीड़ित का विश्वास जीतते हैं।
- जल्दी अमीर बनने का लालच देते हैं।
- गोपनीयता बनाए रखने को कहते हैं ताकि कोई सलाह न ले सके।
- बाद में बड़ी रकम लेकर गायब हो जाते हैं।
यही कारण है कि कई शिक्षित और व्यवसायी लोग भी इस तरह की ठगी का शिकार हो जाते हैं।
पुलिस की सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—
- कोई भी व्यक्ति यदि नोट दोगुने करने, काला धन साफ करने या किसी केमिकल से नकदी बढ़ाने का दावा करे तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
- ऐसे लोगों को कभी नकद राशि न दें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
- किसी भी निवेश या नकद लेन-देन से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।
इस घटना से क्या सीख मिलती है?
यह मामला बताता है कि ठग अब केवल ऑनलाइन ही नहीं बल्कि ऑफलाइन तरीकों से भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। अपराधी लालच, झूठे वैज्ञानिक दावों और नकली प्रदर्शन के जरिए विश्वास जीतते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति कम समय में बिना मेहनत पैसे दोगुने करने का दावा करे, तो समझ लें कि यह लगभग निश्चित रूप से एक धोखाधड़ी है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
