SD Pay scam: SD Pay और Apna Pay पर निवेश का लालच, पुलिस जांच में करोड़ों के ट्रांजैक्शन का बड़ा नेटवर्क सामने आया।
₹634 करोड़ का ट्रेल और ‘SD Pay’ ऐप का खेल: हाई रिटर्न के लालच में हजारों निवेशक, पुलिस ने 6 लोगों को पकड़ा…..
अमरेली: गुजरात के अमरेली जिले में एक कथित ऑनलाइन निवेश घोटाले की जांच ने बड़े वित्तीय नेटवर्क की ओर इशारा किया है। पुलिस के मुताबिक, ‘SD Pay’ या ‘Apna Pay’ ऐप से जुड़े आरोपियों और कंपनियों के बैंक खातों में करीब ₹634 करोड़ जमा होने का ट्रेल सामने आया है। इस मामले में अमरेली साइबर क्राइम पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आई ₹634 करोड़ की रकम को सीधे-सीधे ‘धोखाधड़ी की रकम’ मानना सही नहीं होगा। यह उन खातों में हुई कुल जमा/लेन-देन की रकम है, जिसकी भूमिका और स्रोत की जांच अभी जारी है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, Ashish Gedia, Bhavesh Chauhan, Nishi Prasad, Sohil Makwana, Niravkumar Patel और Suryasingh Rathod को गिरफ्तार किया गया है। जांच में करीब 30-35 बैंक खाते सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से जुड़े लोगों ने करीब 7 कंपनियां बनाई थीं और इनके नाम पर लगभग 15 बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों में कुल मिलाकर लगभग ₹634 करोड़ जमा होने की जानकारी मिली है।
मामले की शुरुआत अमरेली की रहने वाली Vanita Mahida की शिकायत से हुई। शिकायत के अनुसार उन्होंने दिसंबर 2025 में ऐप के माध्यम से करीब ₹10 लाख निवेश किए थे। उन्हें हर महीने 9% रिटर्न और अन्य फायदे देने का वादा किया गया था। शुरुआत में ऐप पर रिटर्न दिखाई देता था और रकम बैंक खाते में निकालने की सुविधा भी उपलब्ध थी। बाद में निकासी रुक गई।
जब निवेशकों ने पैसे निकालने की कोशिश की तो कथित तौर पर उन्हें ऐप के अपडेट होने जैसी वजहें बताई गईं। भुगतान दोबारा शुरू होने का इंतजार करते-करते शिकायतकर्ता पुलिस तक पहुंची।
रोज 0.15% रिटर्न का लालच
अमरेली के एसपी Sanjay Kharat के मुताबिक, निवेशकों को अलग-अलग रकम पर रोजाना करीब 0.15% रिटर्न देने का दावा किया जाता था।
अगर इसे साधारण भाषा में समझें तो:
- ₹1,000 से ₹15,000 तक के निवेश पर दैनिक रिटर्न का दावा
- करीब 4.5% मासिक रिटर्न का दावा
- यानी सालाना आधार पर 50% से ज्यादा रिटर्न
- ₹5 लाख के निवेश पर करीब 110% सालाना रिटर्न का कथित प्रचार
यहीं से यह मामला सामान्य निवेश योजना से हटकर गंभीर संदेह पैदा करता है। पुलिस को शक है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को वास्तविक कारोबारी गतिविधियों में लगाने के बजाय नए निवेशकों से आने वाले पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था। इसी वजह से जांच एजेंसियां इसे संभावित Ponzi/Pyramid Model के रूप में देख रही हैं।
Ponzi Scheme क्या होती है?
Ponzi Scheme में आम तौर पर असली कारोबार से पर्याप्त मुनाफा कमाकर निवेशकों को रिटर्न नहीं दिया जाता। इसके बजाय नए लोगों से आने वाले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान दिखाने के लिए किया जाता है।
इस तरह की व्यवस्था तब तक चल सकती है जब तक लगातार नए निवेशक और पैसा आते रहें। जैसे ही नए निवेशकों का प्रवाह कम होता है या बड़ी संख्या में लोग एक साथ पैसा निकालने लगते हैं, पूरा सिस्टम दबाव में आ जाता है।
SEBI भी निवेशकों को चेतावनी देता है कि बहुत ज्यादा या गारंटीड रिटर्न, लगातार एक जैसा मुनाफा, बिना पंजीकरण वाली निवेश योजनाएं और पैसे निकालने में परेशानी जैसे संकेत Ponzi Scheme के संभावित Red Flags हो सकते हैं।
ऐप सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं था
जांच के अनुसार, ‘SD Pay’ या ‘Apna Pay’ ऐप को सिर्फ निवेश प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश नहीं किया गया था। इसमें कथित तौर पर:
- मोबाइल रिचार्ज
- बिल भुगतान
- टिकट बुकिंग
- मनी ट्रांसफर
- निवेश योजनाएं
जैसी सुविधाएं भी थीं।
ऐसे कई फीचर एक ही ऐप में होने से प्लेटफॉर्म आम डिजिटल पेमेंट ऐप जैसा दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि किसी ऐप का payment या recharge feature होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसकी investment scheme भी वैध या regulated है।
कितने लोग जुड़े थे?
यहां जांच का सबसे महत्वपूर्ण और सावधानी से समझने वाला हिस्सा सामने आता है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार ऐप को गुजरात में करीब 10 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था, जबकि लगभग 3.5 लाख यूजर्स का डेटा पुलिस के पास पहुंच चुका है और उसकी जांच की जा रही है।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर 25 लाख से ज्यादा लोगों के ऐप से जुड़े होने की बात कही है। लेकिन यह संख्या अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं है। इसलिए इसे अंतिम ग्राहक संख्या मानना उचित नहीं होगा।
निवेशकों के बारे में पुलिस ने Ahmedabad, Gandhinagar, Surat, Mehsana, Himmatnagar, Valsad, Amreli और महाराष्ट्र के कुछ जिलों का उल्लेख किया है। इससे जांच का संभावित multi-state angle भी सामने आता है।
₹634 करोड़ बनाम वास्तविक कथित नुकसान—दोनों अलग हैं
यह अंतर समझना बहुत जरूरी है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों से जुड़े खातों में करीब ₹634 करोड़ जमा होने का ट्रेल मिला है। लेकिन अभी तक सामने आई 83 साइबर फ्रॉड शिकायतों के आधार पर कथित ठगी की रकम करीब ₹23 लाख बताई गई है, जबकि लगभग ₹76.84 लाख के लेन-देन विवादित हैं।
इसलिए फिलहाल यह कहना कि “₹634 करोड़ की ठगी हो गई”, उपलब्ध जांच के आधार पर सही निष्कर्ष नहीं होगा।
₹634 करोड़ का आंकड़ा मुख्य रूप से banking transaction/deposit trail से जुड़ा है। वास्तविक नुकसान, निवेशकों की कुल रकम, वैध लेन-देन और कथित अपराध से जुड़ी रकम की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। पुलिस ने भी संकेत दिया है कि शिकायतों की संख्या बढ़ने पर आंकड़े बदल सकते हैं।
2024 से चल रहा था नेटवर्क?
जांचकर्ताओं के मुताबिक ऐप करीब 2024 से सक्रिय था और प्लेटफॉर्म के माध्यम से रिटर्न का भुगतान मार्च 2026 में बंद हुआ।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने निवेश योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एजेंट्स नियुक्त किए और अलग-अलग स्थानों पर निवेश संबंधी बैठकें/सेमिनार भी किए।
यह मॉडल महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल डिजिटल विज्ञापन के बजाय मानवीय भरोसे का नेटवर्क भी बनाया गया। जब किसी व्यक्ति को उसके परिचित, एजेंट या स्थानीय प्रतिनिधि के माध्यम से निवेश का प्रस्ताव मिलता है तो वह ऑनलाइन विज्ञापन की तुलना में उसे अधिक विश्वसनीय मान सकता है।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
अमरेली साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 2 सितंबर को शिकायत दर्ज की गई। मामले में cheating, criminal conspiracy और abetment के साथ Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019, Gujarat Protection of Interests of Depositors Act, Prize Chits and Money Circulation Schemes (Banning) Act और Information Technology Act से जुड़े प्रावधान लगाए गए हैं।
भारत में Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019 का उद्देश्य अनियमित जमा योजनाओं पर रोक लगाना और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इस कानून में जांच, संपत्ति जब्ती और जमाकर्ताओं को रकम लौटाने से जुड़े प्रावधान भी हैं।
पुलिस की जांच अब किस दिशा में?
अमरेली पुलिस ने ASP Jayveer Gadhvi की अगुवाई में Special Investigation Team बनाई है।
जांच में मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं:
1. ₹634 करोड़ का वास्तविक स्रोत क्या था?
कितनी रकम वास्तविक ग्राहक लेन-देन से आई और कितनी रकम कथित निवेश योजना से जुड़ी थी।
2. पैसा कहां गया?
बैंक खातों से आगे रकम किन खातों, कंपनियों या व्यक्तियों तक पहुंची।
3. क्या वास्तविक कारोबार हुआ?
यदि निवेशकों को किसी कारोबार में पैसा लगाने का दावा किया गया था तो उस कारोबार में वास्तव में कितनी रकम लगी।
4. पुराने निवेशकों को भुगतान कैसे हुआ?
क्या रिटर्न वास्तविक मुनाफे से दिया गया या नए निवेशकों की रकम से।
5. नेटवर्क कितना बड़ा है?
एजेंट, प्रमोटर, कंपनी निदेशक और अन्य सहयोगियों की भूमिका क्या थी।
6. कितने निवेशक वास्तव में प्रभावित हुए?
डाउनलोड की संख्या और वास्तविक निवेशकों की संख्या एक जैसी नहीं होती। इसलिए पुलिस को transaction-level data की जांच करनी होगी।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक
इस मामले में सबसे बड़ा खतरा सिर्फ ऐप नहीं बल्कि असामान्य रिटर्न का लालच है।
अगर कोई व्यक्ति कहता है कि आपका पैसा लगभग बिना जोखिम के हर दिन या हर महीने निश्चित रूप से बढ़ेगा, तो सबसे पहले यह पूछना चाहिए कि:
पैसा कहां निवेश किया जा रहा है?
कौन नियामक है?
कंपनी का registration क्या है?
रिटर्न का स्रोत क्या है?
क्या पैसा कभी भी निकाला जा सकता है?
कंपनी का audited financial record कहां है?
RBI भी लोगों को सलाह देता है कि पैसा केवल ऐसे संस्थानों के साथ रखें जो संबंधित नियामक या सरकार के अधीन पंजीकृत/विनियमित हों और बहुत ज्यादा रिटर्न का लालच देने वाली योजनाओं से सावधान रहें।
निष्कर्ष
₹634 करोड़ का बैंकिंग ट्रेल इस मामले को गंभीर बनाता है, लेकिन यह रकम अपने आप में ₹634 करोड़ की सिद्ध ठगी नहीं है। अभी पुलिस को लेन-देन की पूरी कड़ी, निवेशकों की वास्तविक संख्या, कथित रिटर्न का स्रोत और आरोपियों की कंपनियों की भूमिका स्पष्ट करनी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामला एक ऐसे high-return digital investment network की ओर इशारा करता है, जिसमें पुलिस को Ponzi/Pyramid structure का शक है। छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, कुछ आरोपी अभी जांच के दायरे में हैं और पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित की है। आने वाले दिनों में bank trail और investor complaints इस मामले की वास्तविक वित्तीय तस्वीर स्पष्ट करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।
