Instagram gift scam: Instagram पर दोस्ती बनी जाल, विदेशी गिफ्ट का सपना दिखाकर महिला से ठग लिए ₹10.35 लाख!!
Instagram पर दोस्ती, फिर ‘विदेशी गिफ्ट’ का झांसा; लखनऊ की महिला से ₹10.35 लाख की साइबर ठगी…..
लखनऊ: सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति से हुई बातचीत कैसे बड़ी आर्थिक ठगी में बदल सकती है, इसका एक मामला लखनऊ में सामने आया है। एक महिला को Instagram पर विदेशी नागरिक बनकर संपर्क करने वाले ठग ने महंगे गिफ्ट भेजने का भरोसा दिया। इसके बाद कथित तौर पर एक दूसरे व्यक्ति ने खुद को कस्टम अधिकारी बताकर महिला से गिफ्ट पार्सल छुड़ाने के नाम पर अलग-अलग शुल्क जमा करने को कहा।
महिला को भरोसा दिलाया गया कि विदेश से आया पार्सल कस्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे मिल जाएगा। इसी भरोसे में उसने कई बार ऑनलाइन भुगतान किया और कुल मिलाकर करीब ₹10.35 लाख गंवा दिए। बाद में उसे समझ आया कि जिस गिफ्ट की बात की जा रही थी, वह असल में ठगी का हिस्सा था। मामले की जांच पुलिस कर रही है।
ठगी का तरीका कैसे काम करता है?
इस मामले में ठगों ने एक साथ कई स्तरों पर भरोसा बनाने की कोशिश की।
पहला चरण – Instagram पर संपर्क:
ठग ने सोशल मीडिया के जरिए महिला से संपर्क किया और खुद को विदेशी व्यक्ति के रूप में पेश किया।
दूसरा चरण – महंगे गिफ्ट का लालच:
बातचीत बढ़ने के बाद कथित तौर पर बताया गया कि महिला के लिए विदेश से महंगा गिफ्ट भेजा जा रहा है।
तीसरा चरण – नकली कस्टम अधिकारी:
इसके बाद दूसरे व्यक्ति ने कस्टम अधिकारी बनकर संपर्क किया और कस्टम ड्यूटी, टैक्स या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे मांगे।
चौथा चरण – बार-बार भुगतान:
एक भुगतान के बाद ठगी खत्म नहीं हुई। अलग-अलग शुल्क के नाम पर और रकम मांगी गई। महिला ने कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए और कुल नुकसान ₹10.35 लाख तक पहुंच गया।
असली खतरा ‘गिफ्ट’ नहीं, भरोसा था
इस तरह की ठगी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपराधी सीधे पैसे मांगने के बजाय पहले विश्वास का माहौल बनाते हैं। विदेशी पहचान, महंगा गिफ्ट, कस्टम अधिकारी और जरूरी शुल्क जैसी अलग-अलग कहानियां पीड़ित को यह महसूस करा सकती हैं कि सामने वाला व्यक्ति और पूरी प्रक्रिया वास्तविक है।
यही वजह है कि इसे केवल “ऑनलाइन गिफ्ट स्कैम” समझना पर्याप्त नहीं है। यह Social Engineering Fraud का उदाहरण भी है, जिसमें तकनीक से ज्यादा इंसानी भरोसे और भावनाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
I4C की चेतावनियों से क्या समझ आता है?
भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के National Cyber Crime Reporting Portal पर सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। पोर्टल नागरिकों को संदिग्ध फोन नंबर, ईमेल, वेबसाइट URL और सोशल मीडिया अकाउंट/URL की जानकारी रिपोर्ट करने की सुविधा भी देता है।
I4C की सलाह का मूल संदेश स्पष्ट है—किसी अनजान व्यक्ति की पहचान या उसके दावे पर भरोसा करके वित्तीय लेनदेन नहीं करना चाहिए। संदिग्ध संपर्क मिलने पर उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
‘कस्टम फीस’ मांगना क्यों बड़ा Red Flag है?
अगर कोई अनजान व्यक्ति सोशल मीडिया पर संपर्क करके विदेश से गिफ्ट भेजने की बात करे और बाद में कस्टम ड्यूटी, टैक्स, रिलीज चार्ज, क्लियरेंस फीस या अन्य शुल्क के नाम पर निजी खाते में पैसे भेजने को कहे, तो इसे गंभीर चेतावनी मानना चाहिए।
खास तौर पर तब जब:
- आपने खुद कोई गिफ्ट ऑर्डर नहीं किया हो।
- भेजने वाले व्यक्ति से वास्तविक जीवन में कोई परिचय न हो।
- भुगतान जल्दी करने का दबाव बनाया जाए।
- अलग-अलग कारण बताकर लगातार पैसे मांगे जाएं।
- कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर निजी खाते या UPI पर रकम भेजने को कहे।
- पार्सल की जानकारी केवल WhatsApp, Instagram या फोन कॉल के जरिए दी जा रही हो।
सिर्फ किसी का अधिकारी जैसा बोलना उसकी पहचान साबित नहीं करता।
इस मामले से आम लोगों को क्या सीखना चाहिए?
इस घटना का सबसे बड़ा सबक यह है कि सोशल मीडिया पर बनी पहचान को वास्तविक पहचान न मानें।
ठग अक्सर एक ही व्यक्ति की कहानी को विश्वसनीय बनाने के लिए कई किरदार इस्तेमाल कर सकते हैं—पहले विदेशी दोस्त, फिर कूरियर कर्मचारी और उसके बाद कस्टम अधिकारी। इससे पीड़ित को लगता है कि अलग-अलग लोग एक ही प्रक्रिया की पुष्टि कर रहे हैं, जबकि पूरा नेटवर्क एक ही ठगी का हिस्सा हो सकता है।
I4C के अनुसार साइबर अपराध होने पर 1930 हेल्पलाइन और National Cyber Crime Reporting Portal का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर पैसे चले गए हैं तो तुरंत क्या करें?
1. 1930 पर तुरंत कॉल करें।
वित्तीय साइबर फ्रॉड में समय बेहद महत्वपूर्ण है।
2. National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत करें।
सरकारी पोर्टल पर वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज की जा सकती है।
3. बैंक को तुरंत जानकारी दें।
जिस खाते/UPI/वॉलेट से पैसा गया है, वहां तत्काल फ्रॉड की सूचना दें।
4. सबूत सुरक्षित रखें।
I4C के अनुसार शिकायत के लिए बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन/UTR नंबर, ऑनलाइन भुगतान की रसीद, चैट, संदिग्ध मोबाइल नंबर, URL और सोशल मीडिया प्रोफाइल जैसी जानकारी उपयोगी हो सकती है।
5. ठग से दोबारा बातचीत में पैसा न भेजें।
कई मामलों में ठग “रिफंड”, “कानूनी कार्रवाई रोकने” या “पैसा वापस दिलाने” के नाम पर दूसरी बार भी रकम मांग सकते हैं।
निष्कर्ष
लखनऊ का यह मामला बताता है कि साइबर ठगी अब केवल OTP या बैंक लिंक तक सीमित नहीं रही। अपराधी पहले व्यक्ति से सोशल मीडिया पर संबंध बनाते हैं, फिर भरोसा पैदा करते हैं और अंत में उसी भरोसे को पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
इसलिए ऑनलाइन दुनिया में सबसे जरूरी सुरक्षा नियम है—अनजान व्यक्ति की कहानी पर नहीं, स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें। विदेश से आया कथित गिफ्ट हो या कस्टम अधिकारी का फोन, किसी भी भुगतान से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।
महत्वपूर्ण: अगर कोई व्यक्ति सिर्फ फोन, Instagram या WhatsApp के जरिए खुद को अधिकारी बताकर पैसे मांग रहा है, तो पहले रुकें, सत्यापन करें और जरूरत पड़ने पर 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करें।
