BITS Pilani में एडमिशन का भरोसा, फर्जी शिक्षक की मुलाकात और लाखों की मांग—लखनऊ में प्रोफेसर ठगी का शिकार हो गईं।
BITS Pilani में बेटे का एडमिशन दिलाने का झांसा, प्रोफेसर से ₹46 लाख की ठगी…..
लखनऊ में शिक्षा के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड
लखनऊ के मड़ियांव इलाके में रहने वाली एक प्रोफेसर कथित फर्जी एडमिशन कंसल्टेंसी के जाल में फंसकर ₹46 लाख गंवा बैठीं। आरोप है कि ठगों ने उनके बेटे का BITS Pilani में दाखिला कराने का भरोसा दिलाया और अलग-अलग चरणों में उनसे बड़ी रकम वसूली। जब दाखिला नहीं हुआ और कथित तौर पर फर्जी व्यक्ति को संस्थान का शिक्षक बताकर मिलवाया गया, तब मामले का खुलासा हुआ।
प्रोफेसर ने 22 अगस्त 2026 को लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, प्रोफेसर को सोशल मीडिया पर एक Education Consultancy का प्रचार दिखाई दिया। इसके बाद वह बताए गए पते पर पहुंचीं, जहां उनकी मुलाकात कथित तौर पर अनंत नाम के व्यक्ति से हुई।
अनंत ने खुद को एडमिशन से जुड़ी कंसल्टेंसी का प्रतिनिधि बताया और प्रोफेसर से उनके बेटे के मूल शैक्षणिक दस्तावेज लिए। इसके बाद उसने उनकी मुलाकात ध्रुव नाम के दूसरे व्यक्ति से कराई। दोनों ने कथित तौर पर BITS Pilani में दाखिले की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया।
इसके बाद ठगी का सिलसिला कई चरणों में आगे बढ़ा।
- 20 जून: कथित तौर पर ₹11 लाख की मांग की गई और रकम दी गई।
- इसके बाद दाखिला नहीं होने पर प्रोफेसर को अन्य कंसल्टेंसी के नाम बताए गए।
- 30 जुलाई तक: कथित तौर पर ₹35 लाख और लिए गए।
- कुल रकम करीब ₹46 लाख बताई गई है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब आरोपियों ने कथित तौर पर वीरेंद्र नाम के एक व्यक्ति से प्रोफेसर की मुलाकात कराई और उसे राजस्थान स्थित संस्थान का शिक्षक बताया। लेकिन जब प्रोफेसर ने संस्थान से इसकी पुष्टि की तो पता चला कि ऐसा व्यक्ति वहां काम नहीं करता था। इसके बाद उन्हें ठगी का शक हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
इस मामले में सबसे बड़ा रेड फ्लैग क्या था?
इस घटना को केवल एक सामान्य ऑनलाइन ठगी मानना सही नहीं होगा। यहां कथित ठगों ने विश्वास बनाने की कई परतें तैयार कीं।
पहला चरण — सोशल मीडिया विज्ञापन:
कंसल्टेंसी की मौजूदगी ने भरोसे का शुरुआती माहौल बनाया।
दूसरा चरण — आमने-सामने मुलाकात:
आरोपियों ने केवल फोन पर बात नहीं की, बल्कि कार्यालय/हेल्प डेस्क के जरिए खुद को वास्तविक एजेंसी जैसा दिखाने की कोशिश की।
तीसरा चरण — दस्तावेज लेना:
मूल दस्तावेज मांगना पीड़ित को यह विश्वास दिला सकता है कि प्रक्रिया वास्तविक है।
चौथा चरण — अलग-अलग लोगों की भूमिका:
एक व्यक्ति ने कंसल्टेंसी प्रतिनिधि, दूसरा वरिष्ठ अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति कथित तौर पर संस्थान के शिक्षक के रूप में भरोसा पैदा करने की कोशिश की।
पांचवां चरण — लगातार भुगतान:
पहली रकम देने के बाद जब दाखिला नहीं हुआ तो कथित तौर पर दूसरी कंसल्टेंसी के जरिए समाधान का भरोसा दिया गया और फिर बड़ी रकम ली गई।
यानी कथित ठगी का मॉडल “Trust → Documents → Small/Initial Payment → Delay → New Excuse → Larger Payment” जैसा दिखाई देता है। हालांकि इस पूरे पैटर्न की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
BITS Pilani ने खुद एडमिशन फ्रॉड को लेकर चेतावनी दी है
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि BITS Pilani की आधिकारिक एडमिशन वेबसाइट स्वयं छात्रों और अभिभावकों को फर्जी कॉल, ईमेल, SMS और सोशल मीडिया संदेशों से सावधान रहने को कहती है। संस्थान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सीधे एडमिशन का दावा करने वाले फर्जी लोगों के झांसे में न आएं और एडमिशन संबंधी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें।
BITS Pilani के 2026-27 के आधिकारिक एडमिशन दस्तावेज के अनुसार, उसके First Degree programmes में प्रवेश BITSAT आधारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। संस्थान ने यह भी कहा है कि कोई व्यक्ति, एजेंट या थर्ड पार्टी प्रवेश की गारंटी देने के लिए अधिकृत नहीं है।
यही इस मामले की सबसे बड़ी सीख है:
अगर कोई व्यक्ति कहे कि वह पैसे लेकर “सीधा एडमिशन”, “मैनेजमेंट कोटा”, “अंदर से सीट” या “गारंटीड सीट” दिला सकता है, तो बिना आधिकारिक पुष्टि के भुगतान करना बेहद जोखिम भरा है।
लखनऊ में यह अकेला एडमिशन फ्रॉड नहीं है
यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि लखनऊ में पहले भी फर्जी एडमिशन कंसल्टेंसी के मामले सामने आ चुके हैं।
नवंबर 2025 में पुलिस ने कथित तौर पर ऐसे दो लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन पर मेडिकल कॉलेज में MBBS और अन्य पाठ्यक्रमों में सीट दिलाने के नाम पर करीब ₹1 करोड़ की ठगी का आरोप था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी वेबसाइट, Instagram पेज, बैंक अकाउंट और कार्यालयों का इस्तेमाल करके कंसल्टेंसी को वास्तविक दिखाने की कोशिश की थी।
उस मामले में पुलिस ने बताया था कि आरोपियों ने NEET-qualified छात्रों का डेटा हासिल कर उनके परिवारों को मैनेजमेंट कोटा जैसी सीटों का लालच दिया। यह बताता है कि एडमिशन फ्रॉड में अब केवल फोन कॉल ही नहीं, बल्कि डेटा, सोशल मीडिया और नकली डिजिटल पहचान का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
माता-पिता इस जाल में क्यों फंसते हैं?
एडमिशन से जुड़े फ्रॉड में ठग अक्सर परिवार की सबसे बड़ी चिंता—बच्चे का भविष्य—को निशाना बनाते हैं।
जब किसी प्रतिष्ठित संस्थान में सीट मिलने की संभावना कम हो या परिवार समय के दबाव में हो, तब “सीट पक्की”, “अंदर से काम हो जाएगा” या “आज पैसे देने होंगे” जैसे दावे व्यक्ति की निर्णय क्षमता पर असर डाल सकते हैं।
इस तरह के मामलों में ठग तीन मनोवैज्ञानिक हथियार इस्तेमाल कर सकते हैं:
1. Authority का भ्रम:
खुद को कॉलेज अधिकारी, प्रोफेसर, एजेंट या वरिष्ठ कंसल्टेंट बताना।
2. Urgency:
“सीट अभी खाली है”, “आज भुगतान करना होगा” जैसी जल्दबाजी पैदा करना।
3. Social Proof:
कई लोगों, ऑफिस, वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट या कथित कॉलेज कर्मचारी का इस्तेमाल करके कहानी को वास्तविक दिखाना।
इसीलिए केवल ऑफिस, वेबसाइट या पहचान-पत्र देखकर किसी एजेंट को वास्तविक मान लेना पर्याप्त नहीं है।
अभिभावक एडमिशन फ्रॉड से कैसे बचें?
1. केवल आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करें
कॉलेज का URL खुद Google पर खोजकर आधिकारिक वेबसाइट से खोलें। WhatsApp या Instagram से भेजे गए लिंक पर तुरंत भरोसा न करें।
2. “Guaranteed Admission” को खतरे की घंटी समझें
प्रतिष्ठित संस्थान में कोई बाहरी व्यक्ति अगर सीट की गारंटी देता है, तो पहले संस्थान से सीधे पुष्टि करें।
3. मूल दस्तावेज किसी अनधिकृत एजेंट को न दें
आधिकारिक प्रक्रिया में दस्तावेज कहां और किस उद्देश्य से जमा करने हैं, इसकी पुष्टि संस्थान से करें।
4. फीस सीधे संस्थान को दें
किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते, UPI ID या नकद भुगतान की मांग होने पर अतिरिक्त सावधानी बरतें।
5. कर्मचारी की पहचान खुद सत्यापित करें
सिर्फ विजिटिंग कार्ड या WhatsApp प्रोफाइल पर्याप्त प्रमाण नहीं है। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट/फोन नंबर से कर्मचारी की पुष्टि करें।
6. ठगी हो जाए तो इंतजार न करें
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।
मामले में क्या-क्या स्थापित है?
- कथित नुकसान: ₹46 लाख।
- पीड़ित: लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र की प्रोफेसर डॉ. किरन चौबे।
- शिकायत/FIR: 22 अगस्त 2026 को साइबर क्राइम थाने में दर्ज।
- आरोप: बेटे के BITS Pilani में दाखिले का भरोसा देकर रकम लेने का।
- नामजद आरोपी: अनंत और ध्रुव।
- एक कथित शिक्षक की पहचान: पुलिस शिकायत के अनुसार संस्थान से सत्यापन करने पर वह वहां कार्यरत नहीं मिला।
- वर्तमान स्थिति: पुलिस ने FIR दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगी।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ ₹46 लाख की ठगी नहीं, बल्कि एडमिशन के नाम पर भरोसे को हथियार बनाकर की जाने वाली संगठित धोखाधड़ी की गंभीर चेतावनी है। सोशल मीडिया विज्ञापन, नकली कंसल्टेंसी, कथित कॉलेज कर्मचारी और बार-बार भुगतान मांगने का संयोजन किसी भी अभिभावक के लिए बड़ा Red Flag होना चाहिए।
सबसे सुरक्षित नियम सरल है—“कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि नहीं, तो भुगतान नहीं।”
BITS Pilani भी स्वयं छात्रों को ऐसे फर्जी सीधे एडमिशन के दावों से सावधान रहने की सलाह देता है।
