“चीनी सीमा पार से आए साइबर ठग: सावधान ”….
नई दिल्ली/तवांग: देश की राजधानी से करीब 2,500 किलोमीटर दूर, हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया है जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।दिल्ली पुलिस ने बेहद कठिन परिस्थितियों में एक बड़े साइबर ठग को पकड़ने में सफलता हासिल की है। यह गिरफ्तारी अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में चीन सीमा (LAC) के पास लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर की गई, जहां तापमान शून्य से नीचे था।
कैसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार आरोपी का नाम बाबीदुल खान उर्फ बॉबी है, जिसकी उम्र करीब 24 साल बताई जा रही है। वह कई साइबर ठगी मामलों में शामिल था और निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठग चुका था।
दिल्ली पुलिस की टीम 31 दिसंबर से ही उसके पीछे लगी हुई थी। बेहद ठंड, पहाड़ी रास्तों और खराब मौसम के बावजूद टीम ने तवांग के दुर्गम इलाकों में जाकर उसे गिरफ्तार किया। तवांग पुलिस स्टेशन चीन सीमा से लगभग 16 किमी दूर है, जिससे ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण बन गया था।
रिटायर्ड फौजी से ठगी ने खोला राज
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब दिल्ली के सागरपुर निवासी, भारतीय वायु सेना (IAF) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित को ‘स्टॉक मार्केट’ में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच दिया गया था। ठगों ने झांसा देकर उनसे 6.5 लाख रुपये हड़प लिए। जब पुलिस ने पैसों के लेन-देन (Money Trail) की जांच की, तो पता चला कि यह पैसा असम के एक बैंक खाते में गया है।
चीन बॉर्डर तक पीछा: एक फिल्मी पकड़
दिल्ली पुलिस की ‘साउथ-वेस्ट’ जिला साइबर टीम जब असम पहुंची, तो आरोपी वहां से भाग चुका था। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद ली और पता चला कि आरोपी अरुणाचल प्रदेश के तवांग में छिपा है।
- चुनौतियां: तवांग चीन की सीमा (LAC) के बेहद करीब है। वहां का तापमान -5°C से भी नीचे था और ऑक्सीजन की कमी के कारण चढ़ाई करना मुश्किल था।
- गिरफ्तारी: पुलिस टीम ने स्थानीय होटल और होमस्टे की तलाशी ली और आखिरकार उसे एक गुप्त ठिकाने से दबोच लिया।
इंटरनेशनल सिंडिकेट: चीन और कंबोडिया से जुड़े तार
पुलिस की गहन पूछताछ और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आरोपी महज एक मोहरा था। इसके पीछे एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा है:
- म्यूल बैंक अकाउंट्स: बबिदुल का काम गरीब और भोले-भाले लोगों के बैंक खाते किराए पर लेना या फर्जी दस्तावेज पर खाते खुलवाना था।
- क्रिप्टो का खेल: ठगी गई रकम को तुरंत USDT (डिजिटल डॉलर) में बदलकर विदेश, खासकर चीन और कंबोडिया के आकाओं को भेज दिया जाता था।
- 5 करोड़ का फ्रॉड: शुरुआती जांच में आरोपी के पास से 15 से अधिक ऐसे खातों का पता चला है, जिनमें पिछले कुछ महीनों में 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रांजेक्शन हुआ है।
- इन खातों के जरिए ठगी का पैसा इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था
- इससे पुलिस को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था
बताया गया है कि उसने कम से कम 15 लोगों से करोड़ों रुपये ठगे थे।
‘ऑपरेशन CyHawk’ क्या है
दिल्ली पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन CyHawk चला रही है। इसके तहत देशभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
कुछ अहम आंकड़े:
- फरवरी 2026 में ऑपरेशन CyHawk 3.0 के दौरान 955 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया
- 6–7 अप्रैल को CyHawk 4.0 में
- 8,371 संदिग्धों से पूछताछ
- 1,429 आरोपियों पर कार्रवाई की गई
क्यों बढ़ रहे हैं साइबर अपराध
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- ऑनलाइन निवेश और फर्जी ऐप्स के कारण ठगी तेजी से बढ़ रही है
- ठग अक्सर दूसरे राज्यों या दूरदराज इलाकों में छिप जाते हैं
- म्यूल अकाउंट और फर्जी सिम कार्ड से ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है
दिल्ली पुलिस की चेतावनी
इस सफल ऑपरेशन के बाद पुलिस ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है:
- व्हाट्सएप/टेलीग्राम ग्रुप: किसी भी अनजान ग्रुप में ‘ट्रेडिंग टिप्स’ के आधार पर पैसा न लगाएं।
- संदेहास्पद ऐप्स: प्ले स्टोर के बाहर से डाउनलोड किए गए किसी भी निवेश ऐप पर भरोसा न करें।
- तुरंत रिपोर्ट: अगर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो पहले 2 घंटे (Golden Hours) बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। तुरंत 1930 पर कॉल करें।
नोट: यह रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के साहस और साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल को दर्शाती है। पुलिस अब इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जो संभवतः भारत के बाहर से इस सिंडिकेट को चला रहे हैं।
