” SIM box fraud से भारत परेशान “,,,,
दिल्ली में इंटरनेशनल SIM बॉक्स फ्रॉड का बड़ा खुलासा
दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय “SIM बॉक्स” ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो विदेश में बैठे ठगों को भारत में लोगों को कॉल करके ठगी करने में मदद कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और IFSO यूनिट ने हाल ही में नोएडा, मेरठ और दिल्ली के कई इलाकों जैसे मयूर विहार इलाके में “ऑपरेशन CyHawk 4.0” के तहत पूर्वी दिल्ली में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय ‘सिम बॉक्स’ रैकेट चलाने वाले कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये जालसाज विदेशों (जैसे कंबोडिया, थाईलैंड और चीन) में बैठे मास्टरमाइंड के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बना रहे थे।
यानी ठग विदेश में बैठे होते थे, लेकिन कॉल भारत के नंबर से आती थी — जिससे लोग आसानी से भरोसा कर लेते थे।
‘सिम बॉक्स’ ठगी क्या है और यह कैसे काम करती है?
आम तौर पर जब विदेश से कोई फोन आता है, तो वह ‘इंटरनेशनल गेटवे‘ के जरिए आता है और मोबाइल स्क्रीन पर विदेशी नंबर दिखता है। लेकिन सिम बॉक्स फ्रॉड में:
- कॉल को डाइवर्ट करना: विदेशी कॉल को इंटरनेट (VoIP) के जरिए भारत में रखे एक ‘सिम बॉक्स’ डिवाइस पर भेजा जाता है।
- स्थानीय नंबर दिखाना: इस डिवाइस में सैकड़ों भारतीय सिम कार्ड लगे होते हैं। यह मशीन विदेशी कॉल को एक स्थानीय (Local) भारतीय नंबर में बदल देती है।
- पहचान छुपाना: जब आपके पास फोन आता है, तो आपको +91 से शुरू होने वाला भारतीय नंबर दिखता है, जिससे हम उसे असली समझ लेते हैं।
ठगी का तरीका ?
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस, CBI या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे।
फिर लोगों को डराया जाता था कि उनके खिलाफ फर्जी केस दर्ज है या वे किसी अपराध में फंस गए हैं।
इसके बाद उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर कहा जाता था कि:
- पैसे एक “RBI वेरिफिकेशन अकाउंट” में ट्रांसफर करें
- या निवेश के नाम पर पैसा लगाएं
इस तरह लोगों से बड़ी रकम ठगी जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी क्या करते थे?
गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
- वैभव राज (29 साल)
- अनिल कुमार (28 साल)
जांच में सामने आया:
- वैभव SIM बॉक्स और इंटरनेट सिस्टम संभालता था
- अनिल जगह, पैसे और SIM कार्ड की व्यवस्था करता था
- ठगों को कंप्यूटर और मोबाइल का रिमोट एक्सेस देने के लिए AnyDesk जैसे ऐप इस्तेमाल होते थे
यह देश के लिए खतरनाक क्यों है?
- सुरक्षा को खतरा: क्योंकि ये कॉल आधिकारिक गेटवे से नहीं गुजरते, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पातीं। अपराधी और आतंकी इसका इस्तेमाल अपनी पहचान छुपाने के लिए कर सकते हैं।
- वित्तीय धोखाधड़ी: इन नंबरों का उपयोग ‘डिजिटल अरेस्ट’, ‘केवाईसी अपडेट’ या ‘लॉटरी‘ के नाम पर लोगों को डराने और ठगने के लिए किया जाता है।
- राजस्व का नुकसान: इससे सरकार और टेलीकॉम कंपनियों को करोड़ों रुपये के टैक्स और इंटरनेशनल कॉल चार्ज का नुकसान होता है।
ताजा कार्रवाई में क्या मिला?
- पुलिस ने छापेमारी में सैकड़ों सिम कार्ड, कई सिम बॉक्स मशीनें, लैपटॉप और फर्जी दस्तावेजों पर खोली गई शेल कंपनियों के पेपर बरामद किए हैं।
- जांच में सामने आया है कि इन गिरोहों ने फर्जी आईडी का उपयोग करके हजारों सिम कार्ड एक्टिवेट कराए थे।
- हाल ही में मेरठ से गिरफ्तार किए गए दो आरोपी ऐसी ही एक कंपनी के डायरेक्टर थे, जिसने 100 से ज्यादा सिम कार्ड ‘कर्मचारियों के उपयोग’ के नाम पर लिए थे, लेकिन असल में उनका इस्तेमाल ठगी के लिए हो रहा था।
पुलिस को क्या-क्या मिला?
छापे में पुलिस ने बरामद किया:
- 32 स्लॉट वाला एक्टिव SIM बॉक्स
- 350 से ज्यादा SIM कार्ड
- कई मोबाइल फोन और लैपटॉप
- इंटरनेट राउटर और नेटवर्क उपकरण
- बैंक दस्तावेज और पार्सल
विदेश से जुड़े हैं तार
जांच में पता चला कि इस गिरोह के तार:
- मुंबई में बैठे हैंडलर्स
- और कंबोडिया समेत दक्षिण-पूर्व एशिया के साइबर ठग नेटवर्क से जुड़े हैं।
पुलिस अब पूरे नेटवर्क और पैसों की ट्रेल का पता लगा रही है।
SIM बॉक्स फ्रॉड क्या होता है? (अतिरिक्त जानकारी)
साइबर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार:
- SIM बॉक्स फ्रॉड का इस्तेमाल कॉल स्पूफिंग और OTP फ्रॉड में होता है
- इससे अंतरराष्ट्रीय कॉल लोकल कॉल में बदल जाती है
- इसलिए पुलिस और बैंक लगातार लोगों को अजनबी कॉल से सावधान रहने की सलाह देते हैं
भारत में हाल के समय में “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम तेजी से बढ़े हैं, जिनमें लोगों को वीडियो कॉल या फोन पर डराकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
पुलिस की सलाह
दिल्ली पुलिस ने लोगों से कहा है:
- कोई भी अधिकारी फोन पर पैसे नहीं मांगता
- “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती
- ऐसे कॉल आते ही तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें
