फर्जी कंपनियों का खेल बेनकाब, GST में हजारों करोड़ का ITC फ्रॉड पकड़ा गया।
GST में ₹74,782 करोड़ का बड़ा फर्जीवाड़ा! आखिर क्या है ITC फ्रॉड और सरकार क्यों हुई सख्त?
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद टैक्स व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक डिजिटल और पारदर्शी हुई है। लेकिन इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ संगठित गिरोह फर्जी कंपनियां बनाकर सरकार को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगा रहे हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में केंद्रीय GST अधिकारियों ने 30,162 मामलों में लगभग ₹74,782 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) फ्रॉड का पता लगाया। यह पिछले वर्ष की तुलना में मामलों और रकम—दोनों में बड़ी बढ़ोतरी है।
ITC क्या होता है?
Input Tax Credit (ITC) GST व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मान लीजिए किसी व्यापारी ने कच्चा माल खरीदते समय GST चुकाया। बाद में वही व्यापारी तैयार सामान बेचते समय जो GST सरकार को देगा, उसमें पहले से चुकाए गए GST की राशि घटा सकता है। इसी छूट को Input Tax Credit (ITC) कहा जाता है।
यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि एक ही वस्तु पर बार-बार टैक्स न लगे।
फिर ITC फ्रॉड कैसे होता है?
कुछ लोग इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाते हैं।
वे:
- कागजों पर फर्जी कंपनियां बनाते हैं।
- नकली GST नंबर हासिल करते हैं।
- बिना किसी वास्तविक सामान या सेवा की सप्लाई किए फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी करते हैं।
- उन्हीं नकली बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का ITC क्लेम कर लेते हैं।
- कई मामलों में शेल कंपनियों का पूरा नेटवर्क बनाकर एक-दूसरे को नकली बिल जारी किए जाते हैं, जिसे “सर्कुलर ट्रेडिंग” भी कहा जाता है।
असल में न सामान बिकता है और न सेवा दी जाती है, लेकिन कागजों में सब कुछ वैध दिखाया जाता है।
इस साल कितने बड़े स्तर पर पकड़ा गया फ्रॉड?
सरकार के अनुसार:
- FY26 में 30,162 ITC फ्रॉड के मामले पकड़े गए।
- इन मामलों की कुल राशि ₹74,782 करोड़ रही।
- कार्रवाई के दौरान 358 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
तुलना करें तो:
| वित्त वर्ष | मामले | फ्रॉड राशि |
|---|---|---|
| FY24 | 9,190 | ₹36,373 करोड़ |
| FY25 | 15,283 | ₹58,773 करोड़ |
| FY26 | 30,162 | ₹74,782 करोड़ |
इससे साफ है कि या तो ऐसे नेटवर्क बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं, या फिर सरकार की जांच और डेटा एनालिटिक्स पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो गई है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- गुजरात में सबसे अधिक 12,511 मामले दर्ज हुए।
- महाराष्ट्र में 9,629 मामले सामने आए, लेकिन फ्रॉड की रकम सबसे अधिक लगभग ₹18,320 करोड़ रही।
- दिल्ली में कम मामले होने के बावजूद बड़ी राशि का फर्जीवाड़ा सामने आया और सबसे अधिक गिरफ्तारियां भी यहीं दर्ज की गईं।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली?
जांच में कई उद्योग शामिल पाए गए, जैसे:
- आयरन और स्टील
- टेक्सटाइल
- प्लास्टिक
- पेपर उत्पाद
- प्लाईवुड
- सीमेंट
- कॉपर
- मैनपावर सप्लाई
- वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट
- रियल एस्टेट सेवाएं
इससे स्पष्ट है कि यह किसी एक उद्योग तक सीमित समस्या नहीं है।
फर्जी GST रजिस्ट्रेशन भी बड़ी समस्या
फर्जी ITC के लिए पहले नकली कंपनियां बनाई जाती हैं।
FY26 में:
- 1,517 फर्जी GST रजिस्ट्रेशन पकड़े गए।
- इनमें नकली PAN और Aadhaar का इस्तेमाल किया गया।
- इनसे जुड़े लगभग ₹9,940 करोड़ के ITC फ्रॉड का पता चला।
- 60 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
फर्जी ITC रोकने के लिए सरकार ने कई तकनीकी और प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं:
- Aadhaar आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन।
- Invoice Management System (IMS), जिससे खरीदार और विक्रेता के बिलों का मिलान आसान हो।
- GSTR-1 और GSTR-3B के बीच डेटा मिलान को अनिवार्य बनाया गया।
- पूरे देश में फर्जी GST रजिस्ट्रेशन के खिलाफ विशेष अभियान चलाए गए।
- डेटा एनालिटिक्स, Business Intelligence and Fraud Analytics (BIFA) और ADVAIT जैसे डिजिटल टूल्स से संदिग्ध लेनदेन की पहचान की जा रही है।
आम व्यापारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
यदि कोई व्यापारी अनजाने में भी किसी फर्जी सप्लायर से खरीदारी करता है, तो भविष्य में उसका ITC विवादित हो सकता है। इसलिए:
- केवल विश्वसनीय GST पंजीकृत सप्लायर से खरीद करें।
- GST पोर्टल पर सप्लायर का रजिस्ट्रेशन और रिटर्न नियमित रूप से जांचें।
- बिल, ई-वे बिल और भुगतान के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- अत्यधिक सस्ती या संदिग्ध डील से बचें।
विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
कर विशेषज्ञों का मानना है कि GST में ITC पूरी व्यवस्था की रीढ़ है। जब बिना वास्तविक कारोबार के फर्जी बिलों के आधार पर टैक्स क्रेडिट लिया जाता है, तो सरकार के राजस्व को भारी नुकसान होता है और ईमानदार कारोबारियों के लिए भी प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है। हाल के वर्षों में डेटा एनालिटिक्स, AI आधारित निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के कारण ऐसे नेटवर्क तेजी से पकड़े जा रहे हैं।
निष्कर्ष
₹74,782 करोड़ का यह ITC फ्रॉड दिखाता है कि फर्जी बिल, शेल कंपनियां और नकली GST रजिस्ट्रेशन आज भी टैक्स व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। हालांकि सरकार की डिजिटल निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, डेटा एनालिटिक्स और लगातार चल रही प्रवर्तन कार्रवाई के कारण ऐसे नेटवर्क पहले की तुलना में अधिक तेजी से सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में तकनीक आधारित निगरानी और सख्त कानूनी कार्रवाई इस तरह की टैक्स चोरी पर और प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकती है।
