बैंक कर्मचारी बनकर आया फोन, क्रेडिट कार्ड की बातों में फंसाया और आधे घंटे में 1.24 लाख रुपये गायब!
क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बनकर कॉल, आधे घंटे में युवक के खाते से 1.24 लाख रुपये साफ…..
यमुनानगर: साइबर ठगी करने वाले अब बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। यमुनानगर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक युवक को क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बनकर कॉल की गई और बातचीत के दौरान उसके खाते से 1.24 लाख रुपये निकाल लिए गए।
पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अनजान नंबर से आया था फोन
मामला मलिक रायपुर सनोड़ निवासी 27 वर्षीय हनी शर्मा से जुड़ा है। पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, 17 सितंबर 2026 की दोपहर उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया।
कॉल करने वाले ने खुद को एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताया। उसने क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी देने के नाम पर युवक से बातचीत शुरू की। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बातचीत के दौरान उसे इस तरह उलझाए रखा कि उसे ठगी का अंदाजा नहीं हो सका।
पुलिस के मुताबिक, करीब आधे घंटे के भीतर 1.24 लाख रुपये खाते से निकल गए। जब मोबाइल पर रकम कटने का संदेश आया, तब युवक को पता चला कि उसके साथ वित्तीय धोखाधड़ी हो चुकी है।
इसके बाद उसने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की।
पुलिस खंगाल रही मोबाइल नंबर और पैसों का ट्रेल
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी रविंद्र कुमार के अनुसार, जांच टीम आरोपी के मोबाइल नंबर और जिस बैंक खाते में रकम गई, उससे संबंधित लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।
यानी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि रकम किस खाते में पहुंची और उसके बाद उसका इस्तेमाल या ट्रांसफर कहां किया गया। इसी वित्तीय ट्रेल और तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
यह ठगी किस तरीके से होती है?
इस तरह की घटना को आम तौर पर Vishing (वॉइस फिशिंग) के दायरे में समझा जा सकता है। इसमें ठग फोन के जरिए खुद को बैंक कर्मचारी, कंपनी प्रतिनिधि या किसी भरोसेमंद संस्था का अधिकारी बताकर सामने वाले से संवेदनशील जानकारी हासिल करने या उसे किसी कार्रवाई के लिए तैयार करने की कोशिश करते हैं।
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार, vishing में फोन कॉल के जरिए Customer ID, नेट बैंकिंग पासवर्ड, ATM PIN, OTP, कार्ड की जानकारी, CVV या कार्ड की दूसरी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। पोर्टल क्रेडिट/डेबिट कार्ड से जुड़ी अनधिकृत गतिविधियों को भी साइबर अपराध की श्रेणी में बताता है।
बैंक कर्मचारी बनकर फोन आए तो क्या करें?
RBI की उपभोक्ता जागरूकता सलाह के अनुसार, बैंक या वित्तीय संस्थान के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल में विशेष सावधानी जरूरी है। RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग से जुड़े धोखेबाज खुद को बैंककर्मी या दूसरे संस्थानों का प्रतिनिधि बताकर लोगों से पासवर्ड, OTP, PIN, CVV और कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी मांग सकते हैं।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति फोन पर कहे कि—
- आपका क्रेडिट कार्ड बंद होने वाला है,
- कार्ड में कोई समस्या है,
- KYC अपडेट करना जरूरी है,
- कार्ड की लिमिट बढ़ानी है,
- रिफंड या रिवॉर्ड के लिए जानकारी चाहिए,
तो फोन पर जल्दबाजी में कोई गोपनीय जानकारी साझा न करें।
कॉल करने वाले की पहचान पर भरोसा करने के बजाय बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या कार्ड के पीछे दिए गए आधिकारिक नंबर से खुद संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।
सबसे महत्वपूर्ण बात: OTP और CVV साझा न करें
RBI की सलाह के मुताबिक बैंक, RBI या कोई वास्तविक संस्था ग्राहक से OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए नहीं कहती। संदिग्ध व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करना या अनजान ऐप इंस्टॉल करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
इस मामले में पुलिस जांच अभी जारी है। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि युवक से वास्तव में कौन-सी जानकारी हासिल की गई या रकम किस तकनीकी तरीके से निकाली गई। इसका स्पष्ट पता पुलिस की जांच और transaction trail से चलेगा।
आम लोगों के लिए सबक
इस घटना का सबसे बड़ा संदेश यही है कि फोन करने वाले की पहचान ही उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं है। साइबर ठग बैंक, पुलिस, सरकारी विभाग या किसी बड़ी कंपनी के नाम का इस्तेमाल करके भरोसा पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।
अगर खाते से अनधिकृत रकम निकलती है तो समय बर्बाद किए बिना बैंक को सूचना देने और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। शुरुआती समय में की गई सूचना जांच एजेंसियों के लिए पैसे के लेन-देन के रास्ते को ट्रैक करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
निष्कर्ष: यमुनानगर की यह घटना दिखाती है कि Bank Impersonation + Vishing जैसे तरीके अब भी वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी देने के बजाय कॉल काटकर बैंक से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना सबसे सुरक्षित कदम है।
