Facebook पर मिला विदेश जाने का मौका बना मुसीबत, नकली वीजा एजेंटों ने युवक को ₹1.5 लाख का चूना लगाया।
फेसबुक पर दिखा विदेश नौकरी का सपना, ₹1.5 लाख गंवा बैठा युवक; फर्जी वीजा एजेंटों ने ऐसे बनाया शिकार…..
मंगलुरु: विदेश में नौकरी पाने की उम्मीद एक व्यक्ति को महंगी पड़ गई। फर्जी वीजा दिलाने का दावा करने वाले लोगों ने उससे ₹1.5 लाख ठग लिए। आरोपी कथित तौर पर सोशल मीडिया पर दिखाए गए एक विज्ञापन के जरिए पीड़ित तक पहुंचे थे।
मामला तब सामने आया जब पीड़ित ने विदेश में काम करने के लिए फेसबुक पर दिखाई गई एक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन किया। इसके बाद 20 जून को उसे फोन आया। फोन करने वालों ने खुद को चेन्नई का विष्णुमणि और श्रीनिवासन बताया और दावा किया कि वे ₹1.5 लाख में विदेश का वीजा दिला सकते हैं।
पीड़ित उनके झांसे में आ गया। उसने 2 जुलाई को अपनी बेटी के बैंक खाते से Google Pay के जरिए ₹75,000 एक ऐसे बैंक खाते में भेजे, जो वृष्णकुप्पा आरती के नाम पर था। इसके बाद उसने अपने दामाद के खाते से दूसरी किस्त के रूप में ₹75,000 एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए। इस तरह कुल रकम ₹1.5 लाख पहुंच गई।
लेकिन पैसे मिलने के बाद कथित एजेंटों ने न तो वीजा उपलब्ध कराया और न ही पीड़ित के फोन का जवाब दिया। इसके बाद उसे समझ आया कि वह Visa Fraud का शिकार हो चुका है।
शिकायत के आधार पर ब्रह्मावर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66(C) और 66(D) के तहत केस दर्ज किया है। ये धाराएं क्रमशः पहचान संबंधी धोखाधड़ी और कंप्यूटर/कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए धोखाधड़ी से जुड़ी हैं।
इस मामले में ठगी का तरीका क्या था?
इस घटना में ठगों ने एक सामान्य लेकिन तेजी से बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पैटर्न का इस्तेमाल किया—
सोशल मीडिया विज्ञापन → विदेश जाने की इच्छा → फोन कॉल → भरोसा पैदा करना → बैंक खाते में भुगतान → संपर्क बंद
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़ित ने शुरुआत में किसी अनजान व्यक्ति को सीधे पैसा नहीं भेजा था। वह पहले फेसबुक विज्ञापन और वेबसाइट के संपर्क में आया। यानी सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला विज्ञापन अपने-आप में किसी एजेंसी की विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।
MEA पहले भी दे चुका है ऐसी ठगी को लेकर चेतावनी
भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) लंबे समय से विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सावधान करता रहा है। मंत्रालय के अनुसार, विदेश में रोजगार तलाशने वालों को केवल Registered Recruiting Agents के माध्यम से ही आगे बढ़ना चाहिए और एजेंट की वैधता की जांच किए बिना पैसे, पासपोर्ट या शैक्षणिक दस्तावेज नहीं सौंपने चाहिए।
MEA ने यह भी बताया है कि फर्जी विदेशी नौकरी के मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता रहा है। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ऐसे संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर से सावधान रहने की सलाह दी है।
विदेश मंत्रालय के एक हालिया संसदीय जवाब के अनुसार, फरवरी 2025 तक 3,281 अवैध भर्ती एजेंटों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा चुकी थी और फर्जी नौकरी ऑफर तथा अवैध भर्ती एजेंसियों से संबंधित चेतावनियां eMigrate पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
विशेषज्ञ नजरिए से सबसे बड़ा सबक
इस मामले में केवल ₹1.5 लाख की आर्थिक ठगी नहीं हुई, बल्कि Verification Failure भी सामने आया। विदेश जाने की जल्दी और आकर्षक नौकरी/वीजा के वादे अक्सर लोगों को जल्द भुगतान करने के लिए प्रेरित करते हैं।
किसी भी विदेशी नौकरी या वीजा ऑफर में कम से कम इन चीजों की स्वतंत्र जांच जरूरी है:
- एजेंसी Registered Recruiting Agent है या नहीं।
- वास्तविक विदेशी नियोक्ता कौन है।
- नौकरी का Employment Contract मौजूद है या नहीं।
- वीजा किस देश और किस श्रेणी का है।
- भुगतान किस आधिकारिक संस्था के नाम पर किया जा रहा है।
- एजेंट की वेबसाइट, फोन नंबर और सोशल मीडिया प्रोफाइल वास्तविक हैं या नहीं।
- भुगतान से पहले लिखित रसीद और दस्तावेज मिल रहे हैं या नहीं।
MEA की आधिकारिक सलाह के मुताबिक, नौकरी और नियोक्ता की वास्तविकता सुनिश्चित किए बिना एजेंट को पैसा, पासपोर्ट या जरूरी प्रमाणपत्र नहीं देना चाहिए। मंत्रालय यह भी कहता है कि भुगतान की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए।
क्या करें अगर ऐसा फ्रॉड हो जाए?
अगर किसी व्यक्ति से ऑनलाइन विदेश नौकरी या वीजा के नाम पर पैसा ठग लिया गया है, तो उसे तुरंत बैंक/पेमेंट सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए और उपलब्ध डिजिटल लेनदेन की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। साथ ही 1930 राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था के माध्यम से शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
सबसे जरूरी नियम:
पहले Verification, फिर Payment।
विदेश में नौकरी का ऑफर कितना भी आकर्षक क्यों न हो, केवल फेसबुक विज्ञापन, WhatsApp चैट, फोन कॉल या किसी एजेंट के दावे को वास्तविक वीजा या नौकरी का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
