ठगी की रकम को USDT में बदलकर विदेश भेजने का आरोप, झांसी में साइबर नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा शिकंजा।
झांसी में 403 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, 6 गिरफ्तार; USDT के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम…..
उत्तर प्रदेश के झांसी में साइबर ठगी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में देशभर की 325 से अधिक साइबर शिकायतों से जुड़े लेनदेन की पड़ताल के दौरान करीब ₹403 करोड़ का मनी ट्रेल सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क ठगी से हासिल रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय पहले 56 म्यूल बैंक अकाउंट्स (Mule Accounts) में घुमाता था। इसके बाद रकम को USDT यानी Tether क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था और कथित तौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया में मौजूद विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाया जाता था। इस तरीके का उद्देश्य रकम को जल्दी-जल्दी अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर कर फ्रीज होने और असली लाभार्थियों तक पुलिस के पहुंचने की संभावना कम करना था।
गिरोह कैसे काम करता था?
पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों को उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करने के बदले आकर्षक कमीशन या आर्थिक लाभ का लालच देते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था।
इसके बाद रकम को कई खातों के बीच घुमाकर क्रिप्टो एसेट USDT में कन्वर्ट किया जाता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह का कथित सरगना दीपक वर्मा उर्फ सत्याम U-MONEY ऐप के जरिए इन म्यूल अकाउंट्स तक पहुंच रखता था।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 500 USDT, सात मोबाइल फोन और लेनदेन से संबंधित रजिस्टर बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की उम्र करीब 23 से 25 वर्ष बताई गई है और इनमें कुछ आरोपी छात्र भी हैं।
56 खातों में ₹403 करोड़ का ट्रेल क्यों महत्वपूर्ण है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—₹403 करोड़ का मनी ट्रेल सामने आना और ₹403 करोड़ की ठगी साबित होना एक ही बात नहीं है।
पुलिस की मौजूदा जांच में ₹403 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। अब जांच एजेंसियों को यह निर्धारित करना होगा कि इसमें से कितनी रकम सीधे पीड़ितों से ठगी गई, कितनी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हुई और कितनी रकम दूसरे अपराधियों या विदेशी नेटवर्क तक पहुंची। इसी कारण इसे फिलहाल ₹403 करोड़ का साइबर फ्रॉड मनी ट्रेल कहना अधिक सटीक है।
Chinese gaming apps और विदेशी कनेक्शन
पुलिस ने बताया कि गिरोह कथित तौर पर Chinese gaming apps के जरिए देशभर में लोगों को निशाना बनाने वाले साइबर नेटवर्क से जुड़ा था। जांच में विदेशी हैंडलर्स की भूमिका भी सामने आई है। हालांकि, विदेशी नेटवर्क में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और उनकी वास्तविक भूमिका की पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है।
चार-पांच साल से चल रहा था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क कथित तौर पर पिछले चार से पांच वर्षों से सक्रिय था। इसका मतलब है कि यह कोई अचानक बनाया गया छोटा गिरोह नहीं, बल्कि बैंक खातों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्रिप्टो कन्वर्जन और विदेशी संपर्कों की कई परतों वाला नेटवर्क हो सकता है।
कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक वर्मा उर्फ सत्याम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जनपाल, अभिषेक चौधरी और आर्चित अग्रवाल के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक तीन अन्य आरोपी—अरमान, अर्श शेख और मोहम्मद फैज—अभी फरार हैं।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2), 318(4) और 317(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब फरार आरोपियों के साथ-साथ नेटवर्क के अन्य सदस्यों और अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।
इस केस से क्या बड़ी तस्वीर सामने आती है?
झांसी का यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। पहले साइबर ठगी में अपराधी सीधे पीड़ित के खाते से पैसा निकालने पर निर्भर रहते थे। अब कई नेटवर्क म्यूल अकाउंट → कई लेनदेन → क्रिप्टोकरेंसी → विदेशी हैंडलर जैसी बहुस्तरीय व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस मॉडल में सबसे कमजोर कड़ी अक्सर म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति होता है। कई लोग कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, SIM या डिजिटल बैंकिंग सुविधा दूसरे लोगों को उपलब्ध करा देते हैं, लेकिन बाद में वही खाता साइबर अपराध की जांच में महत्वपूर्ण सबूत बन सकता है।
झांसी मामले में 56 बैंक खातों और ₹403 करोड़ के ट्रेल का सामने आना दिखाता है कि बैंकिंग सिस्टम, क्रिप्टोकरेंसी और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच अब साइबर अपराध की जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है। देश के दूसरे हिस्सों में भी हाल के दिनों में बड़े साइबर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जो संगठित डिजिटल अपराध के बढ़ते पैमाने की ओर संकेत करती है।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी सबक
- अपना बैंक अकाउंट किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
- कमीशन के बदले अकाउंट उपलब्ध कराने का ऑफर म्यूल अकाउंट नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
- अनजान gaming apps, investment platforms और APK files से सावधान रहें।
- बैंक खाते में अचानक आने-जाने वाले बड़े लेनदेन को नजरअंदाज न करें।
- किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की स्थिति में तुरंत अपने बैंक और संबंधित साइबर अपराध प्राधिकरण को सूचना दें।
- OTP न देने के बावजूद भी फ्रॉड संभव है, इसलिए केवल OTP को सुरक्षा की अंतिम दीवार न मानें।
निष्कर्ष: उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्टों के अनुसार झांसी पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और करीब ₹403 करोड़ का संदिग्ध मनी ट्रेल ट्रेस किया है। यह आंकड़ा जांच में मिले लेनदेन का मूल्य है; इसे अभी अदालत द्वारा सिद्ध ₹403 करोड़ की ठगी मानना उचित नहीं होगा। मामले की जांच जारी है और विदेशी हैंडलर्स तथा फरार आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
