शेयर बाजार में बड़े मुनाफे का सपना दिखाकर ठगों ने बुजुर्ग एक्सपोर्टर से 23.79 लाख रुपये ऐंठ लिए।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ शेयर बाजार का जाल, 73 वर्षीय कारोबारी से 23.79 लाख रुपये की ठगी…..
गुजरात के भावनगर में एक 73 वर्षीय सेवानिवृत्त एक्सपोर्टर कथित ऑनलाइन शेयर मार्केट इन्वेस्टमेंट स्कैम का शिकार हो गए। आरोप है कि ठगों ने उन्हें फेसबुक विज्ञापन, WhatsApp ग्रुप और फर्जी निवेश ऐप के जरिए भरोसे में लिया और करीब 23.79 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
पीड़ित प्रदीप दोशी ने भावनगर साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, पूरा मामला 8 जुलाई से शुरू हुआ और करीब एक महीने तक चलता रहा।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
8 जुलाई को दोशी की नजर फेसबुक पर एक निवेश विज्ञापन पर पड़ी। विज्ञापन में ‘Finsol Security Pvt Ltd’ के नाम से निवेश के अवसर बताए गए थे।
विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उनकी WhatsApp पर एक महिला से बातचीत हुई, जिसने अपना नाम अनन्या कुलकर्णी बताया। कथित तौर पर महिला ने उन्हें ‘Sarathi Plan’ के बारे में बताया और दावा किया कि IPO तथा Mutual Funds में निवेश करके अच्छा रिटर्न कमाया जा सकता है।
इसके बाद उन्हें एक बाहरी लिंक के जरिए ‘Finsol’ नाम का ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। रजिस्ट्रेशन के दौरान उनसे PAN Card की जानकारी भी अपलोड कराई गई।
दोशी ने शुरुआत में Google Pay के जरिए 50,000 रुपये भेजे। इसके बाद उन्हें ‘A-809 Elite Circle’ नाम के WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां रोजाना शेयर बाजार से जुड़े कथित टिप्स दिए जाते थे।
फर्जी ऐप ने दिखाया बढ़ता हुआ मुनाफा
ठगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यहीं सामने आया।
आरोप के अनुसार, Finsol ऐप पर शेयर खरीदने-बेचने की नकली गतिविधियां दिखाई जाती थीं। ऐप में निवेश का मूल्य लगातार बढ़ता हुआ नजर आया। इससे पीड़ित को लगा कि उनका निवेश वास्तव में मुनाफा कमा रहा है।
8 जुलाई से 7 अगस्त के बीच उन्होंने कुल 11 अलग-अलग लेनदेन में 23.79 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
कुछ समय बाद ऐप में उनका निवेश और कथित मुनाफा बढ़कर करीब 72 लाख रुपये दिखने लगा।
यही वह चरण था जहां कथित ठगी का मनोवैज्ञानिक मॉडल काम करता दिखाई देता है—पहले छोटा निवेश, फिर स्क्रीन पर बढ़ता मुनाफा और उसके बाद ज्यादा रकम लगाने के लिए भरोसा पैदा करना।
पैसा निकालने की कोशिश की तो सामने आया असली खेल
जब दोशी ने ऐप में दिखाई जा रही करीब 72 लाख रुपये की रकम निकालने की कोशिश की तो पैसे नहीं निकले।
उन्होंने कथित तौर पर WhatsApp संपर्क से इस बारे में सवाल किया। जवाब में बताया गया कि उनका अकाउंट ब्लॉक हो गया है और उसे दोबारा सक्रिय कराने के लिए और पैसे देने होंगे।
इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस निवेश प्लेटफॉर्म पर उन्होंने भरोसा किया था, वह कथित तौर पर वास्तविक निवेश प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि फर्जी निवेश नेटवर्क हो सकता है।
उन्होंने अपने बेटे को घटना की जानकारी दी और 31 अगस्त को National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई।
इस फ्रॉड में ठगों ने कौन-सी तकनीक अपनाई?
यह मामला सिर्फ एक फर्जी ऐप का नहीं है। इसमें ठगों ने कई स्तरों पर Social Engineering + Fake Investment Platform + WhatsApp Manipulation का इस्तेमाल किया।
1. Facebook Advertisement — पहला संपर्क
सोशल मीडिया पर निवेश से जुड़े आकर्षक विज्ञापन को शुरुआती प्रवेश बिंदु बनाया गया। इससे ठगों को ऐसे लोगों तक पहुंचने का मौका मिलता है जो पहले से निवेश में रुचि रखते हैं।
2. WhatsApp — भरोसा बनाने का माध्यम
पीड़ित को सीधे पैसे भेजने के लिए कहने के बजाय पहले बातचीत की गई और फिर एक कथित निवेश योजना तथा WhatsApp ग्रुप से जोड़ा गया।
3. Fake App — नकली मुनाफे का भ्रम
फर्जी ऐप में कथित शेयर खरीद-बिक्री और बढ़ते पोर्टफोलियो को दिखाना इस तरह की ठगी का बेहद खतरनाक हिस्सा है।
स्क्रीन पर दिखता मुनाफा हमेशा वास्तविक मुनाफा नहीं होता।
यदि रकम किसी वैध ब्रोकर खाते में नहीं है और उसे स्वतंत्र रूप से निकाला नहीं जा सकता, तो ऐप में दिखाई गई वैल्यू सिर्फ एक डिजिटल संख्या हो सकती है।
4. IPO का नाम लेकर विश्वसनीयता
IPO और Mutual Funds जैसे वास्तविक वित्तीय उत्पादों का नाम इस्तेमाल करने से योजना सामान्य निवेश अवसर जैसी दिखाई दे सकती है।
यही कारण है कि किसी भी निवेश प्रस्ताव को केवल उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए IPO, SEBI, Broker या Mutual Fund जैसे शब्दों से वैध नहीं मानना चाहिए।
5. Withdrawal Block — आखिरी जाल
ठगों ने कथित मुनाफा दिखाने के बाद निकासी रोक दी और फिर अकाउंट सक्रिय करने के नाम पर अतिरिक्त पैसा मांगा।
यह एक बड़ा Red Flag है।
निवेश का पैसा निकालने के लिए अलग से ‘unlock fee’, ‘activation charge’, ‘tax’, ‘security deposit’ या ‘verification payment’ मांगा जाना गंभीर चेतावनी संकेत है।
आम लोगों के लिए 7 बड़े सबक
1. Facebook/Instagram विज्ञापन देखकर सीधे निवेश न करें।
2. WhatsApp या Telegram पर मिले शेयर टिप्स को निवेश सलाह न मानें।
3. किसी अज्ञात लिंक से Investment App डाउनलोड न करें।
4. PAN, Aadhaar, बैंकिंग या अन्य निजी जानकारी किसी संदिग्ध प्लेटफॉर्म पर अपलोड न करें।
5. ऐप में दिखाई गई Profit Value को वास्तविक पैसा न समझें।
6. पैसे निकालने के लिए अतिरिक्त रकम मांगी जाए तो तुरंत रुक जाएं।
7. निवेश करने से पहले ब्रोकर/संस्था की वैधता स्वतंत्र आधिकारिक स्रोत से जांचें।
अगर पैसे चले गए हैं तो क्या करें?
ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज समय है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए और National Cyber Crime Reporting Portal पर रिपोर्ट करनी चाहिए। सरकारी साइबर क्राइम पोर्टल के अनुसार वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है।
National Cyber Crime Reporting Portal
शिकायत करते समय Transaction ID/UTR, बैंक या वॉलेट की जानकारी, तारीख, रकम और उपलब्ध स्क्रीनशॉट/चैट जैसे सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी है। पोर्टल भी वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए इन विवरणों और संबंधित साक्ष्यों को तैयार रखने को कहता है।
निष्कर्ष
भावनगर का यह मामला दिखाता है कि आधुनिक Investment Scam में ठग केवल फोन कॉल करके पैसा नहीं मांगते। वे सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरुआत करके WhatsApp पर भरोसा बनाते हैं, फर्जी ऐप में मुनाफा दिखाते हैं और फिर पीड़ित को ज्यादा रकम लगाने के लिए प्रेरित करते हैं।
इसलिए शेयर बाजार में निवेश का सबसे महत्वपूर्ण नियम है—“मुनाफे के वादे से पहले प्लेटफॉर्म की सच्चाई जांचें।”
यह मामला पुलिस शिकायत पर आधारित है; आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
