“Explosives Licence Scam”: CBI के रडार पर PESO के बड़े अधिकारी, रिश्वत लेकर बांटे गए लाइसेंस!
“Explosives Licence Scam”: CBI के रडार पर PESO के बड़े अधिकारी, रिश्वत लेकर बांटे गए लाइसेंस!
देश में विस्फोटकों और पेट्रोलियम सुरक्षा की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में घिर गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने PESO के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने रिश्वत लेकर विस्फोटक लाइसेंस जारी किए, नवीनीकरण कराया और निरीक्षण रिपोर्टों में भी अनियमितताएं कीं।
क्या है पूरा मामला?
CBI ने तीन अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। जांच में सामने आया है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी, बिचौलियों और निजी कंपनियों के साथ मिलकर एक संगठित नेटवर्क चला रहे थे। यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और लाइसेंस जारी करने के बदले नकद, सोना, बैंक ट्रांसफर और यहां तक कि यात्रा खर्च तक रिश्वत के रूप में लिया जाता था।
किन अधिकारियों पर लगे आरोप?
CBI की FIR में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं:
- ज्योतिर्मय सरकार – तत्कालीन डिप्टी चीफ कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स
- सुसांत कुमार भोले – कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स
- जय नंदन मिश्रा – डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स
इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने गैस टैंकर, पेट्रोल पंप और अन्य विस्फोटक गतिविधियों से जुड़े लाइसेंसों को मंजूरी देने के बदले अवैध लाभ लिया।
बिचौलियों की अहम भूमिका….
जांच में एक व्यक्ति, पेंड्याला वराह नरसिम्हा मूर्ति, का नाम बार-बार सामने आया है। CBI का आरोप है कि वह अधिकारियों और लाइसेंस आवेदकों के बीच बिचौलिए का काम करता था और रिश्वत की रकम पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
बैंक खातों के जरिए रिश्वत
CBI के मुताबिक, कुछ मामलों में रिश्वत की रकम अधिकारियों के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में भेजी गई। एक मामले में 2024 के दौरान लगभग ₹4.4 लाख बैंक ट्रांसफर के जरिए पहुंचाए गए। इसके अलावा एयर कंडीशनर खरीदने के लिए भी कथित तौर पर ₹40,000 का भुगतान कराया गया।
129 लाइसेंस मामलों में कथित गड़बड़ी
एक अन्य FIR में आरोप है कि एक अधिकारी ने करीब 129 लाइसेंस-संबंधी मामलों में पक्षपात किया और इसके बदले लगभग ₹12.8 लाख की अवैध रकम प्राप्त की। रिश्वत नकद, सोने और डिजिटल भुगतान के जरिए ली गई।
PESO क्या करता है और मामला इतना गंभीर क्यों है?
PESO देश में विस्फोटकों, पेट्रोलियम उत्पादों, गैस सिलेंडरों और खतरनाक रसायनों से जुड़े लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की निगरानी करता है। यदि इस संस्था में भ्रष्टाचार होता है, तो इसका सीधा असर सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि गलत तरीके से जारी लाइसेंस भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब PESO के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जनवरी 2024 में भी CBI ने दो वरिष्ठ PESO अधिकारियों को ₹10 लाख की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय जांच में करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे।
आगे क्या?
CBI अब बैंक खातों, संपत्तियों, डिजिटल लेनदेन और लाइसेंस मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह नेटवर्क कितने वर्षों से चल रहा था और इसमें कितने अधिकारी तथा निजी कंपनियां शामिल थीं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह घोटाला केवल रिश्वतखोरी का मामला नहीं है। यह उन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है, जिन पर देश की औद्योगिक और सार्वजनिक सुरक्षा की जिम्मेदारी है। यदि विस्फोटकों और खतरनाक पदार्थों से जुड़े लाइसेंस पैसे के दम पर दिए जाने लगें, तो इसका खतरा पूरे समाज को उठाना पड़ सकता है।
