ठाणे में साइबर ठगी का बड़ा खेल, बैंक खाते बने अपराधियों की ढाल और करोड़ों हुए ट्रांसफर
ठाणे में ₹57.25 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा: ‘म्यूल अकाउंट’ सप्लाई करने वाले 6 गिरफ्तार….
साइबर ठगी के मामलों में सिर्फ ठग ही नहीं, बल्कि उनके लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पुलिस ने ऐसे ही एक कथित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में करीब ₹57.25 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे, जिनका इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने, रखने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। ऐसे खातों को आम तौर पर Mule Accounts यानी म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
जांच में सामने आया कि इन खातों से जुड़े लेनदेन का संबंध 96 साइबर क्राइम शिकायतों से पाया गया है। शिकायतें महाराष्ट्र के अलावा दिल्ली, पंजाब और ओडिशा समेत कई राज्यों से जुड़ी बताई गई हैं।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 155 ATM कार्ड, 105 पासबुक और चेकबुक, 29 मोबाइल फोन, 23 SIM कार्ड, तीन लैपटॉप और नकदी समेत कई सामान जब्त किए हैं। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और कार्ड मिलने से जांच एजेंसियों को शक है कि नेटवर्क केवल कुछ खातों तक सीमित नहीं हो सकता।
‘म्यूल अकाउंट’ आखिर होता क्या है?
सरल भाषा में समझें तो म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति के अवैध पैसे को घुमाने के लिए किया जाता है।
साइबर ठग सीधे अपने खाते में ठगी की रकम मंगाने से बचते हैं। इसके बजाय वे दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।
आम तौर पर पैसा इस तरह घूम सकता है:
पीड़ित → म्यूल अकाउंट → कई बैंक खाते → अन्य चैनल/क्रिप्टो या कैश
इस प्रक्रिया से असली ठग तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो जाता है।
देश के दूसरे हिस्सों में हुई जांचों से भी पता चला है कि म्यूल अकाउंट नेटवर्क साइबर फ्रॉड की Money Laundering Chain का अहम हिस्सा बन चुका है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2026 में एक अलग मामले में 248 कॉरपोरेट खातों के जरिए ₹70 करोड़ से अधिक की रकम रूट किए जाने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया था।
ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग कनेक्शन भी जांच के घेरे में
ठाणे पुलिस कुछ लेनदेन का संबंध अवैध ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म से भी जोड़कर जांच कर रही है। हालांकि, इन लेनदेन की पूरी प्रकृति और नेटवर्क में अन्य आरोपियों की भूमिका अभी जांच का विषय है।
यानी ₹57.25 करोड़ को सीधे छह गिरफ्तार आरोपियों की व्यक्तिगत ठगी की रकम मानना सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह उनके जरिए इस्तेमाल हुए खातों में सामने आए संदिग्ध लेनदेन का कुल मूल्य है। अंतिम जिम्मेदारी और रकम का वास्तविक स्रोत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
155 ATM कार्ड मिलने का क्या मतलब?
जांच में बरामद 155 ATM कार्ड और 105 पासबुक/चेकबुक इस केस का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- कितने बैंक खाते वास्तव में नेटवर्क के नियंत्रण में थे?
- खाते किन लोगों के नाम पर खोले गए?
- ATM कार्ड और बैंक दस्तावेज किसके पास रहते थे?
- इन खातों को चलाने वाले लोग कौन थे?
- प्रत्येक खाते से कितनी रकम गुजरी?
- क्या गिरफ्तार आरोपी सिर्फ खाते उपलब्ध करा रहे थे या ठगी की रकम को आगे पहुंचाने में भी शामिल थे?
मोबाइल फोन और SIM कार्ड की जांच से कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश भी की जा रही है।
असली खतरा सिर्फ साइबर ठग नहीं
इस मामले का सबसे बड़ा सबक यह है कि साइबर फ्रॉड का पूरा कारोबार एक सप्लाई चेन की तरह काम कर सकता है।
एक तरफ ठग पीड़ित को निशाना बनाता है। दूसरी तरफ कोई व्यक्ति बैंक खाता उपलब्ध कराता है। फिर दूसरे लोग पैसे को अलग-अलग खातों में भेज सकते हैं और कुछ मामलों में रकम को कैश या डिजिटल एसेट में बदलने की कोशिश हो सकती है।
यही वजह है कि पुलिस अब सिर्फ “किसने ठगी की?” नहीं देख रही, बल्कि यह भी पता लगा रही है कि “ठगी का पैसा किस-किस रास्ते से गुजरा?”
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी चेतावनी
किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक अकाउंट, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक, UPI PIN, नेट बैंकिंग लॉगिन या SIM किसी दूसरे को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए।
“खाता दो और कमीशन लो” जैसी पेशकश आसान कमाई लग सकती है, लेकिन यदि उसी खाते में साइबर ठगी की रकम आती है तो खाता धारक भी पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है।
पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस ने ऐसे नेटवर्क पकड़े हैं जहां लोगों को कुछ हजार रुपये के कमीशन के बदले बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया गया।
निष्कर्ष
ठाणे का यह मामला दिखाता है कि आधुनिक साइबर अपराध में बैंक अकाउंट खुद अपराध का हथियार बन सकते हैं। ₹57.25 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन और बड़ी संख्या में ATM कार्ड व बैंक दस्तावेज मिलने के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण Money Trail को ट्रैक करना है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन खातों के पीछे मौजूद मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं, पैसा आखिर कहां पहुंचा और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। जांच आगे बढ़ने पर नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
