UAE भागा करोड़ों का आरोपी, आखिर CBI के शिकंजे में आ ही गया।
सीबीआई की बड़ी सफलता: यूएई से भारत लाया गया ₹125 करोड़ निवेश घोटाले का मुख्य आरोपी, अब होगी धन की पूरी जांच…
भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फरार आर्थिक अपराध के आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय (MHA), इंटरपोल और यूएई की एजेंसियों के सहयोग से की गई। आरोपी को 23 जुलाई को मुंबई लाया गया, जहां महाराष्ट्र पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों के अनुसार अविनाश अर्जुन राठौड़ ने वर्ष 2011 में APS Wealth Ventures नाम की निवेश कंपनी शुरू की थी। कंपनी ने लोगों को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर हर महीने तय और ऊंचे रिटर्न का लालच दिया। कई निवेशकों से यह भी कहा गया कि उनका पैसा लगभग 20 महीनों में दोगुना हो जाएगा।
शुरुआत में कुछ निवेशकों को समय पर पैसा लौटाया गया ताकि लोगों का भरोसा बढ़े। इसके बाद बड़ी संख्या में नए निवेशकों ने अपनी जीवनभर की बचत, रिटायरमेंट फंड और अन्य रकम इस योजना में लगा दी। बाद में जब लोगों ने अपना पैसा वापस मांगा तो कंपनी ने अलग-अलग बहाने बनाना शुरू कर दिया।
मार्च 2023 के बाद भुगतान लगभग बंद हो गया। निवेशकों को कुछ समय और इंतजार करने के लिए कहा गया, लेकिन तय तारीख आने पर अविनाश राठौड़ और उसकी पत्नी कथित रूप से देश छोड़कर दुबई भाग गए। इसके बाद बड़ी संख्या में पीड़ितों ने पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई।
कितने लोगों को हुआ नुकसान?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि:
- 600 से अधिक निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए गए।
- अब तक लगभग ₹125 करोड़ की धोखाधड़ी का अनुमान लगाया गया है।
- जांच एजेंसियों का मानना है कि कई वर्षों में कुल रकम ₹700 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
आरोपी भारत कैसे लाया गया?
आरोपी के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था। इसके बाद इंटरपोल के माध्यम से उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया गया। रेड नोटिस का मतलब यह नहीं होता कि व्यक्ति स्वतः दोषी है, बल्कि सदस्य देशों को उसकी पहचान कर हिरासत में लेने और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग देने का अनुरोध किया जाता है।
सीबीआई ने विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और यूएई की संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को भारत लाया गया, जहां उसे महाराष्ट्र पुलिस को सौंप दिया गया।
आगे जांच में क्या होगा?
अब जांच एजेंसियां कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करेंगी—
- निवेशकों से जुटाए गए पैसों का पूरा वित्तीय ट्रेल।
- किन-किन बैंक और डीमैट खातों का इस्तेमाल किया गया।
- क्या इस घोटाले में अन्य सहयोगी या फर्जी कंपनियां भी शामिल थीं।
- विदेशों में भेजी गई संपत्तियों और धन का पता लगाना।
- पीड़ित निवेशकों की रकम की अधिकतम वसूली की संभावनाएं।
आम लोगों के लिए क्या सीख?
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करते समय केवल ऊंचे रिटर्न का लालच देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए।
- “गारंटीड” या “फिक्स्ड हाई रिटर्न” का दावा करने वाली योजनाओं से सावधान रहें।
- किसी भी निवेश कंपनी का पंजीकरण और नियामकीय स्थिति जांचें।
- बिना पर्याप्त दस्तावेज और पारदर्शिता वाली योजनाओं में बड़ी रकम निवेश न करें।
- यदि कोई कंपनी नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान कर रही हो, तो यह पोंजी स्कीम का संकेत हो सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
हाल के वर्षों में भारत आर्थिक अपराधियों को विदेशों से वापस लाने के लिए इंटरपोल और अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। यह मामला दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए विदेश भागे आरोपियों को भी भारतीय कानून के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
