RTO कर्मचारी बनकर पहले दस्तावेज लिए, फिर अलग-अलग फीस के बहाने महिला के खाते से ₹76,654 निकाल लिए।
कार रजिस्ट्रेशन के नाम पर बड़ा साइबर खेल: फर्जी RTO अधिकारी बनकर महिला से ₹76,654 ठगे….
पंचकूला: ऑनलाइन कार रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश एक महिला को भारी पड़ गई। साइबर ठगों ने खुद को RTO अधिकारी बताकर पहले उनसे कार से जुड़े दस्तावेज WhatsApp पर मंगवाए और फिर अलग-अलग सरकारी शुल्क के नाम पर कुल ₹76,654 ट्रांसफर करा लिए। जब पैसे लेने के बाद भी रजिस्ट्रेशन की रसीद नहीं मिली और आरोपी लगातार बहाने बनाने लगे, तब महिला को ठगी का शक हुआ।
मामला पंचकूला से सामने आया है और साइबर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पीड़िता अपनी Audi Q5 को हरियाणा में रजिस्टर कराने की प्रक्रिया जानने के लिए ऑनलाइन जानकारी तलाश रही थीं। इसी दौरान कथित ठगों ने उनसे संपर्क किया।
पहले भरोसा जीता, फिर दस्तावेज मांगे
पीड़िता के अनुसार, फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को RTO कर्मचारी बताया। उसने कार के RC, NOC, आधार कार्ड, इंश्योरेंस और फोटो जैसे दस्तावेज WhatsApp के जरिए भेजने को कहा। सरकारी अधिकारी होने का दावा किए जाने के कारण महिला ने ये जानकारी साझा कर दी।
इसके बाद कथित आरोपी ने प्रोसेसिंग फीस के नाम पर एक QR कोड भेजा और महिला से ₹5,000 जमा करवाए। यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू हुआ।
कुछ समय बाद एक महिला ने फोन कर खुद को RTO अधिकारी बताया। इसके बाद कार के रजिस्ट्रेशन और लग्जरी वाहन की फीस जैसे अलग-अलग कारण बताते हुए और रकम मांगी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, महिला से पहले ₹48,952 और फिर ₹22,702 जमा करवाए गए। पहले किए गए ₹5,000 भुगतान को जोड़ने पर कुल रकम ₹76,654 हो गई।
रसीद नहीं मिली तो खुला शक
पैसे जमा कराने के बाद भी महिला को कार रजिस्ट्रेशन की कोई वैध रसीद नहीं मिली। कथित आरोपियों ने सर्वर में तकनीकी समस्या होने की बात कहकर मामले को टालना शुरू कर दिया।
जब लगातार देरी होने लगी तो महिला को संदेह हुआ कि वह किसी सरकारी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि साइबर ठगों के जाल में फंस चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने 12 और 15 सितंबर को साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस अब उन फोन नंबरों, डिजिटल भुगतान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल कथित ठगी में हुआ।
असली खतरा सिर्फ पैसे का नहीं, दस्तावेजों का भी है
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल ₹76,654 की आर्थिक ठगी नहीं है। कथित ठगों ने महिला से RC, NOC, आधार, इंश्योरेंस और फोटो जैसे संवेदनशील दस्तावेज भी WhatsApp पर मंगवाए।
यानी ऐसे मामलों में अपराधी सिर्फ तत्काल पैसे ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान और वाहन संबंधी जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। यही जानकारी आगे किसी दूसरे साइबर अपराध, फर्जी पहचान या अन्य धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने का जोखिम पैदा करती है।
इसलिए किसी अनजान व्यक्ति को WhatsApp पर Aadhaar, RC, PAN, बैंक दस्तावेज, OTP या अन्य निजी जानकारी भेजना जोखिम भरा हो सकता है, भले ही वह व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी क्यों न बताए।
असली वाहन सेवा कहां मिलती है?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। भारत सरकार का VAHAN 4.0 पोर्टल वाहन संबंधी कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। आधिकारिक पोर्टल पर RC से जुड़ी सेवाएं, वाहन संबंधी आवेदन, फीस भुगतान, दस्तावेज अपलोड, आवेदन की स्थिति और रसीद दोबारा निकालने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
VAHAN पोर्टल पर हरियाणा भी उपलब्ध राज्यों में शामिल है। आधिकारिक जानकारी यह भी बताती है कि कुछ सेवाओं में ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज जमा करने के बाद, सेवा के प्रकार के अनुसार RTO में सत्यापन या वाहन प्रस्तुत करना जरूरी हो सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि ऑनलाइन वाहन सेवा के दौरान कोई भुगतान नहीं होता। ऑनलाइन सरकारी शुल्क वास्तविक हो सकता है, लेकिन भुगतान हमेशा आधिकारिक पोर्टल या निर्धारित सरकारी प्रक्रिया से ही करना चाहिए। किसी अनजान फोन कॉल, WhatsApp चैट या निजी QR कोड पर पैसा भेजना अलग बात है।
इस ठगी से क्या समझना चाहिए?
इस घटना में साइबर ठगों ने कथित तौर पर एक ऐसी स्थिति का फायदा उठाया, जिसमें व्यक्ति खुद सरकारी प्रक्रिया की जानकारी खोज रहा था। यही साइबर अपराध का एक आम तरीका है—पीड़ित की जरूरत को समझना, सरकारी कर्मचारी की पहचान बनाना, दस्तावेज हासिल करना और फिर अलग-अलग शुल्क के नाम पर छोटी-बड़ी रकम मांगते जाना।
पहले ₹5,000, फिर ₹48,952 और उसके बाद ₹22,702 जैसी किस्तों में भुगतान करवाना भी पीड़ित पर अचानक बहुत बड़ी रकम का दबाव डालने के बजाय उसे लगातार भरोसे में रखने की रणनीति हो सकती है। हालांकि, इस मामले में आरोपियों की मंशा और पूरी कार्यप्रणाली का अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
आम वाहन मालिकों के लिए 6 जरूरी सावधानियां
- RTO कर्मचारी के फोन पर तुरंत भरोसा न करें।
- वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए आधिकारिक VAHAN/Parivahan पोर्टल का इस्तेमाल करें।
- WhatsApp पर मिले किसी अज्ञात QR कोड से सरकारी फीस का भुगतान न करें।
- RC, Aadhaar, PAN, NOC और इंश्योरेंस जैसे दस्तावेज अनजान नंबर पर न भेजें।
- किसी भी भुगतान से पहले फीस और आवेदन की जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर खुद सत्यापित करें।
- ठगी होने पर तुरंत बैंक/पेमेंट सर्विस को सूचित करें और 1930 साइबर हेल्पलाइन तथा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
पंचकूला का यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग अब केवल बैंक या UPI के नाम पर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि वाहन रजिस्ट्रेशन जैसी सरकारी सेवाओं की जरूरत को भी ठगी का जरिया बना रहे हैं।
सबसे बड़ा सबक यही है कि सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी सत्यापन से ऊपर नहीं है। सरकारी सेवा से जुड़ा कोई काम हो तो फोन पर मिले निर्देशों के बजाय संबंधित विभाग के आधिकारिक पोर्टल और हेल्पलाइन से जानकारी की पुष्टि करना ज्यादा सुरक्षित है।
इस मामले में ₹76,654 की रकम गंवाने के साथ महिला के संवेदनशील वाहन और पहचान संबंधी दस्तावेज भी कथित ठगों तक पहुंचे। इसलिए ऐसी ठगी में नुकसान केवल बैंक खाते से निकली रकम तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए।
