“साइबर अपराधियों की नई स्क्रिप्ट—’आपको फसा देंगे’!”
“मंत्री बनाने” के नाम पर विधायक से करोड़ों की रिश्वत मांगने की कोशिश, साइबर पुलिस ने शुरू की जांच
केरल में एक बेहद चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इस बार ठगों ने किसी आम नागरिक को नहीं, बल्कि विधायक (MLA) को ही अपना निशाना बनाने की कोशिश की।
एलाथुर विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायक विद्या बालकृष्णन को एक व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा बताया और दावा किया कि जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल होने वाला है। उसने विधायक से कहा कि यदि वे बड़ी रकम देने को तैयार हों तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है।
हालांकि विधायक ने कॉल करने वाले की बातों पर भरोसा नहीं किया। उन्हें तुरंत शक हुआ कि यह कोई संगठित ठगी का प्रयास है। उन्होंने बिना देर किए पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दी और इसके बाद कोझिकोड साइबर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत मिलते ही साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब कॉल के स्रोत, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप अकाउंट, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
आखिर ठगों का मकसद क्या था?
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी किसी प्रभावशाली व्यक्ति का विश्वास जीतकर पहले “गोपनीय” राजनीतिक जानकारी देने का दावा करते हैं। इसके बाद वे रिश्वत, पार्टी फंड, सुरक्षा जमा या अन्य किसी बहाने से बड़ी रकम मांगते हैं। कई मामलों में वे नकली पहचान, फर्जी दस्तावेज और इंटरनेट आधारित कॉलिंग तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी असली पहचान छिपी रहे।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे राजनीतिक साइबर फ्रॉड?
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जहां अपराधी खुद को—
- वरिष्ठ सरकारी अधिकारी,
- मंत्री कार्यालय,
- राजनीतिक दल के नेता,
- जांच एजेंसी,
- बैंक अधिकारी,
- या न्यायपालिका से जुड़ा व्यक्ति बताकर लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं।
अब साइबर अपराधी केवल आम जनता ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों, उद्योगपतियों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बना रहे हैं। इसका उद्देश्य या तो पैसा वसूलना होता है या संवेदनशील जानकारी हासिल करना।
पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?
साइबर पुलिस निम्न बिंदुओं की जांच कर रही है—
- कॉल किस देश या राज्य से की गई?
- व्हाट्सऐप नंबर किस पहचान पर लिया गया?
- क्या फर्जी सिम या वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल हुआ?
- क्या इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है?
- क्या अन्य नेताओं को भी इसी तरह के कॉल किए गए हैं?
यदि जांच में यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा पाया जाता है तो कई राज्यों की एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं।
आम लोगों के लिए बड़ा सबक
यह घटना बताती है कि आज साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को नौकरी, सरकारी पद, राजनीतिक लाभ, ठेका, पुरस्कार या प्रमोशन दिलाने के बदले पैसे मांगे जाएं, तो उसे तुरंत संदेह करना चाहिए।
खुद को ऐसे बचाएं
- किसी भी अनजान कॉल या व्हाट्सऐप संदेश पर तुरंत भरोसा न करें।
- यदि कोई प्रभावशाली व्यक्ति बनकर पैसे मांगे तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
- व्हाट्सऐप प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर किसी की पहचान तय न करें।
- किसी भी परिस्थिति में बिना सत्यापन के पैसा ट्रांसफर न करें।
- संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
एलाथुर विधायक के साथ हुई यह घटना दिखाती है कि साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। पहले जहां वे बैंक, केवाईसी या डिजिटल अरेस्ट जैसे बहाने अपनाते थे, वहीं अब राजनीतिक नियुक्ति और मंत्री पद जैसी संवेदनशील बातों का सहारा लेकर लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। समय रहते शिकायत दर्ज होने से पुलिस को जांच शुरू करने का मौका मिला है। यदि आरोपी पकड़े जाते हैं तो यह पता चल सकेगा कि क्या यह केवल एक कॉल था या देशभर में सक्रिय किसी बड़े साइबर गिरोह की नई रणनीति।
