एयरलाइन में नौकरी का सपना दिखाकर ठगों ने युवाओं से हजारों रुपये ऐंठे, छह गिरफ्तार
फर्जी एयरलाइन नौकरी रैकेट का पर्दाफाश: नोएडा से 6 गिरफ्तार, सोशल मीडिया विज्ञापनों से युवाओं को बनाया निशाना…..
24 अगस्त 2026: नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर ठगी करने वाले एक फर्जी एयरलाइन जॉब रैकेट का दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कथित मास्टरमाइंड, उसका सहयोगी, एक वेबसाइट डेवलपर और तीन टेली-कॉलर शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया विज्ञापनों और फर्जी वेबसाइटों के जरिए बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे।
कैसे चलता था पूरा फर्जीवाड़ा?
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी “Bretish Airways” और “Future Wings Learning Institute” के नाम से फर्जी संस्थाएं चला रहे थे। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर युवाओं को Indira Gandhi International Airport (IGI), दिल्ली में नौकरी का झांसा दिया जाता था।
पीड़ितों से कहा जाता था कि एयरपोर्ट की नौकरी पाने के लिए पहले Airport/Aviation Management Diploma करना जरूरी है। इसके नाम पर उनसे करीब ₹7,000 से ₹10,000 तक की रजिस्ट्रेशन या एडमिशन फीस मांगी जाती थी। पैसे मिलने के बाद आरोपियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी एडमिशन स्लिप, NOC, सर्टिफिकेट और जॉब ऑफर लेटर भेजे जाते थे।
एक पीड़ित से ऐसे हुई ठगी
पुलिस के अनुसार मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने 10 जून को Instagram पर “Bretish Airways” का नौकरी संबंधी विज्ञापन देखा। उसने विज्ञापन के जरिए अपनी जानकारी साझा की।
इसके बाद उसे एक महिला ने संपर्क किया और खुद को “Karishma, HR Bretish Airways” बताया। कथित HR ने पीड़ित से Aadhaar Card, PAN Card, मार्कशीट और CV जैसे दस्तावेज WhatsApp पर मंगवाए।
फिर उसे बताया गया कि नौकरी के लिए Future Wings Learning Institute से एविएशन डिप्लोमा जरूरी है। पीड़ित ने UPI के जरिए ₹7,000 का भुगतान कर दिया। इसके बाद उसे कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और नौकरी का ऑफर भेजा गया।
जब पीड़ित ने “Bretish Airways” के बारे में जांच की तो उसे ऐसी कोई वास्तविक एयरलाइन नहीं मिली। फोन नंबरों पर संपर्क बंद होने के बाद उसने National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर शिकायत की और 1930 साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन का इस्तेमाल किया।
पुलिस ने कैसे पकड़ा नेटवर्क?
शिकायत के आधार पर 14 जुलाई 2026 को दिल्ली के Central District Cyber Police Station में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान सिर्फ मोबाइल नंबरों पर निर्भर रहने के बजाय IPDR, ब्रॉडबैंड डिटेल, वेबसाइट रजिस्ट्रेशन, UPI ट्रांजैक्शन और बैंक खातों के पैसों के लेन-देन का विश्लेषण किया।
इसी तकनीकी जांच और money trail के आधार पर आरोपियों का नेटवर्क नोएडा तक पहुंचा। कथित मास्टरमाइंड Sandeep Kumar (23) और उसके सहयोगी Akhil Kumar (27) को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद पूछताछ और डिजिटल सबूतों से वेबसाइट बनाने वाले व्यक्ति तथा तीन टेली-कॉलर्स की भूमिका सामने आई।
गिरफ्तार आरोपियों में पुलिस के अनुसार Sandeep Kumar, Akhil Kumar, website developer Rakesh Kumar और tele-callers Shweta, Sapna तथा Sakshi शामिल हैं।
फर्जी कंपनी बनाने की पूरी रणनीति
पुलिस के मुताबिक Sandeep पहले कथित तौर पर फर्जी aviation-job कंपनियों के लिए tele-caller के रूप में काम करता था। बाद में उसने अपना फर्जी कारोबार शुरू किया और Akhil के साथ 50-50 साझेदारी में यह नेटवर्क खड़ा किया।
दोनों ने नोएडा के एक किराए के ऑफिस से कथित तौर पर फर्जी कंपनियां चलानी शुरू कीं। इसके लिए:
- फर्जी वेबसाइटें तैयार कराई गईं
- ऑनलाइन जॉब पोर्टल से job-seekers का डेटा खरीदा गया
- महिलाओं को tele-callers के रूप में नियुक्त किया गया
- कॉलर्स खुद को एयरलाइन या HR अधिकारी बताते थे
- नौकरी से पहले कथित aviation course को अनिवार्य बताया जाता था
- उम्मीदवारों से ₹7,000–₹10,000 लिए जाते थे
- भरोसा जीतने के लिए फर्जी ऑफर लेटर और प्रमाणपत्र भेजे जाते थे।
जब “Bretish Airways” को लेकर शिकायतें आने लगीं तो पुलिस के अनुसार आरोपियों ने “Shankh Airways” और “Excellence Learning Institute” जैसे नए नामों से वेबसाइटें बनाकर अपना काम जारी रखने की कोशिश की।
10 शिकायतें सामने आईं, लेकिन असली संख्या और बड़ी हो सकती है
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 लैपटॉप, 8 मोबाइल फोन, 8 SIM कार्ड और 2 रजिस्टर बरामद किए हैं। इन रजिस्टरों में कथित तौर पर नौकरी तलाशने वालों से संबंधित जानकारी थी।
जांच में National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर इस नेटवर्क से जुड़ी 10 शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तव में कितने लोगों से ठगी हुई और कुल कितनी रकम इस नेटवर्क के जरिए हासिल की गई।
विश्लेषण: छोटी रकम लेकर बड़ा नेटवर्क कैसे बनाया जाता है?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ ₹7,000 या ₹10,000 की कथित ठगी नहीं है। असली खतरा कम रकम वाली, बड़े पैमाने की साइबर ठगी का मॉडल है।
ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर एक व्यक्ति से बहुत बड़ी रकम लेने के बजाय हजारों नौकरी चाहने वालों को छोटी रकम का लालच देते हैं। इससे पीड़ित कई बार शिकायत भी नहीं करता। इसी तरह का मॉडल दिल्ली पुलिस ने 2025 में पकड़े गए एक अन्य फर्जी एयरलाइन जॉब रैकेट में भी देखा था, जिसमें आरोपियों से जुड़े 40 से अधिक NCRP शिकायतें सामने आई थीं।
इससे एक बड़ा सबक सामने आता है—फर्जी नौकरी का कारोबार अब सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं है। इसमें सोशल मीडिया विज्ञापन + नकली वेबसाइट + डेटा लीक/खरीद + टेली-कॉलिंग + फर्जी दस्तावेज + डिजिटल पेमेंट, यानी पूरा संगठित डिजिटल सिस्टम इस्तेमाल किया जा रहा है।
नौकरी तलाशने वालों को किन संकेतों से सावधान रहना चाहिए?
1. नौकरी के लिए पहले पैसे मांगना:
अगर कंपनी नौकरी देने से पहले registration, training, security, uniform या processing fee मांग रही है, तो पहले उसकी स्वतंत्र जांच करें।
2. कंपनी का अस्तित्व जांचें:
सिर्फ वेबसाइट देखकर भरोसा न करें। कंपनी का वास्तविक कारोबार, आधिकारिक वेबसाइट, कॉर्पोरेट रिकॉर्ड और विश्वसनीय समाचार स्रोतों में मौजूदगी जांचें।
3. WhatsApp पर दस्तावेज भेजने में सावधानी:
Aadhaar, PAN, CV और मार्कशीट जैसे दस्तावेज अज्ञात HR या recruiter को भेजने से पहले उसकी पहचान सत्यापित करें।
4. एयरपोर्ट नौकरी का लालच = अतिरिक्त सतर्कता:
IGI Airport जैसी प्रतिष्ठित जगह पर नौकरी के नाम पर अगर कोई व्यक्ति तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाता है, तो इसे red flag मानें।
5. फर्जी ऑफर लेटर से भ्रमित न हों:
Logo, signature, NOC और appointment letter असली होने की गारंटी नहीं हैं। दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
सबसे जरूरी बात
नौकरी पाने के लिए पैसा देना सामान्य भर्ती प्रक्रिया नहीं माना जाना चाहिए। किसी विज्ञापन या recruiter पर भरोसा करने से पहले कंपनी और नौकरी की स्वतंत्र पुष्टि करें। अगर ऑनलाइन ठगी हो जाए तो तुरंत बैंक/पेमेंट सर्विस को सूचित करने के साथ 1930 और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल छह संदिग्ध गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं तथा इसके कितने पीड़ित हैं।
